ईरान पर ‘फाइनल अल्टीमेटम’! ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने को, दुनिया की नजरें टिकीं


Donald Trump Iran Warning : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अगर तय समय तक समझौता नहीं हुआ, तो बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू हो सकती है। ट्रंप द्वारा दी गई समय सीमा अब समाप्ति के करीब है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
क्या है ट्रंप की डेडलाइन?
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को वॉशिंगटन समयानुसार मंगलवार रात 8 बजे तक का समय दिया है (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे)।
इस समयसीमा के भीतर ईरान को:
एक स्वीकार्य समझौते पर सहमति देनी होगी
होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल आपूर्ति पूरी तरह चालू रखने की गारंटी देनी होगी
ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि डेडलाइन के बाद सैन्य कार्रवाई “बेहद तेज़ और विनाशकारी” हो सकती है।
ट्रंप की चेतावनी: ‘कुछ भी अब सीमा से बाहर नहीं’
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि संभावित हमलों में ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर—जैसे पुल और बिजली संयंत्र—को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हालात ऐसे हैं जहां “लगभग कुछ भी अब दायरे से बाहर नहीं है”, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
ईरान का रुख: संयम के बाद सख्ती के संकेत
ईरान की ओर से सीधे प्रतिक्रिया तो नहीं आई, लेकिन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने कड़ा संदेश दिया है।
आईआरजीसी ने कहा:
अब तक उसने “संयम” बरता है
आगे जवाबी कार्रवाई और भी सख्त हो सकती है
यदि अमेरिका ने सीमा पार की, तो जवाब क्षेत्र के बाहर तक जाएगा
साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि तेल और गैस आपूर्ति को लंबे समय तक बाधित किया जा सकता है।
क्यों अहम है होर्मुज़ जलडमरूमध्य?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का करीब 20% गुजरता है। अगर यहां बाधा आती है, तो:
- वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है
- कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है
- वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा
अमेरिका की ओर से और क्या संकेत?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अब फैसला ईरान के हाथ में है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान समयसीमा के भीतर जवाब देगा, हालांकि बातचीत की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
लंबे समय से जारी टकराव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कोई नया नहीं है। पिछले कई वर्षों से दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और प्रतिबंधों को लेकर विवाद चलता रहा है। हाल के हफ्तों में यह टकराव और बढ़ गया, जिसमें अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान पर कई दबाव बनाए।







