हरियाणा विधानसभा बजट सत्र के पांचवें दिन ‘जी-राम-जी’ प्रस्ताव पर घमासान, कांग्रेस का वॉकआउट

चंडीगढ़ | हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र का पांचवां दिन तीखे राजनीतिक टकराव का गवाह बना। सदन में जहां विकास और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर बहस हो रही थी, वहीं ‘जी-राम-जी’ प्रस्ताव को लेकर माहौल अचानक गरमा गया। विवाद इतना बढ़ा कि कांग्रेस विधायकों ने प्रस्ताव का बहिष्कार करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल से शुरू हुआ टकराव
दिन की कार्यवाही प्रश्नकाल से आरंभ हुई। आयुष्मान योजना के लाभार्थियों की स्थिति, शहरों में जलभराव, किसानों को मुआवजा और विश्वविद्यालयों के नामकरण जैसे विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद भाजपा विधायक रामकुमार कश्यप द्वारा प्रस्तुत ‘जी-राम-जी’ से संबंधित प्रस्ताव चर्चा के लिए आया। इसी बिंदु पर विपक्ष ने आपत्ति जताई और सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
स्पीकर से बहस, फिर कांग्रेस का बहिष्कार

“राम भारत की आत्मा हैं” – मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चर्चा के दौरान कहा कि भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति और मूल्यों के प्रतीक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बार-बार राम के नाम से जुड़े विषयों पर असहमति जताती रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष सदन में बहस से बचता है और जनता के बीच अलग संदेश देने की कोशिश करता है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार विपक्ष के रवैये के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने पर विचार कर सकती है।
कांग्रेस का पक्ष: “नियम 84 के तहत प्रक्रिया में खामी”
वहीं कांग्रेस विधायक दल के उपनेता आफताब अहमद और विधायक भारत भूषण बत्रा ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि एजेंडे में सूचीबद्ध प्रस्ताव को संशोधित रूप में पेश किया गया, जो संसदीय नियमों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि पहले जो विषय सूचीबद्ध था, उसे बदलकर “रोजगार गारंटी अवधि 100 से 125 दिन करने” के रूप में प्रस्तुत किया गया। नियमों की व्याख्या और प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि है। यदि कोई प्रस्ताव वैधानिक रूप से स्वीकार्य नहीं है तो उस पर चर्चा करना भी उचित नहीं। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि उनका वॉकआउट चर्चा से भागने के लिए नहीं, बल्कि सदन की परंपराओं और नियम पुस्तिका की मर्यादा बनाए रखने के लिए था।
पहले भी गरमाया है बजट सत्र
इस बजट सत्र में पहले भी कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव हो चुका है। बेरोजगारी, किसानों की मांगें, सामाजिक योजनाएं और नामकरण से जुड़े प्रस्ताव बार-बार चर्चा के केंद्र में रहे हैं। महापुरुषों और धार्मिक प्रतीकों से जुड़े मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस को भावनात्मक रंग दे देते हैं, जिससे सदन का माहौल संवेदनशील हो जाता है।






