चंडीगढ़ में नकली नोट छापने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश, 5 आरोपी गिरफ्तार, 7.17 लाख की फेक करेंसी जब्त

Chandigarh : चंडीगढ़ पुलिस ने शुक्रवार को नकली भारतीय करेंसी नोट छापने और बाजार में खपाने वाले एक संगठित और मल्टी-स्टेट गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 7 लाख 17 हजार 400 रुपये की नकली करेंसी (1777 नोट) बरामद की है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और अब तक करोड़ों रुपये के नकली नोट अलग-अलग राज्यों में सर्कुलेट कर चुका है।
मल्टी-स्टेट नेटवर्क का खुलासा
DSP क्राइम धीरज कुमार के मुताबिक, क्राइम ब्रांच ने FIR दर्ज करने के बाद गहन जांच की, जिसमें हरियाणा, दिल्ली, यूपी, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड तक फैले नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस ने नकली नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी जब्त किया है—जैसे प्रिंटर, इंक, कटर, पेपर और धागे।
अविनाश की गिरफ्तारी से खुला पूरा खेल
मामले की शुरुआत सेक्टर-43 बस स्टैंड से अविनाश की गिरफ्तारी से हुई। अविनाश (जम्मू निवासी) सेक्टर-52 के एक PG में रह रहा था। छापेमारी में उसके कमरे से दिल्ली निवासी दोस्त सत्यम का सुराग मिला और 1.01 लाख रुपये की नकली करेंसी बरामद हुई। इसके बाद चंडीगढ़ में अलग-अलग रेड के दौरान 4.76 लाख रुपये की फेक करेंसी पकड़ी गई।
सप्लायर संदीप और आगे की कड़ियाँ
मोबाइल जांच में हरियाणा के महेंद्रगढ़ निवासी संदीप का नाम सामने आया—जो इस नेटवर्क का मुख्य सप्लायर था। उसके घर से करीब 10 हजार रुपये की नकली करेंसी और सारा रॉ मटेरियल मिला। इसी आधार पर पुलिस ने देहरादून और सहारनपुर में छापेमारी की, जहां अब्दुल्ला और शहजाद नकली नोट खरीदकर आगे सर्कुलेट कर रहे थे। दोनों से 1.10 लाख रुपये की फेक करेंसी बरामद हुई।
टेलीग्राम-इंस्टाग्राम से होती थी डील
- गिरोह सोशल मीडिया—खासकर टेलीग्राम और इंस्टाग्राम—पर बने ग्रुप्स के जरिए संपर्क में रहता था।
- प्रिंटर वीडियो और नोटों के सैंपल भेजे जाते
- 5–10 नोट सैंपल के तौर पर दिए जाते
- फिर 1:4 या 1:3 का एक्सचेंज रेश्यो तय होता (जैसे 4 लाख फेक के बदले 1 लाख असली)
- डिलीवरी इन-हैंड, बाय-पर्सन या पार्सल से होती
- लो-क्वालिटी नोट, सिक्योरिटी फीचर गायब
पुलिस के अनुसार बरामद नोट लो-क्वालिटी हैं, जो घरेलू प्रिंटर और PSD फाइल से छापे गए। इनमें ब्लाइंड पर्सन के लिए सिक्योरिटी फीचर समेत कई जरूरी सुरक्षा चिन्ह गायब हैं। पूछताछ में आरोपियों ने अब तक 20 लाख रुपये के नकली नोट बाजार में उतारने की बात स्वीकारी है, जबकि पुलिस का अनुमान है कि यह आंकड़ा 40 लाख रुपये तक हो सकता है।
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोटों की सप्लाई किन-किन इलाकों में हुई और और कौन लोग इस नेटवर्क से जुड़े हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं।
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