Parliament Winter Session: कंगना रनौत का राहुल गांधी पर तीखा पलटवार—‘अटल जी से तुलना कर रहे हैं तो कर लें BJP जॉइन ’

Parliament Winter Session: संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) का आज चौथा दिन राजनीतिक बयानबाज़ी और तीखी नोकझोंक से भरा रहा। यह शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा और कुल 15 बैठकों का कार्यक्रम तय है।
आज सुबह चौथे दिन लोकसभा (Parliament Winter Session) की कार्यवाही 11 बजे तक स्थगित की गई, वहीं चुनाव सुधारों (SIR) पर 9 दिसंबर को 10 घंटे लंबी चर्चा होनी तय बताया जा रहा है जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसी के साथ ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने पर विशेष चर्चा भी प्रस्तावित है। उधर, ‘संचार साथी’ ऐप को लेकर भी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
कंगना रनौत का राहुल गांधी पर तीखा पलटवार
राहुल गांधी का आरोप है कि उन्हें विदेशी प्रतिनिधियों से मिलने नहीं दिया जा रहा, इस पर BJP सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने पलटवार करते हुए कहा कि ऐसे फैसले सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। अटल जी देशभक्त थे। पूरे देश को उन पर गर्व था…लेकिन देश के लिए राहुल गांधी की भावनाएं काफी शंकास्पद हैं। इंटरनेशनल साज़िशें या देश में दंगे करवाने की बात हो या ‘टुकड़े-टुकड़े’ की साज़िशें- यह थोड़ा शंकास्पद है…
कंगना ने तंज कसते हुए कहा—कि अगर राहुल गांधी अपनी तुलना अटल जी से कर रहे हैं, तो मेरा उनके लिए बस एक सुझाव रहेगा कि भाजपा में शामिल हो जाइए। भगवान ने आपको भी जीवन दिया है और आप भी अटल जी बन सकते हैं…
प्रोटोकॉल तोड़कर क्या साबित करना चाहती है सरकार? – प्रियंका गांधी
वहीँ कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर लोकतांत्रिक परंपराएँ तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि “यह प्रोटोकॉल होता है कि कोई भी विदेशी गणमान्य व्यक्ति नेता प्रतिपक्ष से मिलते हैं लेकिन इस प्रोटोकॉल का उल्टा होता है। इस सरकार की सभी नीतियां इसी आधार पर हैं…वो किसी और आवाज को उठने नहीं देना चाहते हैं और किसी और का पक्ष नहीं सुनना चाहते। वो प्रोटोकॉल को तोड़ रहे हैं… उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले भारत की लोकतांत्रिक छवि और वैश्विक साख दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।
विपक्ष को विदेश नीति से दूर रखा जा रहा – राहुल गांधी
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा,कि “जो भी बाहर से आते हैं, उनकी नेता प्रतिपक्ष के साथ बैठक होती है, यह परंपरा रही है…लेकिन आजकल यह होता कि विदेशी गणमान्य व्यक्ति आते हैं या जब मैं कहीं बाहर जाता हूं तो सरकार उनको सुझाव देती है कि नेता प्रतिपक्ष से नहीं मिलना चाहिए, तो यह(सरकार) उनकी नीति है…ये हर बार ऐसा करते हैं…संबंध तो सबके साथ है…हम भी हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व करते हैं सिर्फ सरकार प्रतिनिधित्व नहीं करती है। सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष के लोग बाहर के लोगों से मिलें…
पहले विदेशी मेहमान हमेशा नेता प्रतिपक्ष से मिलते थे, यह परंपरा थी। लेकिन अब सरकार उन्हें बता देती है कि विपक्ष के नेता से नहीं मिलना चाहिए। यह सिर्फ सरकार का नहीं—पूरे भारत का प्रतिनिधित्व कमजोर करने की कोशिश है।






