बेटी के बच्चों के नाम प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने वालों के लिए बड़ी खबर!

चंडीगढ़, 18 अगस्त: परिवार के भीतर अचल संपत्ति के हस्तांतरण को लेकर हरियाणा सरकार ने अहम स्पष्टीकरण जारी किया है। अब बेटी के बच्चों यानी दौहता-दोहती/नाती-नातिन को भी संपत्ति ट्रांसफर पर मिलने वाली 100 प्रतिशत स्टैंप ड्यूटी छूट के दायरे में शामिल माना जाएगा।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस संबंध में 2014 के नोटिफिकेशन के हिंदी संस्करण में मौजूद शब्दावली को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए औपचारिक सुधार किया गया है।
2014 के आदेश में था प्रावधान
हरियाणा सरकार ने 16 जून 2014 को इंडियन स्टैंप एक्ट, 1899 की धारा 9 के तहत परिवार के निर्धारित रक्त संबंधियों के बीच जीवनकाल में किए जाने वाले संपत्ति हस्तांतरण पर पूरी स्टैंप ड्यूटी माफ करने का प्रावधान किया था। इसमें माता-पिता, बच्चे, पोते-पोतियां, भाई-बहन और जीवनसाथी समेत संबंधित रिश्तों को शामिल किया गया था।
बेटी के बच्चों को लेकर क्यों हुआ विवाद?
मामला उस समय सामने आया जब अंग्रेजी नोटिफिकेशन में “Grandchildren” शब्द का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन हिंदी संस्करण में इसके लिए “पौत्र-पौत्री” शब्द लिखा गया।
“पौत्र-पौत्री” का सामान्य अर्थ बेटे के बच्चे लिया जाता है। इसी वजह से कुछ स्थानीय सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में बेटी के बच्चों को इस छूट का लाभ देने को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही।
सरकार ने शब्दावली को किया स्पष्ट
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस स्थिति को स्पष्ट करने के लिए 24 जुलाई 2026 को सुधार जारी किया, जिसे 13 अगस्त 2026 को हरियाणा सरकार के गजट में प्रकाशित किया गया। संशोधित शब्दावली में अब “पौत्र-पौत्री, दौहता-दोहती/नाती-नातिन” को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि पात्र पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण में बेटी के बेटे-बेटियों को भी बेटे के बच्चों के समान स्टैंप ड्यूटी छूट का लाभ मिलेगा।
रजिस्ट्री प्रक्रिया में भ्रम होगा दूर
डॉ. सुमिता मिश्रा के मुताबिक, यह सुधार 2014 के मूल आदेश को स्पष्ट करने के उद्देश्य से किया गया है। इससे राज्य के राजस्व और रजिस्ट्री कार्यालयों में इस प्रावधान की व्याख्या को लेकर स्थिति साफ होगी। सरकार का कहना है कि इससे परिवार के भीतर बेटी के बच्चों के नाम संपत्ति गिफ्ट या ट्रांसफर करने वाले लोगों को अनावश्यक टैक्स विवाद और प्रक्रियात्मक देरी से राहत मिल सकेगी।







