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हरियाणा में पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार, PPP मॉडल से विकसित होंगे प्रमुख पर्यटन स्थल; निजी निवेश के खुलेंगे रास्ते

चंडीगढ़, 30 सितंबर 2026: हरियाणा सरकार पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए निजी निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। प्रदेश के चुनिंदा पर्यटन स्थलों और परिसरों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। सरकार का फोकस निजी क्षेत्र की पूंजी, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रबंधन क्षमता को सरकारी प्रयासों के साथ जोड़कर पर्यटन सुविधाओं को आधुनिक बनाने पर है।

हरियाणा के सहकारिता, कारागार, पर्यटन, विरासत एवं निर्वाचन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने नई दिल्ली में आयोजित ‘एसोचैम स्वरा राष्ट्रीय पर्यटन सम्मेलन’ में राज्य के पर्यटन विकास की दिशा और प्रस्तावित रोडमैप पर बात रखी। उनके अनुसार पर्यटन को केवल घूमने-फिरने तक सीमित रखने के बजाय इसे निवेश, रोजगार, स्थानीय कारोबार और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

PPP मॉडल से पर्यटन स्थलों के विकास की तैयारी

सरकार की योजना के तहत प्रदेश के चुनिंदा पर्यटन स्थलों और परिसरों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। PPP मॉडल के जरिए निजी निवेश के साथ आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और पर्यटकों के लिए नई सुविधाओं को विकसित करने का प्रयास होगा।

हालांकि, पर्यटन स्थलों के विकास में ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य निजी निवेश और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन बनाते हुए पर्यटन ढांचे को मजबूत करना है।

पर्यटन को रोजगार और स्थानीय कारोबार से जोड़ने पर जोर

डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि पर्यटन को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार काम कर रही है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी सेवा, टूर गाइड, हस्तशिल्प, स्थानीय खान-पान और छोटे कारोबारों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

सरकार पहले ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पर्यटन से जोड़ने पर जोर दे रही है। हरियाणा पर्यटन के अनुसार राज्य में 11 होमस्टे और 38 फार्म टूरिज्म साइट्स पंजीकृत हैं। सरकार का उद्देश्य पर्यटकों की आमद का आर्थिक लाभ गांवों तक पहुंचाना है।

सुरजकुंड से पिंजौर तक पर्यटन पर फोकस

हरियाणा सरकार पर्यटन के कई अलग-अलग क्षेत्रों को विकसित करने पर काम कर रही है। इनमें धार्मिक, ऐतिहासिक, ग्रामीण और एडवेंचर टूरिज्म शामिल हैं।

सरकारी जानकारी के अनुसार सुरजकुंड को सालभर चलने वाले सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। वहीं पिंजौर के यादविंद्र गार्डन को हेरिटेज वेडिंग डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित करने की योजना भी पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने का हिस्सा है।

इसके अलावा टिक्कर ताल, तिलयार झील और हथनीकुंड बैराज जैसे स्थलों पर एडवेंचर टूरिज्म से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

कुरुक्षेत्र और धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

हरियाणा के पर्यटन रोडमैप में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुरुक्षेत्र में महाभारत से जुड़े स्थलों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने पर काम किया जा रहा है।

सरकार के मुताबिक ज्योतिसर में महाभारत एक्सपीरियंस सेंटर विकसित किया गया है। इसके साथ ही विराट स्वरूप में लाइट एंड साउंड शो भी तैयार किया गया है।

इस तरह धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

डिजिटल तकनीक से पर्यटकों को मिलेगी जानकारी

हरियाणा पर्यटन ने हाल ही में मोहाली स्थित शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर टूरिस्ट इंफॉर्मेशन एंड फैसिलिटेशन सेंटर शुरू किया है। यहां पर्यटकों को प्रदेश के पर्यटन स्थलों, होटल, रिसॉर्ट, मेलों और कार्यक्रमों की जानकारी देने के साथ बुकिंग में भी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

इस सेंटर में AI आधारित ‘सरस्वती’ ऐप भी शामिल किया गया है, जिसके माध्यम से पर्यटक हरियाणा के ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों की जानकारी हासिल कर सकते हैं।

विरासत संरक्षण के साथ विकास पर जोर

डॉ. अरविंद शर्मा ने पर्यटन विकास में प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने पर जोर दिया। सरकार के अनुसार पर्यटन स्थलों का विकास केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विरासत संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को भी इसके साथ जोड़ा जाएगा।

हरियाणा में विरासत स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए पहले भी कई कार्यक्रम चलाए गए हैं। मई 2026 में सरकार ने बताया था कि राज्य में हेरिटेज और पर्यटन स्थलों के विकास, संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं।

निवेश आने से बदल सकता है पर्यटन का ढांचा

PPP मॉडल पर परियोजनाएं विकसित होने की स्थिति में पर्यटन स्थलों पर होटल, मनोरंजन, खान-पान, परिवहन, डिजिटल सेवाओं और अन्य सुविधाओं में निजी भागीदारी बढ़ सकती है। इससे सरकार पर पूरा वित्तीय और संचालन भार रखने के बजाय निजी विशेषज्ञता का उपयोग करने का रास्ता खुल सकता है।

हालांकि, ऐसी परियोजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेश, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदाय के हित और विरासत संरक्षण के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है।

हरियाणा पर्यटन योजना की प्रमुख बातें

  • चुनिंदा पर्यटन स्थलों को PPP मॉडल पर विकसित करने की तैयारी।
  • निजी निवेश और विशेषज्ञता को पर्यटन विकास से जोड़ने पर जोर।
  • ऐतिहासिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता।
  • पर्यटन के जरिए रोजगार और स्थानीय कारोबार बढ़ाने की योजना।
  • सुरजकुंड को सालभर के सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर काम।
  • पिंजौर, कुरुक्षेत्र, मोरनी और अन्य स्थलों पर पर्यटन गतिविधियों का विस्तार।
  • ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे और फार्म टूरिज्म को बढ़ावा।
  • AI आधारित डिजिटल सुविधाओं से पर्यटकों को जानकारी उपलब्ध कराने की पहल।

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