बिहार में बड़ा सियासी बदलाव? क्या मुख्यमंत्री पद छोड़ेंगे नीतीश कुमार
सूत्रों का दावा: राज्यसभा जा सकते हैं नीतीश, डिप्टी CM की कमान बेटे निशांत को; BJP नेता बन सकते हैं नए मुख्यमंत्री

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से खबर है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) जल्द ही अपने पद से हट सकते हैं और राज्यसभा की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही, उनके बेटे निशांत (Nishant Kumar) को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि अगर ऐसा होता है तो मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के किसी वरिष्ठ नेता को सौंपी जा सकती है। हालांकि, इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
2025 चुनाव से पहले नई रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सत्ता संतुलन में बदलाव की तैयारी हो सकती है। पिछले कुछ समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि नेतृत्व परिवर्तन संभव है, लेकिन नीतीश कुमार के प्रशासनिक अनुभव और चुनावी ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए निर्णय टाला जाता रहा।
75 वर्षीय नीतीश कुमार अब तक 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। 2015 से वे लगातार इस पद पर बने हुए हैं, सिवाय उस छोटे दौर के जब Jitan Ram Manjhi को मुख्यमंत्री बनाया गया था।
गठबंधन की राजनीति के माहिर खिलाड़ी
नीतीश कुमार ने बिहार में अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों के साथ सरकार चलाई है। कभी NDA के साथ तो कभी महागठबंधन के साथ, उन्होंने हर परिस्थिति में खुद को एक मजबूत और प्रासंगिक नेता के रूप में स्थापित किया। उनकी व्यक्तिगत छवि और ‘सुशासन’ की पहचान ने उन्हें राज्य के लोकप्रिय नेताओं की सूची में बनाए रखा। राजनीतिक उठापटक के बावजूद उनका एक स्थायी वोट बैंक कायम रहा।
महिला वोट बैंक बना सबसे बड़ा सहारा
जब कई राजनीतिक पंडितों ने 2025 में उनकी सियासी ताकत को कमतर आंका, तब महिलाओं के समर्थन ने उन्हें मजबूती दी। स्कूल जाने वाली छात्राओं के लिए साइकिल योजना और राज्य में लागू शराबबंदी जैसे फैसलों ने महिला मतदाताओं के बीच भरोसा पैदा किया। यही सामाजिक आधार कई चुनावों में निर्णायक साबित हुआ।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर
- वर्ष 2000 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने
- अब तक 10 बार शपथ ग्रहण
- NDA और महागठबंधन दोनों के साथ सरकार चलाई
- महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे पर जोर






