Cyber Crime Alert! हरियाणा के डीजीपी ने बताए बैंकिंग फ्रॉड के असली दोषी—जानें पूरी रिपोर्ट

Haryana : हरियाणा के डीजीपी ओपी सिंह ने सोमवार को ऐसा औचक निरीक्षण किया, जिसने पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया। डीजीपी बिना किसी पूर्व सूचना के गुरुग्राम सेक्टर-43 स्थित साइबर थाना पहुंचे और खुद को डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड का पीड़ित बताते हुए शिकायत दर्ज कराने की बात कही।
गेट पर तैनात सिपाही उन्हें पहचान नहीं पाया और सामान्य शिकायतकर्ता की तरह कमरे नंबर 24 में ड्यूटी ऑफिसर के पास भेज दिया। कुछ ही देर में जब उनकी वास्तविक पहचान सामने आई तो थाना परिसर में सीपी, डीसीपी, एसीपी, एसएचओ समेत कई अधिकारी तुरंत पहुंच गए।
कार्यशैली से संतुष्ट हुए डीजीपी
निरीक्षण के दौरान डीजीपी ने साइबर क्राइम शाखा की कार्यशैली को संतोषजनक पाया और पुलिसकर्मियों की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि—साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों पर फौरन और संवेदनशील कार्रवाई की जाए, पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने के लिए प्रक्रिया सरल और तेज हो,तकनीकी दक्षता और व्यवहार दोनों में सुधार लाया जाए।
“साइबर क्राइम हर घर की समस्या बन चुका है”
डीजीपी ने मौके पर मौजूद IG साइबर को निर्देश दिया कि—हर सप्ताह कम से कम एक बार साइबर थाना का निरीक्षण करें,साइबर अपराध पीड़ितों की तीन सबसे बड़ी समस्याओं की पहचान करके समाधान सुनिश्चित करें, उन्होंने कहा कि आज साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है और यह हर घर की समस्या बन चुका है। इसलिए पुलिस स्टाफ के व्यवहार, प्रक्रिया और तकनीकी क्षमता में सुधार अनिवार्य है।
APK फाइल फ्रॉड पर बड़ा बयान: “ग्राहक नहीं, बैंक जिम्मेदार”
डीजीपी ने सबसे अहम बात यह कही कि APK फाइल के जरिए होने वाले बैंकिंग साइबर फ्रॉड में अक्सर पीड़ित की कोई गलती नहीं होती। उन्होंने बताया कि— साइबर ठग मोबाइल में APK फाइल भेजकर लोगों के फोन एक्सेस कर लेते हैं,पीड़ित की ओर से कोई निकासी आदेश न देने के बावजूद पैसा खाते से निकल जाता है। ऐसे मामलों में IT Act के तहत बैंक दोषी होता है। डीजीपी ने स्पष्ट कहा: नुकसान का खामियाजा ग्राहक नहीं, बैंक उठाएगा।” उन्होंने निर्देश दिया कि आगे से हर साइबर फ्रॉड केस में यह जांच होगी कि— गलत निकासी के बाद बैंक ने क्या कदम उठाए। बैंक ने सुरक्षा प्रक्रिया का पालन किया या नहीं






