Haryana Doctors Strike : हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल खत्म; सरकार और डॉक्टरों के बीच बनी बड़ी सहमति, मरीजों को मिली राहत

Haryana Doctors Strike : हरियाणा में चार दिनों से जारी डॉक्टरों की हड़ताल आखिरकार गुरुवार देर रात समाप्त हो गई। लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही बाधा के बीच राज्य के लाखों मरीजों को बड़ी राहत मिली है। सरकार और हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMSA) के बीच चली करीब पांच घंटे की मैराथन बैठक के बाद यह समझौता हुआ।
इस सहमति के बाद राज्यभर के डॉक्टर देर रात ही अस्पतालों में अपनी ड्यूटी पर लौट आए, जिससे शुक्रवार सुबह से स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से बहाल हो गईं।
क्यों हुई थी हड़ताल?
डॉक्टरों ने अपनी चार प्रमुख मांगों को लेकर हड़ताल की थी, जिनमें शामिल थीं: मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) स्कीम, एसएमओ की सीधी भर्ती,स्वास्थ्य ढांचे में कर्मचारियों की कमी को पूरा करना,कार्य परिस्थितियों और प्रमोशन नीति में सुधार, इन मुद्दों पर लंबे समय से चर्चा जारी थी, पर अंतिम सहमति न बनने के कारण डॉक्टरों ने विरोध का रास्ता चुना।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आह्वान और सरकार की कोशिशें
स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. मनीष बंसल के अनुसार, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने डॉक्टरों से हड़ताल वापस लेने की अपील की थी। उसी के बाद गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग, वित्त विभाग और डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के बीच निर्णायक बैठक हुई। बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया कि कुछ मांगों पर तुरंत निर्णय संभव नहीं है, जबकि कुछ पर सहमति बन सकती है। MACP पर सहमति नहीं बन सकी, लेकिन इसके विकल्प के रूप में सरकार ने एक नया प्रस्ताव रखा।
सरकार का बड़ा प्रस्ताव: आयुष्मान योजना के तहत इंसेंटिव मॉडल
सबसे महत्वपूर्ण सहमति आयुष्मान भारत योजना के तहत ऑपरेशन और उपचार करने वाले डॉक्टरों को इंसेंटिव देने पर बनी। सरकार का मानना है कि इससे न केवल डॉक्टरों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि गरीब मरीजों को भी गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलेंगी।
इंसेंटिव मॉडल की प्रक्रिया क्या होगी?
इस मॉडल का प्रारूप तैयार करने के लिए विशेष कमेटी बनाई गई है। यह समिति एक महीने के भीतर रिपोर्ट देगी। अन्य राज्यों में लागू प्रोत्साहन मॉडल और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के दिशा-निर्देशों की भी जांच की जाएगी। इसके बाद अंतिम मॉडल लागू किया जाएगा। यह कदम डॉक्टरों की मांगों और सरकार की प्राथमिकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने वाला माना जा रहा है।
अन्य तीन मांगों पर भी बनी सहमति
डॉ. मनीष बंसल के अनुसार, बाकी तीन मांगों पर सरकार और डॉक्टरों के बीच सकारात्मक सहमति बन गई है। विशेष रूप से एसएमओ की सीधी भर्ती पर सरकार ने कहा है कि अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन कर निर्णय लिया जाएगा। यह प्रतिबद्धता डॉक्टरों के लिए निर्णायक संकेत है कि सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से ले रही है।
चार दिन की हड़ताल का असर
हड़ताल के दौरान राज्य के कई अस्पतालों में:ओपीडी सेवाएं ठप रहीं,सर्जरी टालनी पड़ी,मरीजों को इमरजेंसी सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ा
स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रभाव और आगे की चुनौतियां
हालांकि सेवाएं बहाल हो गई हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार:स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती,डॉक्टरों की कमी,पदोन्नति और कैडर स्ट्रक्चर की समस्याएं,बढ़ते कार्यभार के अनुरूप प्रोत्साहन, जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। सरकार और डॉक्टरों के बीच हुई यह सहमति इन्हें सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डॉक्टरों की प्रतिक्रिया: बातचीत से समाधान की उम्मीद
HCMSA के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार की ओर से दिखाई गई सकारात्मकता और इंसेंटिव मॉडल पर आगे बढ़ने का भरोसा उनका प्रमुख कारण रहा। डॉक्टरों ने उम्मीद जताई कि बाकी मांगों को भी समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।






