590 करोड़ बैंक घोटाला: हरियाणा विधानसभा में गूंजा मामला, CM नायब सैनी का आश्वासन – “दोषी नहीं बचेंगे”
IDFC First Bank से जुड़े फिक्स्ड डिपॉजिट विवाद पर सदन में तीखी बहस, Nayab Singh Saini ने कहा– जांच जारी, रकम पूरी तरह सुरक्षित

चंडीगढ़: हरियाणा की राजनीति में सोमवार को उस वक्त हलचल मच गई जब 590 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया। मामला निजी क्षेत्र के बैंक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ी गड़बड़ियों का बताया जा रहा है।
विपक्ष की ओर से इस विषय को गंभीर बताते हुए सरकार से जवाब मांगा गया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले को हल्के में नहीं ले रही और शुरुआती स्तर पर ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मुख्यमंत्री का बयान: “सरकार सतर्क, पैसा सुरक्षित”
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन में कहा कि जब खातों और स्टेटमेंट्स में विसंगतियां सामने आईं तो तुरंत स्पष्टीकरण मांगा गया। दस्तावेजों में मेल न खाने पर सरकार ने एहतियातन राशि को एक अधिकृत बैंक में ब्याज सहित स्थानांतरित करने का निर्णय लिया।
उन्होंने यह भी बताया कि बैंक की ओर से नियामक संस्था को पत्र भेजकर एक कर्मचारी की गलती का हवाला दिया गया है। फिलहाल मामले को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और विजिलेंस विभाग को सौंप दिया गया है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि:
- पूरी रकम सुरक्षित है
- हर एक रुपया वापस सुनिश्चित किया जाएगा
- दोषियों की पहचान के बाद कड़ी कार्रवाई होगी
- चाहे अधिकारी हो या बैंक कर्मचारी, किसी को छूट नहीं मिलेगी
कैसे सामने आया मामला?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, लगभग चार से पांच दिन पहले इस संभावित गड़बड़ी की जानकारी सरकार तक पहुंची। प्रारंभिक जांच में दस्तावेजों में अंतर पाया गया, जिसके बाद तत्काल जांच के आदेश दिए गए।
मामला फिक्स्ड डिपॉजिट निवेश से संबंधित बताया जा रहा है, जहां बड़ी राशि के प्रबंधन में कथित त्रुटियां उजागर हुईं। हालांकि, जांच पूरी होने तक सरकार ने किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है।
विपक्ष का हमला: पारदर्शिता पर सवाल
सदन में विपक्ष के नेता Bhupinder Singh Hooda ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बैंक ने अपने स्तर पर पहले ही कुछ कार्रवाई की है और नियामक संस्थाओं को सूचित किया है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि चूक कहां हुई।
हुड्डा ने मांग की कि:
- जिम्मेदारी तय की जाए
- जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
- पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए
उन्होंने कहा कि इतने बड़े वित्तीय मामले में जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
जनता और बैंकिंग सिस्टम पर असर
इस प्रकरण का असर केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बैंकिंग प्रणाली में भरोसे का सवाल भी जुड़ा है।
संभावित प्रभाव:
- सरकारी निवेश प्रबंधन की प्रक्रियाओं की समीक्षा
- निजी बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट सुरक्षा पर चर्चा
- वित्तीय निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की मांग
- राजनीतिक स्तर पर जवाबदेही की बहस तेज
हालांकि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद फिलहाल यह स्पष्ट किया गया है कि सरकारी धन सुरक्षित है और घबराने की जरूरत नहीं है।






