50 हजार दीयों से रोशन होगा चंडीगढ़ का सेक्टर-17 प्लाजा, 100 कुम्हार परिवारों को मिलेगा रोजगार का सहारा

चंडीगढ़, 16 सितंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर चंडीगढ़ में इस बार दीपों की रोशनी के साथ स्थानीय कारीगरों और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी भी देखने को मिलेगी। नगर निगम चंडीगढ़ की ओर से ‘Sewa Sankalp Abhiyan’ के तहत 17 सितंबर को सेक्टर-17 प्लाजा में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान सेक्टर-17 प्लाजा को करीब 50 हजार पारंपरिक मिट्टी के दीयों से सजाने की तैयारी है। इसके साथ ही Self Help Groups यानी SHG से जुड़ी महिलाएं आकर्षक रंगोलियां तैयार करेंगी।
50 हजार दीयों से जगमगाएगा सेक्टर-17
17 सितंबर को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में सेक्टर-17 प्लाजा के अलग-अलग हिस्सों में मिट्टी के दीये जलाए जाएंगे। आयोजन के जरिए दीप प्रज्वलन के साथ स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक कारीगरी को भी सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
नगर निगम के मुताबिक कार्यक्रम को जनभागीदारी से जोड़ने की तैयारी की गई है, ताकि शहरवासी भी इसमें शामिल होकर दीप प्रज्वलित कर सकें।
100 कुम्हार परिवारों को सीधे जोड़ा गया
इस आयोजन की खास बात यह है कि मिट्टी के दीयों की व्यवस्था के लिए करीब 100 स्थानीय कुम्हार परिवारों को जोड़ा गया है।
इन परिवारों द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक दीयों के इस्तेमाल से स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए बाजार और आय का अवसर मिलने की उम्मीद है। नगर निगम इसे स्थानीय कला और आजीविका को प्रोत्साहन देने वाली पहल के रूप में पेश कर रहा है।
मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल हजारों दीयों से प्लाजा को रोशन करना नहीं है, बल्कि उन परिवारों तक भी आर्थिक सहयोग पहुंचाना है, जिनकी रोजी-रोटी पारंपरिक कारीगरी से जुड़ी है।
SHG की रंगोलियां बढ़ाएंगी आयोजन की खूबसूरती
कार्यक्रम में Self Help Groups की सदस्य महिलाएं भी सक्रिय भूमिका निभाएंगी। उनके द्वारा सेक्टर-17 प्लाजा में अलग-अलग डिजाइन की रंगोलियां तैयार की जाएंगी।
इससे आयोजन में स्थानीय लोककला और महिला सहभागिता का पहलू भी जुड़ेगा। नगर निगम का कहना है कि SHG सदस्यों की रचनात्मक भागीदारी कार्यक्रम को सामुदायिक स्वरूप देने में मदद करेगी।
‘Vocal for Local’ पर रहेगा जोर
मेयर सौरभ जोशी के अनुसार, ‘आशीर्वाद का दीया’ पहल में सेवा, स्वावलंबन और Vocal for Local की भावना को साथ लाने का प्रयास किया गया है।
उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर तैयार मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल करने से नागरिक सीधे तौर पर कुम्हारों और स्थानीय कारीगरों की आजीविका को समर्थन दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक मिट्टी के दीये के पीछे कारीगर का श्रम, कौशल और उसके परिवार की आय जुड़ी होती है।







