हरियाणा में बिजली निजीकरण पर ब्रेक: 9 दिन में ही रद्द हुआ निजी कंपनी का लाइसेंस, 45 घंटे चली थी कर्मचारियों की हड़ताल
गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए EPPL को मिला था 25 साल का लाइसेंस; सरकार के हस्तक्षेप के बाद HERC का बड़ा फैसला

पंचकूला। हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने निजी कंपनी Eleven Power Private Limited (EPPL) को गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए दिया गया समानांतर लाइसेंस रद्द कर दिया है। आयोग ने यह फैसला लाइसेंस जारी होने के महज नौ दिन बाद लिया। इस मामले में बिजली कर्मचारियों ने विरोध में करीब 45 घंटे तक हड़ताल की थी, जिसके दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आई थीं।
आयोग के कार्यकारी चेयरमैन मुकेश गर्ग और सदस्य शिव कुमार की बेंच ने पंचकूला में इस संबंध में आदेश जारी किए। आयोग ने EPPL की सुनवाई की मांग को भी खारिज कर दिया।
19 अक्टूबर को मिला था 25 साल का लाइसेंस
HERC ने 19 अक्टूबर 2026 को अपने आदेश में EPPL को गुरुग्राम और नूंह जिलों में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया था। कंपनी ने 21 अक्टूबर को लाइसेंस के प्रति अपनी सहमति भी दे दी थी।
इस फैसले के बाद बिजली कर्मचारी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया। कर्मचारियों की प्रमुख मांग थी कि हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था का निजीकरण नहीं किया जाए और सरकारी बिजली निगमों की मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखा जाए।
22 से 24 अक्टूबर तक चली थी हड़ताल
निजी कंपनी को लाइसेंस दिए जाने के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल की घोषणा की थी। हड़ताल के दौरान प्रदेश के कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की सूचना मिली। लंबे समय तक बिजली न आने से परेशान लोगों ने भी कुछ स्थानों पर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए।
इस आंदोलन के चलते बिजली विभाग और राज्य सरकार पर दबाव बढ़ गया। कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार को यूनियन नेताओं के साथ बातचीत करनी पड़ी।
CM नायब सैनी और अनिल विज ने दिया था आश्वासन
हड़ताल के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली मंत्री अनिल विज ने कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की थी। कर्मचारियों को आश्वासन दिया गया था कि राज्य में बिजली विभाग के निजीकरण को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और निजी कंपनी को दिए गए लाइसेंस को रद्द कराने की प्रक्रिया पर काम किया जाएगा।
इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दी। अब HERC के ताजा आदेश को इस विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
सरकार ने विद्युत अधिनियम की धारा 108 का किया इस्तेमाल
हरियाणा सरकार ने निजी बिजली वितरण लाइसेंस पर आपत्ति जताते हुए विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत HERC को लिखित निर्देश जारी किए थे। 26 अक्टूबर 2026 को जारी निर्देशों में सरकार ने कहा था कि राज्य में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस न बनाया जाए और न ही उसे चालू किया जाए।
सरकार ने अपनी दलील में कहा था कि समानांतर वितरण व्यवस्था से सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है। आशंका जताई गई कि अधिक भुगतान करने वाले उपभोक्ता निजी कंपनी की ओर जा सकते हैं, जबकि किसानों और अन्य श्रेणियों को बिजली उपलब्ध कराने से जुड़ा वित्तीय बोझ सरकारी बिजली निगमों पर रह सकता है। सरकार ने इसे जनहित और क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था के लिहाज से चिंता का विषय बताया था।
EPPL की सुनवाई की मांग भी खारिज
सरकार के निर्देशों पर विचार करने के बाद HERC की बेंच ने EPPL को दिया गया समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी किया। आयोग ने कंपनी की सुनवाई की मांग भी स्वीकार नहीं की।





इस फैसले से गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी के माध्यम से समानांतर बिजली वितरण शुरू करने की योजना को झटका लगा है। हालांकि, आगे किसी कानूनी चुनौती या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति संबंधित पक्षों के अगले कदमों पर निर्भर करेगी।
आम लोगों और बिजली कर्मचारियों के लिए क्या मायने?
लाइसेंस रद्द होने से बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों की प्रमुख आपत्ति पर फिलहाल राहत मिलती दिखाई दे रही है। वहीं, सरकार ने निजी वितरण व्यवस्था से सरकारी बिजली निगमों के राजस्व और क्रॉस-सब्सिडी पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी।







