‘बेटी दूसरे घर जाएगी’ वाली सोच छोड़िए! डॉ. अर्चना गुप्ता ने परिवारों को क्यों दी नसीहत?

अंबाला, 17 अक्टूबर 2026। बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केवल आर्थिक मदद देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा हासिल करने, अपनी प्रतिभा निखारने और स्वतंत्र पहचान बनाने के अवसर देना भी जरूरी है। यह संदेश भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने अंबाला में आयोजित सामूहिक कन्या विवाह समारोह के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि परिवारों की सकारात्मक सोच और प्रोत्साहन से ही बेटियां जीवन में आगे बढ़कर अपनी क्षमताओं का बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
सामूहिक विवाह समारोह में 11 नवयुगलों को दिया आशीर्वाद
अंबाला के सेक्टर-7 स्थित अग्रवाल भवन में शनिवार को जैन फेलोशिप क्लब सोसायटी की ओर से सेवा संकल्प अभियान के तहत सामूहिक कन्या विवाह समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने विवाह बंधन में बंधे 11 नवयुगलों को सुखद, समृद्ध और खुशहाल वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं।
इस दौरान उन्होंने जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग करने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सामाजिक प्रयास परिवारों को सम्मान के साथ नई शुरुआत करने में मदद करते हैं। उन्होंने जैन फेलोशिप क्लब सोसायटी के सेवा कार्यों को समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का उदाहरण बताया।
बेटी की शिक्षा और सपनों को प्राथमिकता देना जरूरी
डॉ. अर्चना गुप्ता ने कहा कि समाज में बेटियों की शिक्षा को लेकर पुरानी धारणाओं को बदलने की आवश्यकता है। आज भी कुछ परिवारों में यह सोच देखने को मिलती है कि शादी के बाद बेटी को दूसरे घर जाना है, इसलिए उसकी उच्च शिक्षा पर अधिक ध्यान देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने इस मानसिकता को बेटियों की प्रगति में बाधा बताते हुए परिवारों से अपनी सोच बदलने की अपील की।
अपने जीवन का उदाहरण साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी मां ने उन्हें उच्च शिक्षा दिलाने और डॉक्टर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। समालखा जैसे स्थान पर रहते हुए भी उनकी मां ने उनकी पढ़ाई को प्राथमिकता दी। परिवार के इसी भरोसे और सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि जब परिवार बेटियों की क्षमताओं पर विश्वास करता है, तो उनके लिए आगे बढ़ने के रास्ते खुलते हैं। इसलिए बेटियों के सपनों को सीमित करने के बजाय उन्हें अपनी मंजिल चुनने और उसे हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
आर्थिक मदद से आगे बढ़कर आत्मनिर्भरता पर देना होगा जोर
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक सीमित नहीं है। संपन्न परिवारों को भी अपनी बेटियों और बहुओं की प्रतिभा को पहचानने तथा उन्हें अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
उनके अनुसार, महिलाओं को अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलने से उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। परिवारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बेटियां अपनी शिक्षा, करियर और व्यक्तिगत आकांक्षाओं को पूरा कर सकें।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे बेटियों की शिक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दें। उनका कहना था कि महिलाओं को समान अवसर देना केवल व्यक्तिगत या पारिवारिक विकास का विषय नहीं, बल्कि समाज की समग्र प्रगति से भी जुड़ा है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का किया उल्लेख
डॉ. अर्चना गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2015 में हरियाणा से शुरू किए गए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने बेटियों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव लाने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि आज बेटियां शिक्षा, खेल और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा के दम पर उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। ऐसे में परिवारों और समाज को उनके लिए अवसर बढ़ाने तथा उन्हें आगे बढ़ने में सहयोग देने की जरूरत है।
कार्यक्रम में ये गणमान्य व्यक्ति रहे मौजूद
समारोह में पूर्व कैबिनेट मंत्री असीम गोयल, जिला भाजपा अध्यक्ष मनदीप राणा, जिला प्रभारी मदन चौहान, मेयर अक्षिता सैनी, महिला मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष रिचा पाहवा, प्रदेश सचिव गुरप्रीत कौर, मुख्य प्रवक्ता डॉ. संजय शर्मा, जिनेश जैन, अभय जैन और संयम जैन सहित जैन फेलोशिप क्लब के सदस्य तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
समाज पर क्या पड़ेगा असर?
बेटियों की शिक्षा, करियर और आत्मनिर्भरता को लेकर परिवारों की सोच में बदलाव महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद कर सकता है। इससे उन्हें आर्थिक फैसलों में भागीदारी, अपनी प्रतिभा के अनुरूप काम करने और जीवन में स्वतंत्र पहचान बनाने के अवसर मिलते हैं। सामूहिक विवाह जैसे सामाजिक आयोजन जरूरतमंद परिवारों को सहयोग देने के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी देते हैं।








