खेलो इंडिया का मेगा प्लान! ₹36,441 करोड़ का बजट, 27 हजार खिलाड़ियों को मिलेगा सपोर्ट; AI से होगी टैलेंट की पहचान
2026-31 के लिए खेलो इंडिया योजना का विस्तार, 30 खेलों पर फोकस; गांवों से एलीट स्तर तक खिलाड़ियों को कोचिंग, डाइट, मेडिकल और प्रतियोगिता सुविधाएं देने की तैयारी

जीरकपुर, 15 सितंबर 2026। भारत में खेल प्रतिभाओं को जमीनी स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए खेलो इंडिया योजना 2026-31 का नए स्वरूप में विस्तार किया गया है। इस चरण में खेलों के लिए बजट में करीब आठ गुना बढ़ोतरी और वित्तीय सहायता पाने वाले खिलाड़ियों की संख्या में लगभग दस गुना वृद्धि का प्रावधान किया गया है।
नई योजना का कुल बजट 36,441 करोड़ रुपये रखा गया है। इसके जरिए देश में खेल सुविधाओं, प्रतिभा पहचान, प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और खेल तकनीक को एक व्यापक नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इसका लक्ष्य 2036 ओलंपिक की तैयारियों के लिए मजबूत आधार तैयार करना भी है।
30 खेलों में 27 हजार खिलाड़ियों की तैयारी
योजना के तहत 30 प्राथमिकता वाले खेलों में 9,000 खेलो इंडिया एथलीट (KIA) और 18,000 इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट (E-KIA) तैयार किए जाएंगे।
चयनित खिलाड़ियों को उनकी जरूरत के मुताबिक कोचिंग, आवास, डाइट, खेल किट, यात्रा, मेडिकल सुविधाएं, शिक्षा और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

गांव और छोटे शहर बनेंगे प्रतिभा की नई नर्सरी
खेलो इंडिया के नए चरण में खासतौर पर गांवों और छोटे शहरों से कम उम्र की प्रतिभाओं को खोजने पर जोर दिया जाएगा। वैज्ञानिक परीक्षण, आधुनिक कोचिंग, खेल विज्ञान, AI आधारित प्रदर्शन विश्लेषण और बेहतर पोषण के जरिए खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है।
भारतीय खेल प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय जीरकपुर के क्षेत्रीय निदेशक (प्रभारी) शैलेन्द्र कुमार के मुताबिक, नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए संसाधनों की कमी उनकी प्रगति में बाधा न बने।
हाई-परफॉर्मेंस सेंटर और खेल सुविधाओं का विस्तार
योजना के तहत 18 प्राथमिकता वाले खेलों के लिए हाई-परफॉर्मेंस प्रशिक्षण सुविधाओं को विकसित और मजबूत किया जाएगा। 30 प्रमुख ओलंपिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेल विधाओं में मौजूदा खेल ढांचे का आकलन किया जाएगा।
जहां सुविधाओं में कमी मिलेगी, वहां मौजूदा केंद्रों को अपग्रेड करने या नई सुविधाएं तैयार करने पर काम किया जाएगा।
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की जरूरत के अनुसार जमीनी स्तर के खेल ढांचे को विकसित करने के लिए राज्य कार्ययोजनाओं को भी योजना से जोड़ा गया है। सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच 60:40 तथा पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 वित्तीय हिस्सेदारी का प्रावधान बताया गया है।
स्कूल और यूनिवर्सिटी लीग को मिलेगा बढ़ावा
खेल प्रतिभाओं को नियमित प्रतिस्पर्धा का मंच देने के लिए स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर नई लीग शुरू करने की योजना है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स और यूनिवर्सिटी गेम्स के साथ पैरा, विंटर, बीच, वाटर और ट्राइबल गेम्स जैसी प्रतियोगिताओं को भी मजबूत किया जाएगा।
महिला खिलाड़ियों के लिए ASMITA लीग और स्वदेशी खेलों, मार्शल आर्ट्स तथा पूर्वोत्तर के खेलों को भी व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।
सीमावर्ती और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने की भी योजना है।
कोचिंग सिस्टम में आएगा राष्ट्रीय मानक
खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षक उपलब्ध कराने के लिए नेशनल कोच एक्रेडिटेशन बोर्ड (NCAB) गठित किया जा रहा है।
इसके तहत कोचों के लिए L1 से L4 तक चार स्तरों वाली राष्ट्रीय मानक व्यवस्था, डिजिटल कोच रजिस्ट्री और सर्टिफिकेशन सिस्टम विकसित किया जाएगा। खेल वैज्ञानिकों और सपोर्ट स्टाफ की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
जीरकपुर क्षेत्र में पहले से मौजूद है बड़ा प्रशिक्षण नेटवर्क
साई क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ के अंतर्गत फिलहाल 2 नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, 6 SAI ट्रेनिंग सेंटर, 46 खेलो इंडिया मान्यता प्राप्त अकादमियां, 6 खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 152 से अधिक खेलो इंडिया सेंटर संचालित होने की जानकारी दी गई है।
खेलो इंडिया 3.0 के बाद इस नेटवर्क के और विस्तार की योजना है। इसका मकसद स्थानीय खिलाड़ियों को शुरुआती और उन्नत प्रशिक्षण के लिए दूर जाने की जरूरत कम करना है।
AI से होगी प्रतिभा की पहचान, ‘खेल सेतु’ बनेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म
खेलों में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए ‘खेल सेतु’ नामक AI आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। इसमें यूनिफाइड एथलीट आईडी, टैलेंट स्काउटिंग, प्रदर्शन संबंधी आंकड़े, प्रतियोगिता प्रबंधन और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं शामिल की जाएंगी।
AI और वीडियो आधारित प्रतिभा खोज, IoT वियरेबल्स, खेल विज्ञान तथा प्रदर्शन विश्लेषण के जरिए खिलाड़ी की यात्रा को डिजिटल रूप से ट्रैक करने की योजना है।
इसके साथ ही 10 खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय, 500 फीडर स्कूल और 2,500 खेलो इंडिया केंद्र विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
फिट इंडिया अभियान को भी मिलेगा विस्तार
खेलो इंडिया के साथ Fit India Movement को भी बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। सामुदायिक फिटनेस केंद्र, योग, पारंपरिक खेल और जनभागीदारी के जरिए फिटनेस को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने पर जोर रहेगा।
महिलाओं और दिव्यांगजनों की खेलों में भागीदारी बढ़ाने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे।
क्यों अहम है खेलो इंडिया का नया चरण?
खेलो इंडिया योजना का फोकस अब केवल खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा। नई व्यवस्था में प्रतिभा की पहचान से लेकर प्रशिक्षण, पोषण, खेल विज्ञान, प्रतियोगिता और डिजिटल ट्रैकिंग तक पूरी प्रक्रिया को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
यह बदलाव खासतौर पर उन खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जिन्हें बड़े शहरों या महंगे निजी प्रशिक्षण संस्थानों तक पहुंच नहीं मिल पाती।
खिलाड़ियों को क्या फायदा होगा?
नई योजना लागू होने के बाद ज्यादा खिलाड़ियों को आर्थिक और तकनीकी सहायता मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर पर ही बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
वहीं AI आधारित स्काउटिंग और प्रदर्शन विश्लेषण से प्रतिभा पहचान की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक बनाने का लक्ष्य है। बेहतर कोचिंग, पोषण, मेडिकल सपोर्ट और प्रतियोगिताओं के अवसर मिलने से खिलाड़ियों को लंबे समय तक खेल में बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, खेलो इंडिया योजना 2026-31 का नया ढांचा भारत में खेल प्रतिभा तैयार करने की प्रक्रिया को गांव से लेकर एलीट स्तर तक जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।







