गोरखपुर में होली के मंच से ठहाके: CM योगी ने रवि किशन पर ली मज़ेदार चुटकी
‘नाच-गाकर भी कमा लेंगे…’ बयान पर मुस्कुराया मंच, तालियों से गूंजा कार्यक्रम

गोरखपुर | होलिका दहन 2026 : CM Yogi Adityanath एक बार फिर अपने हल्के-फुल्के अंदाज़ को लेकर चर्चा में हैं। गोरखपुर में आयोजित होलिका दहन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने Ravi Kishan को लेकर ऐसा मज़ाकिया बयान दिया कि मंच से लेकर जनसभा तक ठहाके गूंज उठे। उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
होली के रंग में दिखा सियासी अंदाज़
मुख्यमंत्री अपने तीन दिवसीय दौरे पर गोरखपुर पहुंचे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक भक्त प्रह्लाद शोभायात्रा में भाग लिया, फूलों की होली खेली और लोगों को सौहार्दपूर्ण तरीके से त्योहार मनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के मंच से संबोधन करते हुए मुख्यमंत्री ने होली के संदेश—आपसी मतभेद भूलकर गले मिलने—पर जोर दिया। इसी क्रम में उन्होंने सांसद रवि किशन और कालीबाड़ी के महंत के बीच पहले की खींचतान का जिक्र करते हुए कहा कि त्योहार मन की दूरियां मिटाने का अवसर होता है।
‘रवि किशन तो कहीं भी कमा लेंगे…’ बयान पर छाए ठहाके
गोरखपुर के पांडेयहाता क्षेत्र में संकरी गलियों के चौड़ीकरण के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का उद्देश्य किसी को हटाना नहीं, बल्कि व्यापार को आगे बढ़ाना है।
इसी दौरान उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि रवि किशन तो अपनी कला के दम पर कहीं भी नाच-गाकर जीविका कमा सकते हैं, लेकिन धार्मिक स्थल से जुड़े लोगों के लिए स्थानीय समृद्धि जरूरी है। जैसे ही यह टिप्पणी सामने आई, मंच पर बैठे रवि किशन भी मुस्कुरा उठे और सभा में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज गई।
मुख्यमंत्री भी यह कहते हुए मुस्कुराते नजर आए, जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवी बन गया।
रवि किशन ने भी किया स्वागत का ऐलान
कार्यक्रम में सांसद रवि किशन ने मुख्यमंत्री के विदेशी दौरे—सिंगापुर और जापान—का जिक्र करते हुए कहा कि उनके स्वागत में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने मंच से डीजे को ‘रंग बरसे’ गीत बजाने की बात कहकर माहौल को और हल्का बना दिया।
गोरखपुर और होली की परंपरा
गोरखपुर में होलिका दहन और भक्त प्रह्लाद शोभायात्रा कई वर्षों से आयोजित की जाती रही है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, संत समाज और जनप्रतिनिधि शामिल होते हैं। यह कार्यक्रम सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोरखपुर से विशेष जुड़ाव रहा है, इसलिए यहां के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी का राजनीतिक और सामाजिक महत्व दोनों होता है।
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