गुरु की शरण ही सच्ची संपत्ति, ‘नाम’ ही जीवन की असली पूंजी: CM नायब सैनी

लुधियाना : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जीवन की वास्तविक समृद्धि भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि गुरु की शरण और ‘नाम सिमरन’ में निहित है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मानसिक शांति केवल आध्यात्मिक मार्ग अपनाने से ही प्राप्त हो सकती है।
मुख्यमंत्री पंजाब के लुधियाना में स्थित गुरुद्वारा श्री नानकसर साहिब में आयोजित धार्मिक समागम के समापन अवसर पर संगत को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं और संत-महापुरुषों की उपस्थिति में उन्होंने समाज में प्रेम, सेवा और भाईचारे को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
गुरु परंपरा और आध्यात्मिक विरासत पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बाबा नंद सिंह जी महाराज, बाबा ईशर सिंह जी महाराज और बाबा नारायण सिंह जी के जीवन और तपस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान संतों ने मानवता को सच्चे मार्ग की ओर अग्रसर किया। उन्होंने बताया कि यह पावन स्थल संतों की कठोर साधना और समर्पण का परिणाम है, जहां प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति का अनुभव होता है। साथ ही, उन्होंने सभी से समाज में नफरत को खत्म कर प्रेम और सेवा के मार्ग पर चलने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं को दुर्गाष्टमी और रामनवमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये पर्व हमें धर्म, त्याग और मर्यादा का संदेश देते हैं।
सरकार की पहल: संत-महापुरुषों के विचारों का प्रसार
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार ‘संत-महापुरुष सम्मान विचार प्रचार एवं प्रसार योजना’ के माध्यम से गुरुओं और संतों के संदेशों को समाज तक पहुंचा रही है। इस योजना के अंतर्गत गुरु नानक देव जी, गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोबिन्द सिंह जी सहित अनेक महापुरुषों की जयंती राज्य स्तर पर मनाई जाती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर पूरे प्रदेश में व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।
शिक्षा और स्मृति में किए जा रहे विशेष कार्य
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हरियाणा में गुरुओं की स्मृति को सहेजने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। सिरसा स्थित चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में गुरु तेग बहादुर जी पर शोध के लिए विशेष चेयर स्थापित की गई है। अंबाला के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम उनके नाम पर रखा गया है। यमुनानगर में बनने वाले मेडिकल कॉलेज को भी ‘हिन्द की चादर’ के नाम से समर्पित किया गया है।






