मलेशिया से बंबीहा गैंग के 3 गुर्गे डिपोर्ट, पंजाब पुलिस ने दबोचा; लुधियाना ब्लास्ट की साजिश से भी जुड़ा नाम

मोहाली : पंजाब पुलिस ने विदेश में छिपे गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए बंबीहा गैंग से जुड़े तीन कथित गुर्गों को मलेशिया से डिपोर्ट करवाकर भारत लाया है। भारत पहुंचते ही पुलिस ने जस बेहबल, अजय सिंह और पवनीदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी पंजाब और आसपास के राज्यों में रंगदारी, टारगेट किलिंग और अन्य गंभीर आपराधिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। इनमें अजय सिंह और पवनीदीप सिंह का नाम लुधियाना में हुए हैंड ग्रेनेड ब्लास्ट की कथित साजिश में भी सामने आया था।
लुधियाना में दहशत फैलाने की थी कथित साजिश
पुलिस के मुताबिक नवंबर 2025 में लुधियाना पुलिस ने कुछ युवकों को हैंड ग्रेनेड के साथ पकड़ा था। पूछताछ के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि शहर में धमाका कर दहशत पैदा करने की योजना बनाई गई थी। आरोपियों के कब्जे से चीनी निर्मित हैंड ग्रेनेड बरामद होने की बात भी सामने आई थी।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कथित साजिश के तार मलेशिया तक जुड़े मिले। जांच एजेंसियों के अनुसार, अजय सिंह और पवनीदीप सिंह विदेश में बैठकर इस पूरी साजिश को संचालित कर रहे थे। इसके बाद पंजाब पुलिस ने केंद्र सरकार के स्तर पर मामला उठाते हुए दोनों आरोपियों को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की।
अब दोनों को मलेशिया से डिपोर्ट करवाकर गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर उनके नेटवर्क, संपर्कों और कथित आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
विदेशों में छिपे अपराधियों पर शिकंजा
पंजाब पुलिस ने विदेशों में छिपे गैंगस्टरों और वांछित अपराधियों को भारत लाने के लिए कार्रवाई का अभियान तेज किया है। फरवरी 2026 में ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत विदेशों में मौजूद 38 वांछित गैंगस्टरों और अपराधियों की सूची तैयार कर प्रत्यर्पण व डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
इसके बाद जून में KZF से जुड़े बताए जा रहे गुरविंदर सिंह और मनजीत सिंह को मलेशिया से डिपोर्ट कर भारत लाया गया। जुलाई में ‘ऑपरेशन नोमैड हंट’ के तहत मोस्ट वांटेड गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ जोबन बिल्ला को इंडोनेशिया के जकार्ता से डिपोर्ट करवाया गया।
अब अगस्त में बंबीहा गैंग से जुड़े बताए जा रहे जस बेहबल, अजय सिंह और पवनीदीप सिंह की गिरफ्तारी को पंजाब पुलिस की विदेशों में छिपे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की एक और बड़ी कड़ी माना जा रहा है।
नोट: आरोपियों पर लगे आरोप पुलिस की जांच और उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय के अधीन होगी।







