Haryana Skill Gap Study Report: हरियाणा के युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते! AI, ड्रोन और EV जैसी तकनीकों पर फोकस

गुरुग्राम, 1 अक्टूबर 2026। हरियाणा में युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने की रणनीति में अब उद्योगों की जरूरतों और आधुनिक तकनीक को केंद्र में रखने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम यूनिवर्सिटी, सेक्टर-51 में ‘स्किल गैप स्टडी रिपोर्ट’ का लोकार्पण किया। इस रिपोर्ट को स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट (SJHIFM) ने हरियाणा स्किल डेवलपमेंट मिशन (HSDM) के लिए तैयार किया है।
कार्यक्रम में युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता मंत्री गौरव गौतम भी मौजूद रहे। रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य युवाओं के मौजूदा कौशल और उद्योगों को आवश्यक कुशल कर्मचारियों के बीच के अंतर को पहचानना है। इसके आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी पाठ्यक्रमों और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को अधिक व्यावहारिक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उद्योगों की मांग के अनुसार तैयार होंगे युवा
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि तकनीक और औद्योगिक जरूरतों में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे में युवाओं को पारंपरिक प्रशिक्षण तक सीमित रखने के बजाय नई तकनीकों और आधुनिक कार्यक्षेत्रों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।
उन्होंने कौशल विकास की प्रक्रिया में प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया। सरकार का उद्देश्य युवाओं को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ रोजगार, अप्रेंटिसशिप, स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, स्किल गैप स्टडी रिपोर्ट राज्य में कौशल विकास की भविष्य की योजनाओं को दिशा देने में उपयोगी साबित हो सकती है। इसके निष्कर्षों के आधार पर यह पहचानने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रमों और विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

गौरव गौतम का फोकस: ट्रेनिंग से नौकरी और फिर उद्यमिता तक
युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता मंत्री गौरव गौतम ने कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल युवाओं को प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप सक्षम बनाना है।
मंत्री के अनुसार, रिपोर्ट से यह समझने में मदद मिलेगी कि कंपनियों को किस प्रकार के कुशल कर्मचारियों की जरूरत है और युवाओं को रोजगार पाने के लिए किन क्षमताओं को विकसित करना चाहिए।
इस दिशा में कई पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है:
- रोजगार मेले: युवाओं और संभावित नियोक्ताओं के बीच संपर्क बढ़ाना।
- आधुनिक पाठ्यक्रम: बदलती तकनीक और उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देना।
- ITI का आधुनिकीकरण: मशीनरी और प्रशिक्षण सुविधाओं को अपग्रेड करने पर जोर।
- नए स्किल सेंटर: युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण के अधिक अवसर उपलब्ध कराना।
- उद्यमिता को बढ़ावा: युवाओं को स्वरोजगार और अपना कारोबार शुरू करने के लिए कौशल आधारित अवसरों से जोड़ना।
मंत्री ने यह भी कहा कि श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और गैर-पारंपरिक ऊर्जा से जुड़े पाठ्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
AI, ड्रोन, EV और साइबर सिक्योरिटी में प्रशिक्षण की तैयारी
तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ कई नए क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत बढ़ रही है। हरियाणा में भी भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए उभरते क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रमुख क्षेत्र इस प्रकार हैं:
1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): तकनीकी सेवाओं और डिजिटल कार्यक्षेत्रों के लिए जरूरी कौशल विकसित करना।
2. ड्रोन टेक्नोलॉजी: ड्रोन संचालन और इससे जुड़े तकनीकी कार्यों के लिए प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाना।
3. इलेक्ट्रिक वाहन (EV): इलेक्ट्रिक वाहनों और संबंधित तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करना।
4. साइबर सिक्योरिटी: डिजिटल सिस्टम और नेटवर्क की सुरक्षा से संबंधित क्षमताओं को विकसित करना।
5. सेमीकंडक्टर: इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण से जुड़े उभरते औद्योगिक क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करना।
6. ग्रीन हाइड्रोजन: स्वच्छ ऊर्जा और नई ऊर्जा तकनीकों से संबंधित प्रशिक्षण को बढ़ावा देना।
हालांकि, इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण की वास्तविक उपलब्धता और युवाओं को मिलने वाले रोजगार के अवसर संबंधित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन तथा उद्योगों की मांग पर निर्भर करेंगे।
हरियाणा में 4.73 लाख से अधिक अप्रेंटिस जुड़े
कौशल विकास के साथ उद्योगों में व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी समीक्षा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2016-17 से सितंबर 2026 तक हरियाणा में 4.73 लाख से अधिक अप्रेंटिस जुड़े हैं।
अप्रेंटिसशिप के जरिए युवाओं को कार्यस्थल पर प्रशिक्षण और उद्योगों की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिलता है। इससे उन्हें अपने तकनीकी ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव में बदलने में मदद मिल सकती है।
आगे की चुनौती यह होगी कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर मिलें और उद्योगों की जरूरतों के हिसाब से प्रशिक्षण की गुणवत्ता लगातार बेहतर बनाई जाए।
आखिर क्यों जरूरी है स्किल गैप स्टडी रिपोर्ट?
किसी भी राज्य में रोजगार की संभावनाएं केवल उपलब्ध नौकरियों पर निर्भर नहीं करतीं। यह भी मायने रखता है कि नौकरी तलाश रहे युवाओं के पास संबंधित काम के लिए जरूरी तकनीकी ज्ञान, व्यावहारिक अनुभव और कौशल मौजूद हैं या नहीं।
उदाहरण के लिए, यदि किसी उद्योग को आधुनिक मशीनों पर काम करने वाले तकनीशियनों की जरूरत है, लेकिन प्रशिक्षण संस्थानों में पुरानी मशीनरी और सीमित पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, तो उद्योगों और युवाओं के बीच कौशल का अंतर पैदा हो सकता है।
स्किल गैप स्टडी रिपोर्ट इसी अंतर को समझने का आधार प्रदान करती है। इसके निष्कर्षों से प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता, युवाओं की आकांक्षाओं और उद्योगों की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में सहायता मिल सकती है।
युवाओं और उद्योगों पर क्या पड़ सकता है असर?
इस पहल का प्रभाव रिपोर्ट के निष्कर्षों को योजनाओं में लागू करने और उनके परिणामों पर निर्भर करेगा। यदि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को वास्तविक औद्योगिक मांग से जोड़ा जाता है, तो इसके कई संभावित लाभ सामने आ सकते हैं।
- रोजगार की तैयारी: युवाओं को नौकरी से जुड़े व्यावहारिक कौशल सीखने का अवसर मिल सकता है।
- उद्योगों को प्रशिक्षित कर्मचारी: कंपनियों को अपनी जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
- ITI की उपयोगिता: आधुनिक मशीनरी और नए पाठ्यक्रमों से तकनीकी प्रशिक्षण अधिक प्रासंगिक बन सकता है।
- स्वरोजगार के अवसर: कौशल आधारित प्रशिक्षण से युवा अपना काम या उद्यम शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
- नई तकनीकों में भागीदारी: AI, EV, ड्रोन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भविष्य के काम के लिए तैयारी हो सकती है।
इन संभावनाओं को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योगों की भागीदारी, अप्रेंटिसशिप के अवसर और प्रशिक्षण के बाद रोजगार की स्थिति पर लगातार निगरानी जरूरी होगी।







