भाजपा सरकार की ‘हकमारी और हेरा-फेरी’ अदालत में भी बेनकाब: रणदीप सुरजेवाला

चंडीगढ़, 13 सितंबर 2026 : हरियाणा में सरकारी भर्तियों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। सहायक प्रोफेसर भर्ती से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की ओर से प्रदेश के दलित, पिछड़े, गरीब और वंचित वर्ग के युवाओं के साथ लगातार अन्याय और भेदभाव किया जा रहा है।
रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले ने भर्ती प्रक्रिया में बीच में नए मानदंड जोड़ने के सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अदालत ने एचपीएससी को नए सिरे से परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं, जिससे उन अभ्यर्थियों को राहत की उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
*सुरजेवाना ने भाजपा से पूछा; ‘एससी-बीसी के बच्चों से भाजपा सरकार को इतनी नफरत क्यों?’*
सुरजेवाला ने भाजपा सरकार पर सवाल दागते हुए कहा कि आखिर एससी और बीसी वर्ग के होनहार बच्चों से सरकार को इतनी नफरत क्यों है? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के गरीब और वंचित परिवारों के युवा वर्षों तक पढ़ाई करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, फीस और आवेदन पर पैसा खर्च करते हैं और नौकरी की उम्मीद में भर्ती प्रक्रिया में शामिल होते हैं, लेकिन सरकार की नीतियों और नियमों में बदलाव के कारण उन्हें बार-बार निराश होना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी युवाओं को अवसर देने की है, लेकिन हरियाणा में भर्ती प्रक्रिया युवाओं के लिए संघर्ष का दूसरा नाम बन गई है।
*2,424 सहायक प्रोफेसर पदों की भर्ती पर रणदीप सुरजेवाला ने उठाए सवाल*
सुरजेवाला ने कहा कि 2 अगस्त 2024 को एचपीएससी ने विभिन्न विषयों में सहायक प्रोफेसर के 2,424 पदों के लिए संयुक्त विज्ञापन जारी किया था। उनके अनुसार, बाद में भर्ती प्रक्रिया में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा से संबंधित नई शर्त जोड़ दी गई, जिसको लेकर अभ्यर्थियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद बीच में ऐसा नया मानदंड लागू करना उचित नहीं है, जिससे अभ्यर्थियों की पात्रता या चयन की स्थिति प्रभावित हो।
सुरजेवाला ने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा पात्रता का आधार है, जबकि अंतिम चयन अभ्यर्थी की वास्तविक मेरिट और निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। उनके मुताबिक, यदि भर्ती नियम या विज्ञापन आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में मेरिट के आधार पर विचार किए जाने से स्पष्ट रूप से नहीं रोकते हैं, तो केवल राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा कटऑफ के आधार पर उन्हें सामान्य श्रेणी में विचार से बाहर नहीं किया जा सकता।
*‘भर्ती विज्ञापन का झुनझुना थमा रही भाजपा सरकार’: रणदीप सुरजेवाला*
कांग्रेस नेता सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की भर्ती नीति का सबसे बड़ा नुकसान प्रदेश के युवाओं को हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े भर्ती विज्ञापन निकालती है, लाखों युवा आवेदन करते हैं, परीक्षा और चयन प्रक्रिया के लिए वर्षों इंतजार करते हैं, लेकिन अंतिम परिणाम में बड़ी संख्या में पद खाली रह जाते हैं।
सुरजेवाला ने कहा कि यह स्थिति तब है जब हरियाणा में बड़ी संख्या में शिक्षित युवा रोजगार की तलाश में हैं। उन्होंने कहा कि NET, JRF और PhD जैसी उच्च योग्यता रखने वाले युवा भी सरकारी भर्ती प्रक्रिया में वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विज्ञापन निकालकर युवाओं को उम्मीद तो देती है, लेकिन नियुक्ति के समय नियमों और कटऑफ के ऐसे पेंच सामने आ जाते हैं, जिनसे हजारों पद खाली रह जाते हैं।
*अंग्रेजी और पीजीटी भर्ती का उदाहरण देकर रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा सरकार को घेरा*
रणदीप सुरजेवाला ने अंग्रेजी विषय के सहायक प्रोफेसर और पीजीटी भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में पदों के बावजूद हजारों पद खाली रह जाना सरकार की भर्ती नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के सहायक प्रोफेसर भर्ती में 613 पदों के लिए परीक्षा हुई, लेकिन 462 पद खाली रह गए। इसी प्रकार पीजीटी भर्ती में 1,711 पदों में से 1,672 पद खाली रहने का उन्होंने दावा किया।
सुरजेवाला ने कहा कि अगर प्रदेश में योग्य युवा मौजूद हैं और विभागों में हजारों पद खाली हैं, तो सरकार को यह जवाब देना चाहिए कि आखिर ये पद क्यों नहीं भरे जा रहे हैं।
*सुरजेवाला ने आरोप लगाया; भाजपा शासन में ‘युवाओं के सपनों को रौंदने का पैटर्न बन गया है’*
रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा के युवा सरकारी नौकरी के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार और गरीब परिवारों के बच्चे अपने घर की आर्थिक परिस्थितियों से लड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण इन युवाओं के सपने बार-बार टूट रहे हैं।
सुरजेवाला ने कहा कि “भर्ती का विज्ञापन युवाओं के लिए झुनझुना बन गया है और नियुक्ति का इंतजार उनकी मजबूरी। उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि सरकारी नौकरी केवल एक व्यक्ति की नौकरी नहीं होती, बल्कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के लिए पूरे परिवार के भविष्य की सुरक्षा होती है।
रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हाईकोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी कर नए सिरे से परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं। अब सरकार और एचपीएससी की जिम्मेदारी है कि अदालत के आदेश को पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं सरकार या एचपीएससी की ओर से फिर कोई नया तकनीकी या कानूनी पेंच खड़ा करके भर्ती प्रक्रिया को लंबा न खींच दिया जाए।
सुरजेवाला ने कहा कि युवा पहले ही वर्षों से इंतजार कर रहे हैं, अब उन्हें और इंतजार करवाना उनके साथ अन्याय होगा।
सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार यदि वास्तव में सामाजिक न्याय की बात करती है तो उसे एससी, बीसी -ए , बीसी-बी और EWS वर्ग के युवाओं को उनकी योग्यता और मेरिट के अनुसार उचित अवसर देना होगा।
उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का अर्थ केवल घोषणाएं करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि गरीब परिवार का बच्चा भी अपनी मेहनत के दम पर सरकारी नौकरी हासिल कर सके। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रदेश की सभी लंबित भर्तियों की समीक्षा की जाए, खाली पड़े पदों को शीघ्र भरा जाए और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हरियाणा का युवा अब केवल आश्वासन नहीं चाहता। युवा पूछ रहा है कि हजारों सरकारी पद खाली क्यों हैं, भर्ती प्रक्रिया में बार-बार बदलाव क्यों किए जाते हैं और नियुक्तियों में इतना लंबा समय क्यों लगता है।
सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा के युवाओं को विज्ञापन नहीं, रोजगार चाहिए। आश्वासन नहीं, नियुक्ति चाहिए और भेदभाव नहीं, न्याय चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी युवाओं, दलितों, पिछड़ों, गरीबों और वंचित वर्ग के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ती रहेगी। भाजपा सरकार को युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद करना होगा। हरियाणा के नौजवानों की मेहनत और उनके अधिकारों पर किसी को डाका डालने नहीं दिया जाएगा।







