हरियाणा विधानसभा में फिर गूंजा HCS अधिकारी का नाम, बजट सत्र के पांचवें दिन हंगामे के बीच तीखी नोकझोंक

चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र का पांचवां दिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच खासा गरम रहा। गुरुवार को सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नकाल के साथ प्रारंभ हुई, जहां सत्ता और विपक्ष के कुल 20 विधायकों ने विभिन्न जनहित से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए। आयुष्मान योजना के कार्ड वितरण से लेकर जलभराव जैसी स्थानीय समस्याओं पर सरकार से जवाब मांगा गया। प्रश्नकाल के बाद शून्यकाल में विधायकों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से रखा। लेकिन दिन की कार्यवाही का केंद्र बिंदु एक बार फिर एक HCS अधिकारी का नाम बन गया, जिस पर सदन में तीखी बहस देखने को मिली।
HCS अधिकारी को लेकर फिर छिड़ा विवाद
सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक बीबी बत्रा ने HCS अधिकारी गायत्री हुड्डा को लेकर मंत्री द्वारा दिए गए बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक दिन पहले सदन में जो बातें कही गईं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं थीं। इस पर मंत्री कृष्ण बेदी ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी का नाम लेने की मंशा नहीं रखी थी, लेकिन उन्हें संदर्भ स्पष्ट करने के लिए एक समाचार पत्र की कटिंग का उल्लेख करना पड़ा। मामला तब और गरमा गया जब विपक्ष ने इस विषय पर विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (प्रिविलेज मोशन) लाने की बात कही।
नेता प्रतिपक्ष का सीधा जवाब
बुधवार को मंत्री कृष्ण बेदी ने नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कुछ HCS अधिकारियों की नियुक्तियों का जिक्र किया था। उन्होंने दावा किया था कि संबंधित अधिकारी पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी हैं। इस पर भूपेंद्र हुड्डा ने सदन में चुनौती देते हुए कहा कि उनके परिवार में ऐसा कोई नाम नहीं है, जैसा बताया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है और यदि आरोप सही हैं तो उन्हें प्रमाणित किया जाए।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ एक HCS अधिकारी की पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर दिए गए बयान में है। जानकारी के अनुसार, संबंधित अधिकारी हिसार जिले के एक गांव से संबंध रखती हैं। उनके पिता शिक्षा और खेल संस्थान से जुड़े पद पर कार्यरत रहे हैं, जबकि उनके पति वर्तमान में एक राजनीतिक दल से जुड़े प्रवक्ता हैं। सदन में उठे इस मुद्दे ने राजनीतिक नियुक्तियों और पारिवारिक संबंधों को लेकर पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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