अमृतसर में गोल्डन टेंपल पहुंचे सुनील शेट्टी, परिवार संग टेका माथा; बोले- यहां मिलती है अलग ऊर्जा

अमृतसर। बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी आज परिवार के साथ अमृतसर पहुंचे और सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेककर गुरु घर का आशीर्वाद लिया। उन्होंने सरबत के भले के लिए अरदास की और पवित्र परिक्रमा में बैठकर गुरबाणी का श्रवण किया। इस दौरान अभिनेता ने वाहेगुरु का शुक्राना अदा करते हुए कुछ समय आध्यात्मिक माहौल में बिताया।
श्री हरमंदिर साहिब पहुंचने के बाद सुनील शेट्टी भावुक नजर आए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि गुरु घर में आने के बाद उन्हें मन में गहरा सुकून और खुशी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि कई बार यहां का माहौल इतना भावुक कर देता है कि अपनी भावनाओं को शब्दों में बयां करना मुश्किल हो जाता है।
बोले- यहां से मिलती है अलग तरह की ऊर्जा
सुनील शेट्टी ने कहा कि जब भी वह गोल्डन टेंपल आते हैं, उन्हें एक अलग तरह की ऊर्जा और सकारात्मकता महसूस होती है। गुरु घर में माथा टेकने के बाद मन को शांति मिलती है और भीतर से भरोसा पैदा होता है कि आने वाला समय अच्छा रहेगा।
अभिनेता के मुताबिक, श्री हरमंदिर साहिब का आध्यात्मिक वातावरण व्यक्ति को भीतर से मजबूत करने का काम करता है। यहां कुछ समय बिताने के बाद मन हल्का और शांत महसूस होता है।
शादी की सालगिरह के बाद परिवार के साथ पहुंचे गुरु घर
सुनील शेट्टी ने बताया कि 11 तारीख को उनकी शादी की सालगिरह थी। इसके बाद वह परिवार के साथ गुरु घर का आशीर्वाद लेने अमृतसर पहुंचे। उन्होंने कहा कि लोग अलग-अलग भावनाओं और उद्देश्यों के साथ गुरु घर आते हैं, लेकिन यहां से हर किसी को सेवा, विनम्रता और अच्छी सोच की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को केवल धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि रोजमर्रा के निजी जीवन में भी अपनाना चाहिए।
नई ऊर्जा के साथ काम शुरू करने की बात
सुनील शेट्टी ने कहा कि श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने के बाद वह खुद को नई ऊर्जा से भरा हुआ महसूस कर रहे हैं और इसी सकारात्मकता के साथ अपने काम की शुरुआत करेंगे।
उनके लिए गोल्डन टेंपल की यात्रा केवल धार्मिक दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा हासिल करने का अवसर भी है।
अभिनेता के अमृतसर पहुंचने की खबर से उनके प्रशंसकों में भी उत्साह देखने को मिला। सुनील शेट्टी ने गुरु घर की मर्यादा का सम्मान करते हुए दर्शन किए, गुरबाणी सुनी और अरदास की। इसके बाद वह परिवार के साथ आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक भावनाओं के साथ रवाना हुए।







