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Haryana News : पहले पाकिस्तान, अब बांग्लादेश भी चुनौती’ – मंत्री अनिल विज का बड़ा बयान

Haryana News : हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने अरावली पर्वत श्रृंखला में खनन को लेकर केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ‘‘अरावली पर्वत श्रृंखला विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है और इसके संरक्षण के लिए केंद्र सरकार द्वारा लिया गया निर्णय सराहनीय है। उन्होंने कहा कि अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टे न दिए जाने के केंद्र सरकार के फैसले का वे स्वागत करते हैं और पर्यावरणविदों व प्रकृति प्रेमियों को भी इस निर्णय का स्वागत करना चाहिए’’। साथ ही, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और 1971 युद्ध के संदर्भ में उन्होंने पाकिस्तान, बांग्लादेश और पीओके को लेकर तीखे और बेबाक बयान दिए, विज ने कहा कि ‘इतिहास में बहुत बडी-बडी गलतियां हो रखी है इसलिए बंग्लादेश में हिन्दूओं पर हो रहे अत्याचारों को गंभीरता से विचार करना चाहिए’ उन्होंने ने शायराना अंदाज में कहा ‘‘खता लम्हों ने की, सजा सदियों ने पाई’’।

कांग्रेस पर निशाना

विपक्ष द्वारा इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए जाने के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मंत्री विज ने कहा कि माननीय न्यायालय के निर्णय को सरकार की भूमिका से जोड़ना न्यायपालिका का अपमान करने के समान है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न्यायालय का है, न कि सरकार का। विपक्ष न तो फैसले को ठीक से पढ़ता है और न ही तथ्यों को समझता है। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए स्पष्ट आदेश का वे स्वागत करते हैं और पर्यावरण से जुड़े सभी लोगों को भी इसका स्वागत करना चाहिए।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार, अनिल विज की चिंता

मंत्री अनिल विज ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के मुद्दे पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस विषय पर अत्यंत गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है, क्योंकि बांग्लादेश के निर्माण में भारत की निर्णायक भूमिका रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बना और उस समय देश की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी थीं।

मंत्री अनिल विज ने कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद बांग्लादेश में जिस प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे यह प्रतीत होता है कि पहले भारत के लिए केवल पाकिस्तान ही चुनौती था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं और बांग्लादेश भी एक नई चुनौती के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बड़ी राजनीतिक भूलें हुई हैं, जिनका खामियाजा आज भी देश भुगत रहा है।

 

पीओके का मसाला आज भी वहीं खड़ा हुआ है- अनिल विज

उन्होंने स्मरण कराया कि 1971 के युद्ध के दौरान भारत के पास लगभग 90 हजार पाकिस्तानी युद्धबंदी थे और उस समय भारत के पास कई रणनीतिक विकल्प मौजूद थे। यदि उस समय राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाती, तो भारत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को वापस ले सकता था। लेकिन उस अवसर का उपयोग नहीं किया गया और युद्धबंदियों को वापस कर दिया गया, जबकि पीओके का मुद्दा आज भी यथावत बना हुआ है।

इसी प्रकार, उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारत ने बांग्लादेश पर नियंत्रण स्थापित करने का विकल्प भी नहीं अपनाया। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश का एक भू-भाग ऐसा है, जो चीन के काफी नजदीक स्थित है और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि उस समय इस पहलू पर गंभीरता से विचार किया जाता, तो आज परिस्थितियां भिन्न हो सकती थीं।

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  • अमर सिंह पिछले 19 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने टोटल टीवी और MH One News सहित कई प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में वीडियो जर्नलिस्ट के रूप में कार्य किया है।

    वर्तमान में वे Hindxpress Media House के संस्थापक हैं और Rashtr Khabar डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म का संचालन कर रहे हैं। Rashtr Khabar तेज़, सटीक, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित समाचारों के लिए प्रतिबद्ध है तथा राजनीति, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, व्यापार, शिक्षा, अपराध, खेल, मनोरंजन और टेक्नोलॉजी सहित विभिन्न विषयों की विश्वसनीय खबरें प्रकाशित करता है।

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