अरनब तूफान ने किसानों पर बरपाया कहर! बलिया में सैकड़ों एकड़ धान की फसल जमीन पर बिछी, किसानों की मेहनत बर्बाद

संजय कुमार तिवारी / बलिया: अरनब तूफान का असर अब किसानों की फसलों पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के बलिया में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश और तेज हवाओं ने धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम की मार से सैकड़ों एकड़ में खड़ी धान की फसल खेतों में गिर गई है। कई किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा पैदा हो गया है।
तेज हवा और बारिश के कारण धान की बालियों का वजन बढ़ गया, जिससे पकने के करीब पहुंच चुकी फसल जमीन पर बिछ गई। खेतों में बारिश का पानी भरने से किसानों को अब फसल के सड़ने और पूरी उपज खराब होने की आशंका सता रही है।
80 फीसदी पक चुकी थी धान की फसल, बारिश ने बिगाड़ा खेल
स्थानीय किसान राघवेंद्र सिंह ने बताया कि उनके क्षेत्र में नाटी किस्म के धान की खेती की गई है। फसल लगभग 80 प्रतिशत तक पक चुकी थी और किसान कटाई की तैयारी में जुटे थे। इसी दौरान शाम से तेज हवाएं चलने लगीं और बारिश शुरू हो गई।

उन्होंने बताया कि लगातार बारिश के कारण धान की बालियां भारी हो गईं। तेज हवा का दबाव सहन नहीं कर पाने के कारण पूरी फसल खेतों में गिर गई। अब खेतों में पानी जमा है और धान की बालियां भी पानी के संपर्क में आ गई हैं।
किसानों को डर है कि यदि खेतों से पानी नहीं निकला तो गिरी हुई फसल सड़ सकती है। इससे तैयार होने वाली उपज की गुणवत्ता और मात्रा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
पिछले साल भी तूफान ने बर्बाद की थी फसल
किसान राघवेंद्र सिंह का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब मौसम की मार से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा हो। पिछले साल भी इसी समय मोंथा तूफान के कारण धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा था।
उन्होंने बताया कि गेहूं की फसल के दौरान भी तूफान और खराब मौसम के कारण किसानों को नुकसान झेलना पड़ा था। लगातार बदलते मौसम के चलते किसानों के सामने खेती की लागत निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है।
किसान बोले- नुकसान के बाद भी नहीं मिला मुआवजा
फसल बर्बाद होने से परेशान किसानों ने मुआवजे की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। राघवेंद्र सिंह के मुताबिक, पिछले साल धान की फसल खराब होने के बाद भी उन्हें मुआवजा नहीं मिला था।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब किसान नुकसान का आकलन करवाने के लिए लेखपाल से संपर्क करते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। वहीं, बैंक की ओर से भी ऐसी किसी सुविधा की जानकारी नहीं दी जाती।
किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण फसल बर्बाद होने पर उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है, लेकिन नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिल पाती।
किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट
धान की फसल गिरने से किसानों के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ खेतों में पानी जमा होने से फसल सड़ने का खतरा है, वहीं दूसरी तरफ कटाई और उपज को सुरक्षित रखने की चिंता भी बढ़ गई है।
यदि जल्द मौसम साफ नहीं हुआ और खेतों से पानी नहीं निकला तो नुकसान और बढ़ सकता है। किसानों को आशंका है कि इस बार भी उनकी महीनों की मेहनत बेकार जा सकती है।
प्रशासन से सर्वे और मुआवजे की मांग
मौसम की मार झेल रहे किसानों को अब प्रशासन से राहत की उम्मीद है। किसानों की मांग है कि प्रभावित गांवों में राजस्व विभाग की टीम भेजकर फसलों के नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए और पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाए।







