नवजोत सिंह सिद्धू की प्रियंका गांधी से मुलाकात ने फिर छेड़े सियासी सुर, क्या होगी राजनीति में वापसी?

पूर्व क्रिकेटर, टीवी स्टार और दिग्गज राजनेता नवजोत सिंह सिद्धू एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है उनकी अचानक दिल्ली यात्रा और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात। सिद्धू ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए लिखा – “अपनी मेंटर, प्रकाश स्तंभ और मार्गदर्शक देवदूत से मुलाकात हुई। उनके और भाई के प्रति आभारी हूं कि उन्होंने कठिन समय में मेरा साथ दिया।”
नवजोत सिद्धू की इस पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। क्या यह मुलाकात उनके सियासी पुनरागमन का संकेत है? क्या सिद्धू एक बार फिर सक्रिय राजनीति में उतरने जा रहे हैं?
मुलाकात की तस्वीर ने बढ़ाई हलचल
जहां एक ओर नवजोत सिद्धू पिछले कुछ समय से लगातार क्रिकेट कमेंट्री, टीवी रियलिटी शोज़ और कॉमेडी कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं, वहीं राजनीतिक मंच से उनकी दूरी साफ नजर आ रही थी। लेकिन प्रियंका गांधी के साथ उनकी मुलाकात ने एक बार फिर अटकलों को जन्म दे दिया है।
Met my Mentor , lighthouse and Guiding Angel …. Just grateful to her and Bhai for standing by in rough and tough times …. pic.twitter.com/G9GRz11LS6
— Navjot Singh Sidhu (@sherryontopp) October 10, 2025
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह सिर्फ एक “शिष्टाचार भेंट” नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों की तैयारियों का हिस्सा हो सकती है, खासकर तब जब पंजाब कांग्रेस नए नेतृत्व और स्पष्ट दिशा की तलाश में है।
क्रिकेटर से नेता तक – सिद्धू का सफर
नवजोत सिंह सिद्धू का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा।
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क्रिकेट करियर: 1983 से लेकर 1999 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रहे। 51 टेस्ट और 136 वनडे खेले। उन्हें “सिक्सर सिद्धू” के नाम से भी जाना गया।
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टीवी करियर: क्रिकेट के बाद उन्होंने टीवी में कदम रखा। ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’, ‘द कपिल शर्मा शो’ जैसे शोज़ में जज की भूमिका निभाई।
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राजनीति में एंट्री: 2004 में भाजपा से अमृतसर से सांसद बने। बाद में 2017 में कांग्रेस में शामिल होकर अमृतसर ईस्ट से विधायक बने और कैबिनेट मंत्री भी रहे।
राजनीति में वापसी के संकेत?
हालिया मुलाकात और सोशल मीडिया पोस्ट से एक बात तो साफ है –नवजोत सिद्धू अभी भी कांग्रेस नेतृत्व के संपर्क में हैं और पार्टी के भीतर उनका कद बरकरार है। पंजाब में आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस फिर से पुराने चेहरों को सक्रिय करने की रणनीति अपना सकती है।






