Chandigarh

हरियाणा विधानसभा में बड़ा फैसला: हाउसिंग बोर्ड का HSVP में विलय, सरकारी संकल्प पारित

चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने एक महत्वपूर्ण सरकारी संकल्प पेश किया, जिसे सदन ने पारित कर दिया। इस संकल्प के तहत हरियाणा आवासन बोर्ड को भंग कर उसकी सभी जिम्मेदारियां Haryana Shahari Vikas Pradhikaran (HSVP) को सौंप दी गई हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, शहरी योजनाओं के बेहतर समन्वय और नागरिकों को अधिक प्रभावी आवास सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है।

क्यों लिया गया विलय का निर्णय?

मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि आवासन बोर्ड और HSVP के कार्यों में काफी समानता थी। ऐसे में दोनों संस्थाओं को अलग-अलग संचालित करने के बजाय एकीकृत ढांचा अधिक प्रभावी साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी,संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा,शहरी विकास परियोजनाओं में समन्वय मजबूत होगा, यह संकल्प हरियाणा आवासन बोर्ड अधिनियम, 1971 की धारा 80(1) के प्रावधानों के तहत पारित किया गया। अब बोर्ड से संबंधित सभी कार्य और दायित्व HSVP संभालेगा।

कर्मचारियों के हितों पर सरकार का आश्वासन

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि आवासन बोर्ड में कार्यरत कर्मचारियों के हितों की पूरी सुरक्षा की गई है। किसी भी कर्मचारी को सेवा शर्तों या भविष्य को लेकर असुविधा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि स्टाफ को समायोजित करने की प्रक्रिया सुव्यवस्थित तरीके से पूरी की जाएगी।

विलय पर सदन में हंगामा

हालांकि इस निर्णय पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। रोहतक से कांग्रेस विधायक Bharat Bhushan Batra ने विधेयक की प्रक्रिया और जानकारी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधेयक की पूरी जानकारी पहले साझा नहीं की गई। इस पर विधानसभा अध्यक्ष Harvinder Kalyan ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए थे। कांग्रेस विधायक Raghuvir Kadian और झज्जर से विधायक Geeta Bhukkal ने भी हाउसिंग बोर्ड को यथावत रखने की मांग की।

भूपेंद्र हुड्डा ने पूछा—क्या था फेलियर?

नेता प्रतिपक्ष Bhupinder Singh Hooda ने सरकार से पूछा कि ऐसा कौन-सा कारण या विफलता रही, जिसके चलते बोर्ड को भंग करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण देने की मांग की। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विफलता का नहीं बल्कि प्रशासनिक सुधार का कदम है। उन्होंने दोहराया कि ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ जैसी योजनाओं और HSVP के कार्यों में समानता के कारण यह विलय तार्किक है।

क्या है HSVP?

Haryana Shahari Vikas Pradhikaran राज्य में शहरी बुनियादी ढांचे, सेक्टर विकास और प्लॉट आवंटन जैसे कार्यों के लिए जिम्मेदार संस्था है। पहले यह हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) के नाम से जाना जाता था। वहीं, हरियाणा आवासन बोर्ड मुख्य रूप से किफायती आवास योजनाओं के विकास और आवंटन का कार्य देखता था।

क्या बदलेगा इस फैसले से?

  • शहरी विकास और आवासन योजनाओं में एकीकृत कार्यप्रणाली
  • परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन में तेजी
  • प्रशासनिक खर्च में संभावित कमी
  • भविष्य की आवास योजनाओं में बेहतर समन्वय

हालांकि विपक्ष का मानना है कि इस निर्णय के दीर्घकालिक प्रभावों पर व्यापक चर्चा आवश्यक है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

यह भी पढ़ें:- हरियाणा विधानसभा बजट सत्र 2026 की शुरुआत: राज्यपाल के अभिभाषण से गूंजा सदन

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  • Rashtr Khabar

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