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पुणे में सेना के डॉक्टरों ने किया चमत्कार, 9 महीने के बच्चे के फेफड़े से निकाला LED बल्ब, बचाई जान

आर्मी अस्पताल के विशेषज्ञों ने बिना बड़ी सर्जरी के सफल ऑपरेशन कर मासूम को दी नई जिंदगी

पुणे, 31 मई। महाराष्ट्र के पुणे स्थित भारतीय सेना के एक विशेष अस्पताल में डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ और आधुनिक चिकित्सा तकनीक की मदद से 9 महीने के एक शिशु की जान बचाने में सफलता हासिल की है। खेलते समय एक छोटा LED बल्ब निगल लेने के कारण बच्चे की सांस की नली में गंभीर रुकावट पैदा हो गई थी, लेकिन सेना के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने समय रहते जटिल प्रक्रिया को अंजाम देकर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

यह मामला तब सामने आया जब बच्चे को तेज सांस लेने में परेशानी और गंभीर श्वसन संकट की स्थिति में अस्पताल लाया गया। जांच में पता चला कि बल्ब फेफड़े की मुख्य श्वास नली में फंस गया था और उससे जुड़े धातु के तार अंदरूनी ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकते थे।

बिना छाती खोले किया गया सफल ऑपरेशन

डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि फेफड़े में फंसी वस्तु बेहद नुकीली थी। ऐसे मामलों में सामान्यतः बड़ी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन विशेषज्ञ टीम ने अत्याधुनिक ब्रोंकोस्कोपी तकनीक का उपयोग करने का फैसला किया। इस प्रक्रिया में एक पतली कैमरा युक्त ट्यूब को श्वसन मार्ग के जरिए फेफड़ों तक पहुंचाया जाता है। इसी तकनीक की मदद से डॉक्टरों ने बिना कोई बड़ा चीरा लगाए LED बल्ब को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

थोड़ी सी चूक बन सकती थी जानलेवा

चिकित्सकों के अनुसार बल्ब से जुड़े तार फेफड़े और श्वास नली की दीवारों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते थे। यदि समय पर इलाज नहीं मिलता तो बच्चे को फेफड़ों के सिकुड़ने, संक्रमण या सांस पूरी तरह बंद होने जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ सकता था। विशेषज्ञ टीम ने अत्यधिक सावधानी और सटीकता के साथ प्रक्रिया को पूरा किया, जिससे बच्चे की जान बच गई और उसे किसी बड़ी जटिलता का सामना नहीं करना पड़ा।

 

सेना की दक्षिणी कमान ने की डॉक्टरों की सराहना

इस सफल चिकित्सा उपलब्धि की भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने भी प्रशंसा की है। सेना की ओर से जारी जानकारी में कहा गया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अत्यंत चुनौतीपूर्ण स्थिति में पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए बच्चे को सुरक्षित जीवनदान दिया। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि ऑपरेशन के बाद बच्चे की स्थिति पूरी तरह स्थिर है और उसकी सांस लेने की प्रक्रिया सामान्य हो चुकी है।

माता-पिता के लिए डॉक्टरों की अहम सलाह

घटना के बाद बाल रोग विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि एक वर्ष से कम उम्र के बच्चे अक्सर छोटी वस्तुएं मुंह में डाल लेते हैं, जिससे गंभीर हादसे हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के हिस्से, सिक्के, पिन, तार या अन्य छोटी वस्तुओं को बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए। यदि किसी बच्चे द्वारा ऐसी वस्तु निगलने की आशंका हो तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

Author

  • अमर सिंह
    संस्थापक एवं एडिटर | Rashtra Khabar News

    अमर सिंह को पत्रकारिता के क्षेत्र में 19 वर्षों का अनुभव है। वे प्रतिष्ठित समाचार चैनलों में वीडियो जर्नलिस्ट के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वे Hindxpress Media House के संस्थापक हैं और Rashtra Khabar News के माध्यम से हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ सहित देशभर की खबरों एवं जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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