कैथल में सुरजेवाला का BJP पर बड़ा हमला! बोले- गन्ने के ₹15 बढ़ाकर किसानों से किया मजाक, बंद हो जाएंगी शुगर मिलें

कैथल: हरियाणा में गन्ने के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि गन्ने के दाम में की गई मामूली वृद्धि किसानों की लागत और बढ़ती महंगाई के मुकाबले नाकाफी है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने अपनी कृषि नीतियों में बदलाव नहीं किया तो किसान गन्ने की खेती से दूरी बना सकते हैं, जिसका सीधा असर प्रदेश की चीनी मिलों पर पड़ेगा।
सुरजेवाला ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार को घेरा है।
गन्ने के भाव में 15 रुपये की बढ़ोतरी पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि हरियाणा सरकार ने गन्ने की कीमत 415 रुपये से बढ़ाकर 430 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है। यानी किसानों को पिछले भाव के मुकाबले सिर्फ 15 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त मिलेंगे।
सुरजेवाला ने इस बढ़ोतरी को किसानों की आर्थिक स्थिति और खेती पर बढ़ते खर्च के लिहाज से बेहद कम बताया। उनका आरोप है कि त्योहारों के समय सरकार ने गन्ना उत्पादकों को राहत देने के बजाय उनकी उम्मीदों को झटका दिया है।
महंगाई के मुकाबले गन्ने का बढ़ा भाव नाकाफी: सुरजेवाला
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने महंगाई का हवाला देते हुए सरकार के फैसले पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि महंगाई की दर करीब 9 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि गन्ने के दाम में लगभग 3 प्रतिशत की ही वृद्धि की गई है।

उन्होंने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई वृद्धि का भी जिक्र किया। सुरजेवाला के मुताबिक, गेहूं के MSP में महज 0.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को देखते हुए पर्याप्त नहीं है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियां किसानों की आमदनी बढ़ाने के बजाय उन्हें खेती से पीछे हटने के लिए मजबूर कर रही हैं।
गन्ने की कम आपूर्ति से शुगर मिलों पर बढ़ सकता है संकट
सुरजेवाला ने चीनी मिलों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि इस साल प्रदेश की मिलों को पिछले साल के मुकाबले करीब 40 प्रतिशत कम गन्ना मिला है।
उनका कहना है कि यदि किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य नहीं मिला तो आने वाले समय में गन्ने की खेती का रकबा और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका असर चीनी मिलों के संचालन पर भी पड़ेगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि गन्ने की उपलब्धता लगातार घटने से मिलों के सामने उत्पादन संबंधी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इससे मिलों में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों की आजीविका पर भी संकट आने की आशंका है।
मुख्यमंत्री नायब सैनी की सरकार से पूछा सवाल
कांग्रेस महासचिव ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को निशाने पर लेते हुए कहा कि उत्तर हरियाणा से प्रतिनिधित्व करने के बावजूद सरकार गन्ना उत्पादक किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है।
उन्होंने भाजपा सरकार से सवाल किया कि क्या वह अपनी किसान संबंधी नीतियों में बदलाव करेगी या किसानों को इसी तरह आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
पृष्ठभूमि: हरियाणा में गन्ने के भाव पर क्यों है किसानों की नजर?
हरियाणा देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में शामिल है। प्रदेश के कई जिलों में गन्ने की खेती किसानों की आय का महत्वपूर्ण साधन है। गन्ने की फसल का सीधा संबंध चीनी मिलों के संचालन, ग्रामीण रोजगार और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से है।
ऐसे में गन्ने के भाव में होने वाली हर बढ़ोतरी किसानों के लिए महत्वपूर्ण होती है। खेती में खाद, बीज, सिंचाई, डीजल और मजदूरी की लागत बढ़ने के कारण किसान बेहतर मूल्य की मांग करते रहे हैं।
किसानों और चीनी उद्योग पर क्या हो सकता है असर?
गन्ने की कीमत को लेकर जारी राजनीतिक बहस का असर आने वाले पेराई सत्र में भी दिखाई दे सकता है। यदि किसानों को खेती से अपेक्षित आमदनी नहीं मिलती तो वे दूसरी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं।
इसका प्रभाव गन्ने की उपलब्धता, चीनी मिलों की पेराई क्षमता और ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार पर पड़ सकता है। हालांकि, इन आशंकाओं के बीच सरकार की ओर से गन्ना उत्पादकों के हितों और चीनी उद्योग की स्थिति पर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।







