Crop monitoring. खेत से मंडी तक किसान की फसल पर रहेगी पूरी निगरानी, CM ने अपनाया कड़ा रुख !

Crop monitoring. Haryana के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फसल खरीद व्यवस्था में आई अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार प्रत्येक किसान की Crop का एक-एक दाना Minimum Support Price पर खरीदने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, वहीं गलत खरीद को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Chief Minister Nayab Singh Saini ने संबंधित खरीद एजेंसियों के अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि आगामी खरीद सीजन के दौरान फील्ड में नियमित और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि किसान की सही उपज बिना किसी बाधा के एमएसपी पर खरीदी जा सके। उन्होंने कहा कि फसल खरीद में पूर्व में उजागर हुई अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी खरीद सीजन में इस प्रकार की कोई भी समस्या दोबारा नहीं आनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि फसल खरीद में संलिप्त पाए किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई तुरंत अमल में लाई जाए। इससे फील्ड स्तर पर यह स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि गलत कार्य करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि यदि किसी शेलर या आढ़ती द्वारा मिलीभगत कर भारी अनियमितताएं पाई जाती हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ भारी पेनल्टी भी लगाई जाए। उन्होंने कहा कि शेलरों की जांच के लिए संबंधित विभाग की समिति ही जाए, कोई भी अधिकारी या कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से जांच पर न जाए। यदि ऐसा पाया गया तो उसके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के माध्यम से किसान के खेत से मंडी तक और मंडी से शेलर तक पूरी फसल की पूर्ण रूप से तकनीकी निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता की संभावना न रहे।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी 24 फसलों की खरीद एमएसपी पर की जा रही है, इसलिए सभी फसलों का सटीक डाटा ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर अपडेट होना अनिवार्य है। इसके लिए ग्राम सचिवों, पटवारियों के साथ-साथ ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को भी जोड़ा जाए ताकि कितने एकड़ में कितनी फसल खड़ी है, इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध हो सके। साथ ही हरसैक से प्राप्त रिपोर्ट के साथ भी आपसी तालमेल सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि इस प्रक्रिया में प्रदेश की कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालयों को भी शामिल कर उनकी विशेषज्ञ भागीदारी सुनिश्चित की जाए।






