Chaupal Uncut : हरियाणा की चौपाल में क्या चल रहा है? लाडो लक्ष्मी योजना से लेकर सियासी बयानों तक बड़ी चर्चा

Chaupal Uncut : हरियाणा की चौपाल इन दिनों सिर्फ गांव की बैठक नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों, सियासत के तीखे बयानों और प्रशासनिक फैसलों का केंद्र बन चुकी है। महिला सशक्तिकरण से लेकर किसान, रोडवेज, पुलिस प्रशासन और कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति तक—हर मुद्दे पर चौपाल गर्म है।
इब पढ़ेगी और बढ़ेगी भी म्हारी लाडो
चाबी वाले दल के बड़े साहब के बयान ने सर्दी में बढ़ाई राजनीतिक गर्मी !
Chaupal Uncut : पिछले कईं दिनों से हरियाणा में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। मौसम विभाग भी इस बार हरियाणा में सर्दी का रिकॉर्ड टूटने की बात कह चुका है। ऐसे में जहां लोग दिन के समय भी घरों में दुबके हुए हैं। वहीं, सर्दी के इस मौसम में अचानक एक बयान के कारण राजनीतिक गर्माहट बढ़ गई है। सर्दी का अलाव छोड़कर राजनेता अचानक से सर्द मौसम में बाहर आकर जमकर बयान देने लगे हैं। इन सबके पीछे कोई आम बयान नहीं, बल्कि किसी समय फुल वाले दल के साथ सत्ता की भागीदारी करने वाले चाबी वाले दल के बड़े साहब की ओर से दिया गया एक बयान है। राजनीतिक गलियारों के साथ ही प्रदेश की चौपालों में भी नेताजी के इस बयान को लेकर खूब चर्चा हो रही है। हर कोई अपने-अपने तरीके से उनके इस बयान के मतलब निकाल रहा है। चलिए अब आपको बताते हैं कि चाबी वाले दल के बड़े साहब यानि जेजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय चौटाला ने आखिर ऐसा क्या कह दिया कि पूरे प्रदेश का राजनीतिक माहौल ही गर्मा गया। दअरसल, डॉक्टर साहब (अजय चौटाला) ने महेंद्रगढ़ में आयोजित युवा योद्धा सम्मेलन में कहा कि शासकों को गद्दी से खींचकर सड़कों पर पीटने की जरूरत है। देश में नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे आंदोलन की आवश्यकता है। इन्हें (शासकों को) देश छोड़ने पर मजबूर करने का काम करना पड़ेगा। अब युवाओं के लिए खुद को संगठित करने का समय आ गया है। हमारे पड़ोसी देशों में हुए विरोध प्रदर्शनों की तरह, श्रीलंका में जिस तरह बांग्लादेश के युवाओं ने सरकार को देश छोड़ने पर मजबूर किया, जिस तरह नेपाल के युवाओं ने सरकार को देश छोड़ने पर मजबूर किया, उसी तरह की रणनीति भारत में भी मौजूदा सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए अपनानी होगी। अब आप ही बताएं कि डॉक्टर साहब की ओर से दिया गया यह बयान कितना सही है। ऐसे में इस बयान के बाद अजय चौटाला के खिलाफ मोर्चा खुल चुका है। एक ओर जहां आम जनता चौपाल पर उनके बयान को लेकर अपने-अपने तर्क दे रही है। वहीं, राजनेताओं की ओर से खासतौर पर भाजपा के नेताओं की ओर से उनके खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया गया है, क्योंकि हरियाणा और केंद्र दोनों की जगहों पर भाजपा की सरकार है। खैर देखना होगा कि इस मुद्दे को लेकर चौपालों पर चल रही चर्चाएं और राजनीतिक बयानबाजी कहां तक पहुंचती है ?
इब किसान की फसल के एक-एक दाने की होगी निगरानी !
Chaupal Uncut : हरियाणा के किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही उन्हें आने वाली दिक्कतों को लगातार दूर करने की कोशिश में जुटी प्रदेश सरकार के बड़े साहब यानि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आजकल काफी सख्त हो गए हैं। किसान की फसल खरीद व्यवस्था में मिली अनियमितताओं को लेकर बड़े साहब ने सख्त रुख अपना लिया है। इसके पीछे कारण भी है, क्योंकि बड़े साहब हो या फिर उनकी पार्टी के दूसरे बड़े नेता। किसानों की फसलों को लेकर अपनी सरकार के फैसले गिनाते नहीं थकते। हाल ही में भाजपा में राजनीति के चाणक्य की उपाधि हासिल करने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस मुद्दे पर नायब सैनी की तारीफ कर चुके हैं। हरियाणा सरकार की ओर से किसानों की सभी 24 फसलों को एमएसपी पर खरीदने का दावा किया जाता है। ऐसे में यदि कहीं पर फसल खरीद में कोई अनियमितता मिले तो फिर प्रदेश सरकार के बड़े साहब का पारा चढ़ना तो लाजमी है। हालांकि आमतौर पर वह अपने हंसमुख चेहरे और मिलनसार रवैये को लेकर चर्चा में रहते हैं, लेकिन जब बात प्रदेश की जनता और किसान से जुड़ी हो तो उनका गंभीर होना लाजमी है। ऐसे में इस बार फसल खरीद का सीजन शुरू होने से पहले ही नायब सैनी ने साफ निर्देश दे दिए कि खरीद सीजन में कोई भी समस्या दोबारा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि फसल खरीद में संलिप्त पाए किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई तुरंत अमल में लाई जाए। इससे फील्ड स्तर पर यह स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि गलत कार्य करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि यदि किसी शेलर या आढ़ती द्वारा मिलीभगत कर भारी अनियमितताएं पाई जाती हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ भारी पेनल्टी भी लगाई जाए। उन्होंने कहा कि शेलरों की जांच के लिए संबंधित विभाग की समिति ही जाए, कोई भी अधिकारी या कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से जांच पर न जाए। यदि ऐसा पाया गया तो उसके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के माध्यम से किसान के खेत से मंडी तक और मंडी से शेलर तक पूरी फसल की पूर्ण रूप से तकनीकी निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता की संभावना न रहे। मुख्यमंत्री के इन निर्देशों से साफ है कि इस बार बड़े साहब किसी भी सूरत में किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त करने के मुड में नहीं हैं। यहीं कारण है अपने इन प्रकार के फैसलों के चलते ही हरियाणा के बड़े साहब को लेकर अकसर प्रदेश की राजनीतिक के साथ आम चौपालों पर भी चर्चा चलती ही रहती है।
अब आकाश के जहाज की तरह दिखेगी धरती के ‘जहाज’ की लोकेशन !
Chaupal Uncut : हरियाणा ही नहीं, बल्कि देश भर में धरती के जहाज का खिताब हासिल कर चुकी हरियाणा रोडवेज की बसों की लोकेशन अब आकाश में उड़ने वाले जहाज की तरह से दिखाई देगी। परिवहन विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद से ही हरियाणा की राजनीति के ‘गब्बर’ कहलाए जाने वाले अनिल विज लगातार इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं, जोकि जल्द ही सिरे चढ़ता नजर आ रहा है। उनकी कोशिशों से ही हरियाणा रोडवेज की बसों में अब सफर सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यात्रियों को यात्रा से पहले और दौरान पूरी डिजिटल जानकारी भी मिलेगी। अनिल विज की कोशिशों से रोडवेज को आधुनिक बनाने की दिशा में ऑटोमैटिक टिकटिंग सिस्टम के साथ-साथ बस ट्रैकिंग सिस्टम और मोबाइल ऐप विकसित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों को सटीक जानकारी, पारदर्शिता और सुविधा देना है। इसी के चलते रोडवेज बसों में पहले से लगे ऑटोमैटिक टिकटिंग सिस्टम को अब और अधिक एडवांस किया जा रहा है। आने वाले समय में यात्री पेटीएम, कार्ड और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी टिकट ले सकेंगे। इससे न सिर्फ नकद लेन-देन की झंझट कम होगी, बल्कि टिकटों का पूरा रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा। इसके साथ ही हर टिकट का विधिवत पंच होगा और उसका डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी तरह की अनियमितता पर रोक लगेगी। अभी तक यात्रियों को यह दिक्कत होती है कि उन्हें यह पता नहीं चल पाता कि उनकी बस कहां पर है और कब तक आएगी ? इस समस्या को दूर करने के लिए भी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए बसों में ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। इस सिस्टम के जरिए बसों की लोकेशन ठीक उसी तरह पता चल पाएगी, जैसे एयरपोर्ट पर विमान की स्थिति दिखाई देती है, क्योंकि मैनुअल तरीके से बसों की मॉनिटरिंग करना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए यह भी देखा जा सकेगा कि कोई बस अपने निर्धारित रूट पर चल रही है या नहीं और तय स्टॉपेज पर रुक रही है या नहीं। इसके साथ ही अनिल विज अब जल्द ही रोडवेज बस अड्डों की तस्वीर भी बदलने जा रहे हैं। सभी प्रमुख बस अड्डों पर डिजिटल स्क्रीन लगाई जाएंगी। इन स्क्रीन पर यह जानकारी दिखाई देगी कि कौन-सी बस किस रूट पर है और कितने समय में बस अड्डे पर पहुंचेगी। इससे यात्रियों को बस स्टैंड पर अनिश्चित इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वे समय का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। बसों की जानकारी के लिए एक मोबाइल ऐप भी विकसित की जा रही है। हालांकि, तकनीकी कमियों के चलते इसे दोबारा बेहतर तरीके से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस ऐप के जरिए यात्री खुद यह देख सकेंगे कि उनकी बस कितनी दूर है। साथ ही सरकार भी इस ऐप के माध्यम से बसों की निगरानी कर सकेगी कि वे सही रूट पर चल रही हैं या नहीं, और संचालन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
20 साल बाद बड़े साहब ने कर दिया इंसाफ !
Chaupal Uncut : हरियाणा के हर वर्ग के उत्थान के लिए अनेक प्रकार की योजनाएं चलाने वाली प्रदेश सरकार के बड़े साहब यानि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकारी विभागों के कर्मचारियों के हितों को लेकर भी हमेशा गंभीर रहते हैं। यहीं कारण है कि वह अकसर सरकारी महकमों के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी कईं प्रकार की योजनाएं बनाते रहते हैं। हाल ही में नए साल के मौके पर उन्होंने अपनी पहली कैबिनेट की बैठक में एक ऐसा फैसला लिया, जिसकी चर्चा आजकल चौपाल के साथ ही हरियाणा के हर बस अड्डे पर हो रही है। दअरसल, कैबिनेट ने नए साल पर राज्य परिवहन विभाग के सैकड़ों कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए एक अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में वर्ष 2002 में कांट्रेक्ट पर नियुक्त 347 ड्राइवरों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) और अन्य सेवा लाभ देने की मंजूरी दी गई। इस फैसले से लंबे समय से चली आ रही वह विसंगति खत्म होगी, जिसमें सीनियर ड्राइवरों को जूनियर कर्मचारियों से कम वेतन और पेंशन मिल रही थी। ये ड्राइवर वर्ष 2002 में कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त हुए थे और 2006 में रेगुलर कर दिए गए थे। जनवरी 2014 में सरकार और कर्मचारी यूनियनों के बीच हुए समझौते में पहली जनवरी, 2003 या उसके बाद नियुक्त कर्मचारियों को ही लाभ मिला, जिससे 2002 में भर्ती हुए ड्राइवर इससे बाहर रह गए। नतीजा यह हुआ कि बाद में भर्ती हुए जूनियर ड्राइवरों को अधिक वेतन और पेंशन लाभ मिलने लगे, जबकि सीनियर कर्मचारी नुकसान में रहे। कैबिनेट के इस फैसले के बाद 2002 में नियुक्त ड्राइवरों को उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से रेगुलर माना जाएगा। सेवा अवधि की गणना शुरूआती नियुक्ति से होगी। एसीपी (वेतन वृद्धि) का लाभ मिलेगा। पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू होगी। पारिवारिक पेंशन योजना, 1964 का लाभ मिलेगा। जनरल प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) खाते खोले जाएंगे। यह फैसला कर्मचारियों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि इससे ना केवल 20 साल पुराना अन्याय खत्म होगा बल्कि समान पद पर काम कर रहे कर्मचारियों के बीच बराबरी और न्याय भी सुनिश्चित होगा। इससे सैकड़ों परिवारों की पेंशन सुरक्षा मजबूत होगी।
हरियाणा में फ्रीज हुई प्रशासनिक सीमाएं
Chaupal Uncut : हरियाणा में हांसी को जिला बनाए जाने की घोषणा के बाद दूसरे शहरों को भी उम्मीद जगी थी। अपने-अपने इलाके को जिला, तहसील, उपमंडल या ब्लॉक बनने की इंतजार कर रहे लोगों को इसके लिए अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता हैं, क्योंकि सरकार की ओर से हरियाणा की सभी प्रशासनिक सीमाओं को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है। मतलब साफ है कि जब तक सीमाएं फ्रीज रहेंगी तब तक प्रदेश में कोई भी नया जिला, तहसील, मंडल या ब्लॉक आदि नहीं बनाए जा सकते। इसके पीछे कारण है 2027 की जनगणना। अब चौपाल पर यह चर्चा शुरू हुई कि जनगणना 2027 में होनी है तो अभी से ही सीमाएं क्यों फ्रीज कर दी। जी हां, चौपाल की चर्चा भी सही है, लेकिन हरियाणा में 2027 की इस जनगणना का पहला चरण एक मई से शुरू होगा, जिसमें मकानों का सूचीकरण एवं आवास जनगणना की जाएगी। इसी के चलते अभी से ही हरियाणा में जनगणना की व्यापक तैयारियां शुरू हो गई हैं। जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी। जनगणना अवधि के दौरान जनगणना से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों का स्थानांतरण भी नहीं किया जाएगा। सरकार की ओर से जमीनी स्तर पर प्रभावी निगरानी हेतु जनगणना को मासिक जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों के स्थायी एजेंडा में शामिल किया जाएगा।
इब तै समझ लो ‘संगठन का पावर’
Chaupal Uncut : हरियाणा में पंजे वाले दल के नेताओं की आपसी गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है। किसी ना किसी मौके पर इस दल के नेताओं की गुटबाजी जनता के सामने आ ही जाती है। फिर चाहे दल के नेता कितनी ही एकजुटता ही बात और दावे कर लें, लेकिन असलियत हर किसी को पता है। यहीं कारण है कि हरियाणा में दूसरे दल के नेता खुलेआम पंजे वाले दल के एक नेता पर फुल वाले दल के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते रहते हैं। हाल ही में पंजे वाले दल यानि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी सोशल मीडिया पर फुल वाले दल के नेताओं की एक फोटो शेयर करते हुए अपने दल के नेताओं को नसीहत देने का काम किया था। सिंह की ओर से शेयर की गई फोटो में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिखाई दे रहे थे। दिग्विजय सिंह ने इस तस्वीर के साथ लिखा था, ‘आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक और जनसंघ-बीजेपी का कार्यकर्ता नेताओं के चरण में बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री और देश का प्रधानमंत्री बना है, ये संगठन की शक्ति है।’ हालांकि अपनी इस पोस्ट को लेकर दिग्विजय सिंह ने स्पष्टीकरण भी दिया और कहा कि उन्होंने ‘संगठन’ की तारीफ की है। दिग्विजय सिंह कांग्रेस में भी कुछ इसी तरह का संगठन चाहते हैं, जिसके बलबूते पर पार्टी के आम कार्यकर्ता को सम्मान, मजबूती और ताकत मिल सके। हरियाणा में कांग्रेस के संगठन को लेकर दिग्विजय सिंह की यह चिंता पूरी तरह से उचित है। राज्य में करीब 11 साल के लंबे अंतराल के बाद पिछले साल सितंबर में कांग्रेस का संगठन बनकर तैयार हुआ। प्रदेश अध्यक्ष के पद पर पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह की नियुक्ति की गई और संगठनात्मक दृष्टि से 32 जिलों में कांग्रेस के जिला प्रधान नियुक्त किए गए। इस संगठन को बने करीब साढ़े तीन माह होने वाले हैं, मगर अभी तक न तो प्रदेश पदाधिकारियों व कार्यकारिणी सदस्यों की घोषणा हो सकी और न ही जिलाध्यक्ष अपनी जिला कमेटियों का गठन कर पाए हैं। कांग्रेस का संगठन नहीं बन पाने की वजह से ही साल 2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कांग्रेस हालांकि अपनी हार की वजह वोटों की चोरी बता रही है, लेकिन कांग्रेस का शीर्ष व राज्य स्तरीय नेतृत्व भी जानता है कि यह सच्चाई नहीं है। सच्चाई कांग्रेस नेताओं की आपसी गुटबाजी और संगठन का अभाव रहा है, जिस वजह से भाजपा को ताकत और कांग्रेस को कमजोरी मिली है। राज्य में कांग्रेस का संगठन नहीं बन पाने की प्रमुख वजह यह है कि पदाधिकारियों के नामों पर नेताओं की आपसी सहमति नहीं बन पा रही है। जिला कमेटियों में हर गुट अपना वर्चस्व कायम रखना चाहता है, जबकि प्रदेश कमेटी में भी यही स्थिति है। राज्य में 27 जुलाई 2007 से 10 फरवरी 2014 तक चौधरी फूलचंद मुलाना हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष थे। उनके कार्यकाल में प्रदेश कमेटी बनी, लेकिन डॉ. अशोक तंवर के 14 फरवरी 2014 से चार सितंबर 2019 तक के कार्यकाल में संगठन बिल्कुल भी नहीं बन पाया। इसी तरह, कुमारी सैलजा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में चार सितंबर 2019 से 27 अप्रैल 2022 तक के तीन साल के कार्यकाल में भी न तो जिलाध्यक्ष बन पाए और न ही प्रदेश कमेटी का गठन हो पाया। चौधरी उदयभान 27 अप्रैल 2022 से 29 सितंबर 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे, लेकिन वे भी संगठन नहीं बना पाए। अब राव नरेंद्र सिंह प्रदेश अध्यक्ष हैं, लेकिन कांग्रेस नेताओं की आपसी गुटबाजी व संगठन पर एकाधिकार रखने की मंशा के चलते वे भी प्रदेश कमेटी का गठन नहीं कर पा रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी को लेकर भी सोशल मीडिया पर कहा था कि राहुल गांधी सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ कांग्रेस संगठन पर भी ध्यान दें। कांग्रेस को भी चुनाव आयोग की तरह सुधारों और व्यावहारिक विकेंद्रीकरण की जरूरत है। मुझे उम्मीद है कि राहुल गांधी इस दिशा में क़दम उठाएंगे। कांग्रेस राज्य में 10 साल तक सत्ता में रही, लेकिन वह अपने जिला कार्यालय तक नहीं बना पाई। चंडीगढ़ में बना कांग्रेस का राज्य स्तरीय कार्यालय भी सामान्य हालत में है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पिछले कुछ समय से वोट चोरी को मुद्दा बनाने वाली कांग्रेस क्या अब अपने संगठन की ओर ध्यान दे पाएगी। खैर चौपाल में इस प्रकार की चर्चाएं तो चलती ही रहती हैं, लेकिन असली काम तो पार्टी नेताओं को करना है और देखना होगा कि क्या अतीत की गलतियों से इस दल के नेता कोई सबक ले पाएंगे?
पद संभालते ही एक्शन मोड में आए पुलिस के बड़े साहब
Chaupal Uncut : हरियाणा के नए पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल अपनी नई जिम्मेदारी संभालते ही तुरंत एक्शन मोड में आ गए। पद ग्रहण करते ही उन्होंने पुलिस व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी दिखाई। उन्होंने प्रदेशभर के करीब 700 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ पहली बड़ी समीक्षा बैठक की। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई, जिसमें एडीजीपी, पुलिस आयुक्त, रेंज आईजी और जिलों के एसपी शामिल हुए। अपने संबोधन में डीजीपी ने पुलिस बल का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि हरियाणा पुलिस एक परिवार की तरह है और हर अधिकारी-कर्मचारी इसकी मजबूती का आधार है। उन्होंने पुलिसिंग को और ज्यादा पेशेवर बनाने और तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने जिलों की समस्याओं को समझकर उसी हिसाब से समाधान करें। कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए डीजीपी ने सभी जिलों से दो दिन के भीतर विस्तृत कार्ययोजना मांगी है। इसमें अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक व्यवस्था और साइबर अपराध से निपटने जैसे अहम मुद्दों पर ठोस कदम शामिल करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के विजन का जिक्र करते हुए डीजीपी ने कहा कि राज्य सरकार पुलिस को हर जरूरी संसाधन और समर्थन देने के लिए तैयार है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईमानदारी से काम करने वाले हर पुलिसकर्मी के साथ विभाग मजबूती से खड़ा रहेगा। यह बैठक हरियाणा पुलिस के लिए नई सोच और नई दिशा की शुरुआत मानी जा रही है। इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि पूरे पुलिस बल में टीमवर्क और नई ऊर्जा का संचार भी होगा।
जर्मन और अमेरिका के उदाहरण से पुराने जमाने में लौटने की बात
Chaupal Uncut : आपसी गुटबाजी के चलते हरियाणा में लगातार तीसरी बार सत्ता से बाहर हुई कांग्रेस के नेता अपनी गलतियों से सिखने की बजाए चुनाव आयोग और सरकार से रोजाना कोई ना कोई नई मांग कर रहे हैं। बिहार चुनाव में सरकार और वोट चोरी का मुद्दा उठाने के बाद अब हरियाणा सरकार के पूर्व में बड़े साहब रहे यानि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने की वकालत की है। इसके लिए उन्होंने जर्मनी और अमेरिका का उदाहरण दिया, जहां पर बैलेट पेपर से चुनाव होते हैं। उन्होंने एक बार फिर निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आयोग ने आज तक पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया। ऐसे में हुड्डा साहब को भी यह समझना होगा कि यह पब्लिक है, जो सब जानती है, क्योंकि आजकल प्रदेश की राजनीतिक चौपालों में हाल ही में संपन्न हुए हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र का मुद्दा काफी चर्चा में है। ऐसा होना लाजमी भी है, क्योंकि शीतकालीन सत्र में कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था और बाद में खुद ही सदन से वॉक आउट कर दिया। अब चौपाल में चर्चा यह है कि जब सदन से वॉकआउट ही करना था तो फिर अविश्वास प्रस्ताव लाने का मतलब ही क्या था? खैर इन सब सवालों के जवाब तो पार्टी के वरिष्ठ नेता ही दे सकते हैं, क्योंकि यह सब राजनीतिक पैतरे बाजी है, हमारा काम तो केवल आपकों प्रदेश की चौपाल पर होने वाली चर्चाओं से अवगत करवाना है, जिससे आपकों भी प्रदेश की राजनीतिक और जनता के बीच होने वाली चर्चाओं की जानकारी मिल सके।






