Dhruv Jurel की बल्लेबाजी का खामोश अंदाज, बिना शोर किए बना रहे हैं रनों का पहाड़
ऋषभ पंत की आक्रामक बल्लेबाजी के बीच Dhruv Jurel ने अपनाई पुरानी शैली, 99 तक पहुंचकर बढ़ी धड़कनें और फिर पूरा किया दूसरा टेस्ट शतक

स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय टेस्ट टीम में विकेटकीपर-बल्लेबाज की भूमिका निभाना आसान नहीं है। खासकर तब, जब आपके सामने ऋषभ पंत जैसा मैच का रुख बदल देने वाला खिलाड़ी मौजूद हो। Dhruv Jurel ने इसी चुनौती के बीच अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है। उन्हें लंबे समय तक पंत की गैरमौजूदगी में मौका मिला और उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित करने के बाद टीम में अपनी जगह को सिर्फ विकल्प के बजाय एक भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में मजबूत किया।
श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी Dhruv Jurel ने इसी शांत और नियंत्रित अंदाज की मिसाल पेश की। जब पंत अपने अंदाज में गेंदबाजों पर दबाव बना रहे थे, तब जुरेल दूसरे छोर पर बिना ज्यादा सुर्खियां बटोरे रन जोड़ते रहे। नतीजा यह रहा कि उन्होंने अपने टेस्ट करियर का दूसरा शतक पूरा कर लिया।
पंत का तूफानी अंदाज, जुरेल का धैर्य
ऋषभ पंत की बल्लेबाजी में जोखिम और रचनात्मकता दोनों दिखाई देते हैं। यही शैली उन्हें खास बनाती है, लेकिन इसी वजह से चोट का खतरा भी बना रहता है। श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में भी पंत ने वही पुल शॉट खेलकर छक्का लगाया, जिससे मैच के शुरुआती दिन उन्हें चोट लगी थी।
दूसरी ओर Dhruv Jurel ने कोई असाधारण प्रयोग करने के बजाय अपनी बल्लेबाजी की बुनियाद पर भरोसा किया। उनकी रणनीति साफ थी—खराब गेंदों पर प्रहार, अच्छी गेंदों का सम्मान और मौके मिलने पर तेजी से रन।
जुरेल की बल्लेबाजी में दिखता है पुराना स्कूल क्रिकेट
Dhruv Jurel की बल्लेबाजी की खासियत यह है कि वह देखने में बेहद सहज लगती है। वह गेंद के हिसाब से अपना शॉट चुनते हैं और अनावश्यक जोखिम लेने से बचते हैं।
फुल लेंथ गेंद पर आगे आकर खेलना, छोटी गेंद पर पीछे हटना, खराब गेंद को सीमा रेखा के पार भेजना और अच्छी गेंद पर डिफेंस या सिंगल लेना—उनकी पारी में क्रिकेट की यही बुनियादी समझ नजर आई। इसी कारण उनके रन कई बार दर्शकों की नजरों से बच जाते हैं। स्कोरकार्ड पर नजर डालने पर पता चलता है कि जुरेल चुपचाप 20-30 रन और जोड़ चुके हैं।
173 रन, लेकिन चर्चा बेहद कम
इस सीरीज में Dhruv Jurel ने कुल 173 रन जोड़कर अपनी निरंतरता दिखाई। दिलचस्प बात यह रही कि उनकी पारी के कई हिस्से ऐसे थे, जिनमें कोई बड़ा शॉट या नाटकीय पल नहीं था। उनके दो स्ट्रेट ड्राइव जरूर यादगार रहे, लेकिन दोनों में गेंद सीधे नॉन-स्ट्राइकर छोर के स्टंप से जा टकराई और रन नहीं मिल सके। यह भी जुरेल की बल्लेबाजी के अनोखे अंदाज का हिस्सा रहा—कम शोर, ज्यादा काम।
99 पर पहुंचते ही बढ़ गया दबाव
Dhruv Jurel की शतकीय पारी का सबसे रोमांचक हिस्सा तब आया जब वह 99 रन पर पहुंच गए। उस समय भारत की पारी में निचले क्रम के बल्लेबाज मौजूद थे और जुरेल को स्ट्राइक अपने पास रखने की जरूरत थी। उन्होंने एक रिवर्स स्वीप के जरिए चौका भी लगाया और फिर शतक के बेहद करीब पहुंच गए। लेकिन 99 के बाद रन आना अचानक मुश्किल हो गया। श्रीलंकाई गेंदबाज ने लाइन और लेंथ को बेहतर किया और फील्डिंग भी ऐसी रखी गई कि जुरेल के लिए आसानी से रन निकालना मुश्किल हो गया।
99 पर एक शॉट ने बढ़ा दी बेचैनी
शतक से एक रन दूर जुरेल ने एक ऐसा शॉट खेला, जिसे शुरुआत में उन्हें लगा कि वह फील्डरों के बीच से निकाल चुके हैं। लेकिन मिड-ऑफ के फील्डर कमिल मिशारा ने गेंद को पकड़ लिया।उस पल Dhruv Jurel को लगा कि उनकी शतकीय पारी खत्म हो सकती है। गेंद के छूटने या कैच के मौके से बचने के बाद जुरेल ने तेजी से रन पूरा करने की कोशिश की और उन्हें मैदान पर पूरी ताकत लगाकर दौड़ लगानी पड़ी। आखिरकार वह बच गए और उनका शतक पूरा हुआ। इस दौरान मोहम्मद सिराज की खुशी भी देखने लायक थी। उन्होंने जुरेल की उपलब्धि का जोरदार जश्न मनाया।
शतक के बाद सामने आया परिवार से जुड़ा संदेश
जुरेल के शतक के बाद उनके हाथ पर बना टैटू भी चर्चा में आया। उस पर “जय जवान, जय किसान” लिखा है। यह नारा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से जुड़ा है और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौर में देशवासियों के बीच जोश भरने के लिए इस्तेमाल किया गया था। Dhruv Jurel के लिए यह सिर्फ एक टैटू नहीं बल्कि उनकी पारिवारिक जड़ों से जुड़ा संदेश है। उनके दादा किसान थे, जबकि उनके पिता सेना में रहे हैं। जुरेल ने इन दोनों पृष्ठभूमियों को अपनी पहचान का हिस्सा माना है।
पंत के साथ बल्लेबाजी करना जुरेल के लिए आसान क्यों?
Dhruv Jurel ने खुद माना है कि पंत जैसे आक्रामक बल्लेबाज के साथ खेलना उनके लिए फायदेमंद है। पंत जब लगातार बड़े शॉट खेलते हैं तो गेंदबाज स्वाभाविक रूप से उन्हें रोकने पर ज्यादा ध्यान देते हैं। ऐसे में दूसरे छोर पर मौजूद जुरेल को अपेक्षाकृत शांत तरीके से रन बनाने के अवसर मिलते हैं। यही साझेदारी जुरेल की बल्लेबाजी को और प्रभावी बनाती है। एक छोर पर पंत विपक्षी टीम को परेशान करते हैं तो दूसरे छोर पर जुरेल बिना ज्यादा जोखिम लिए स्कोर आगे बढ़ाते रहते हैं।
91 प्रतिशत कंट्रोल रेट बताता है कहानी
Dhruv Jurel की इस पारी की सबसे खास बात उनकी बल्लेबाजी पर नियंत्रण था। उन्होंने करीब 91 प्रतिशत गेंदों पर नियंत्रण बनाए रखा और उनका स्ट्राइक रेट लगभग 60 रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि उनकी पारी सिर्फ धैर्य पर आधारित नहीं थी। वह रन भी बना रहे थे और गलत शॉट खेलने से भी बच रहे थे। उनका क्रिकेटिंग टेम्परामेंट ही शायद उन्हें बाकी बल्लेबाजों से अलग करता है।
विकेटकीपिंग में भी अलग पहचान
भारतीय टीम में विकेटकीपर की भूमिका को लेकर मुकाबला सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है। केएस भरत, जिन्होंने पंत और जुरेल के कारण टीम में अपनी जगह गंवाई, ने भी जुरेल की विकेटकीपिंग क्षमता को मजबूत माना है। हालांकि, जब पंत और Dhruv Jurel दोनों एक ही प्लेइंग इलेवन में खेलते हैं तो विकेटकीपिंग ग्लव्स को लेकर प्राथमिकता स्वाभाविक रूप से पंत के पक्ष में जाती है।
लेकिन जुरेल के लिए इसे सीधी प्रतिस्पर्धा मानना जरूरी नहीं है। अगर वह लगातार रन बनाते रहे और अपनी विकेटकीपिंग क्षमता को भी मजबूत रखते रहे, तो भारतीय टेस्ट टीम में उनके पास अपनी जगह बनाए रखने के पर्याप्त कारण मौजूद हैं।
जुरेल की असली ताकत उनका धैर्य
Dhruv Jurel की कहानी सिर्फ एक शतक की नहीं है। उनकी बल्लेबाजी यह दिखाती है कि टेस्ट क्रिकेट में हर बल्लेबाज को आक्रामक होने की जरूरत नहीं होती। पंत की तरह गेंदबाजों पर हमला करना एक तरीका है, लेकिन जुरेल का तरीका अलग है। वह गेंदबाज को लगातार परेशान करने के बजाय अपनी गलती का इंतजार करते हैं और फिर मौके का फायदा उठाते हैं।
भारतीय टेस्ट टीम को मिला भरोसेमंद विकल्प
ऋषभ पंत भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली विकेटकीपर-बल्लेबाजों में शामिल हैं, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में लंबी सीरीज के दौरान चोट और फिटनेस हमेशा चुनौती बनी रहती है। ऐसे में जुरेल का लगातार रन बनाना भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वह सिर्फ पंत के बैकअप के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे बल्लेबाज के तौर पर अपनी जगह बना सकते हैं जो निचले-मध्य क्रम में टीम को स्थिरता दे। अगर Dhruv Jurel इसी तरह बिना अनावश्यक जोखिम के रन बनाते रहे, तो भारतीय टेस्ट क्रिकेट में उनकी भूमिका आने वाले समय में और बड़ी हो सकती है।







