India–US Trade Deal Impact: डॉलर के मुकाबले रुपये की 3 साल की सबसे बड़ी छलांग, निवेशकों में लौटा भरोसा

India–US Trade Deal Impact: भारत और अमेरिका के बीच हुई Trade Deal का सीधा असर अब भारतीय रुपये पर साफ दिखाई देने लगा है। डॉलर के मुकाबले रुपये ने बीते सप्ताह करीब 1.4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। यह जनवरी 2023 के बाद किसी एक सप्ताह में रुपये का सबसे अच्छा प्रदर्शन माना जा रहा है। हालांकि, शुक्रवार को कारोबार के आखिरी दिन मुनाफावसूली के चलते रुपये में थोड़ी कमजोरी जरूर आई, लेकिन पूरे हफ्ते की स्थिति मजबूत बनी रही।
लंबे समय की कमजोरी के बाद रुपये की जोरदार वापसी
पिछले कई महीनों से रुपया धीरे-धीरे कमजोर हो रहा था। रोज़ थोड़ी-थोड़ी गिरावट हो रही थी, जिससे लोगों में चिंता बढ़ने लगी थी कि कहीं रुपया और न गिर जाए। लेकिन इस हफ्ते रुपया अचानक मजबूत हुआ और उसने साबित कर दिया कि “100 सुनार की, एक लौहार की” यानी एक बड़ा झटका कई छोटी गिरावटों पर भारी पड़ गया। सिर्फ एक सप्ताह में रुपये ने डॉलर को ऐसा झटका दिया, जो पिछले तीन साल में नहीं देखा गया।
ट्रेड डील से रुपये को क्यों मिला सहारा?
बाज़ार जानकारों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील से देश की अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा बढ़ा है। इस समझौते से भारतीय कंपनियों को निर्यात के नए मौके मिल सकते हैं।विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।देश में डॉलर आने की उम्मीद बढ़ी है।डील की घोषणा के बाद से ही विदेशी मुद्रा बाज़ार में रुपये की मांग बढ़ती दिखी। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका फायदा आने वाले महीनों में भी देखने को मिल सकता है। यह भी पढ़ें : – Pariksha Pe Charcha 2026: PM मोदी बोले– ‘मार्क्स बीमारी बन गए हैं’, एग्जाम स्ट्रेस पर छात्रों-पैरेंट्स को दिया मंत्र
शुक्रवार को रुपया क्यों फिसला?
शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.3 प्रतिशत गिरकर 90.6550 के स्तर पर बंद हुआ। इसकी वजह यह रही कि कई निवेशकों ने मुनाफा निकाल लिया। ट्रेडर्स ने पुराने सौदे बंद किए,कुछ तकनीकी कारणों से दबाव बढ़ा, हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह गिरावट थोड़े समय के लिए है और घबराने वाली बात नहीं है।
पूरे हफ्ते की हालत कैसी रही?
अगर पूरे सप्ताह की बात करें, तो रुपये की हालत अच्छी बनी रही।
हफ्ते के अहम आंकड़े
- कुल बढ़त: 1.4 प्रतिशत
- जनवरी 2023 के बाद सबसे अच्छा प्रदर्शन
- डॉलर इंडेक्स गिरकर 97.8 के आसपास
इससे साफ है कि दुनिया भर में डॉलर थोड़ा कमजोर हुआ है, जिसका फायदा रुपये जैसी मुद्राओं को मिला है।
RBI की नीति से भी मिला भरोसा
रुपये को मजबूत बनाए रखने में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की नीति ने भी मदद की है। RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया,अपनी नीति को संतुलित रखा । इसका मतलब यह है कि लोन की EMI में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। ब्याज दरें अचानक नहीं बढ़ेंगी। आम लोगों के लिए यह एक राहत की खबर है।
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विदेशी निवेशकों की भूमिका क्यों अहम है?
आने वाले दिनों में रुपये की चाल काफी हद तक विदेशी निवेशकों पर निर्भर करेगी। जनवरी में विदेशी निवेशकों ने करीब 4 अरब डॉलर निकाले,फरवरी में अब तक करीब 1 अरब डॉलर का निवेश आया, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर विदेशी निवेश लगातार आता रहा, तो रुपये की मजबूती बनी रह सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
बाज़ार जानकारों के मुताबिक, आने वाले दिनों में रुपये में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन
- भारत-अमेरिका ट्रेड डील
- RBI की स्थिर नीति
- डॉलर की कमजोरी
ये सभी बातें रुपये के पक्ष में जाती दिख रही हैं।
डिस्क्लेमर
यह खबर बाज़ार के मौजूदा हालात और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह ज़रूर लें।






