Jagannath Rath Yatra 2026 : चंडीगढ़ में नेत्र उत्सव के साथ शुरू हुआ जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव

Jagannath Rath Yatra 2026 : चंडीगढ़ के सेक्टर-31 स्थित जगन्नाथ मंदिर में मंगलवार को नेत्रोत्सव (नेत्र उत्सव) के साथ भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। 15 दिनों के अनासारा (एकांतवास) के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन के नवयौवन स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोले गए। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
उत्कल सांस्कृतिक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विशेष पूजा-अर्चना और हवन संपन्न हुआ। मंदिर परिसर “जय जगन्नाथ” के जयघोष, शंखनाद और पारंपरिक उलुध्वनि (हुलहुली) से भक्तिमय वातावरण में बदल गया। इस अवसर पर मंदिर पर नई ध्वजा भी फहराई गई।
15 दिनों बाद हुए नवयौवन दर्शन
धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों तक एकांतवास में रहते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं को दर्शन नहीं होते। इस अवधि को अनासारा कहा जाता है। इसके बाद भगवान के स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देने की परंपरा नेत्रोत्सव और नवयौवन दर्शन के रूप में मनाई जाती है।
16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा
उत्कल सांस्कृतिक संघ के सांस्कृतिक सचिव अनिल मालिक ने बताया कि 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा सेक्टर-31 स्थित मंदिर से निकाली जाएगी। रथयात्रा सेक्टर-31 से प्रारंभ होकर सेक्टर-32, 29, 30, 20, 21, 34, 44, 45 और 47 से गुजरते हुए पुनः सेक्टर-31 स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं।
धार्मिक परंपरा का विशेष महत्व
जगन्नाथ रथयात्रा को सनातन परंपरा के प्रमुख धार्मिक उत्सवों में गिना जाता है। नेत्रोत्सव के साथ महाप्रभु के नवयौवन दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखते हैं। इसके बाद निकलने वाली रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के रथ को खींचकर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।





