चंडीगढ़ में ‘काव्य मुकुल’ साहित्यिक गोष्ठी, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की रचनाओं को किया याद

चंडीगढ़, 13 सितंबर। सामाजिक संगठन गुदगुदी जंक्शन समूह के साहित्यिक मंच ‘अक्षरम्’ पंचकूला शाखा की ओर से सेक्टर-48 ए स्थित पंचम एनक्लेव में शनिवार शाम साहित्यिक गोष्ठी ‘काव्य मुकुल’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम हिन्दी गद्य लेखन के जनक एवं आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की जयंती को समर्पित रहा।
गुदगुदी जंक्शन के ट्राइसिटी सर्कल, चंडीगढ़ के प्रवक्ता भारत भूषण गुप्ता ने बताया कि गोष्ठी में 12 साहित्यकारों ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के साहित्यिक योगदान और उनकी रचनाओं में दिखाई देने वाले राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सरोकार तथा राष्ट्रीय चेतना पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की मेजबानी ‘अक्षरम्’ पंचकूला शाखा के प्रभारी मुरारी लाल अरोड़ा ‘आजाद’ ने की। आयोजन का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुरुक्षेत्र से समूह अध्यक्ष चंद्रमौलि गौड़ ने की। इसके बाद उपस्थित साहित्यकारों ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। साहित्यकारों के परिचय के बाद गोष्ठी का विधिवत शुभारंभ हुआ।
साहित्यिक विरासत को बचाने के लिए ऐसे आयोजन जरूरी
अध्यक्षीय संबोधन में चंद्रमौलि गौड़ ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में साहित्यिक विरासत को सहेजना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी उन रचनाकारों के विचारों और कृतियों से परिचित हो सकती है, जिन्होंने हिन्दी साहित्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद हरियाणा की उपाध्यक्ष डॉ. संतोष गर्ग ने कहा कि आधुनिक हिन्दी साहित्य के पितामह कहे जाने वाले भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने अल्पायु में ही साहित्य की अनेक विधाओं में उल्लेखनीय लेखन किया। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक बुराइयों पर प्रहार किया और समाज को जागरूक करने का प्रयास किया।
राष्ट्रप्रेम और सामाजिक सुधार का प्रमुख माध्यम बना साहित्य
‘अक्षरम्’ अम्बाला शाखा के प्रभारी जगमाल सिंह राणा ने कहा कि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने अंग्रेजी शासन के दौर में देश की दयनीय सामाजिक परिस्थितियों और तत्कालीन समस्याओं को अपनी लेखनी में स्थान दिया। राजा हरिश्चन्द्र के सत्य और त्याग पर आधारित उनके पौराणिक नाटक को भी व्यापक प्रसिद्धि मिली। उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ-साथ सामाजिक सुधार और स्त्री शिक्षा के प्रति समर्थन की भावना दिखाई देती है।
‘अक्षरम्’ यमुनानगर शाखा की प्रभारी वर्षा रानी ने कहा कि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के साहित्य में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय चेतना प्रमुख रूप से दिखाई देती है। उनकी भाषा में सहजता और मुहावरेदार शैली के साथ व्यंग्य का प्रभाव भी मिलता है। उन्होंने प्रकृति का चित्रण भी सरल एवं प्रभावशाली भाषा में किया। उनके साहित्य ने समाज में स्वदेश प्रेम और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने में योगदान दिया।
रचनाओं की प्रस्तुति से साहित्यिक वातावरण हुआ जीवंत
गोष्ठी के दौरान मुरारी लाल अरोड़ा ‘आजाद’ ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की रचना ‘परदे में कैद औरत की गुहार’ का उल्लेख करते हुए तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों को सामने रखा।
इसके बाद कवयित्री दर्शना पाहवा, गणेश दत्त बजाज, बलवान सिंह मानव, अम्बाला से कवयित्री अंजली सिफ़र और सूबेदार लाभ भारद्वाज सहित साहित्यकारों ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की रचनाओं और उनकी साहित्यिक भावभूमि से जुड़ी पंक्तियों की प्रस्तुति दी।
कवयित्री दर्शना पाहवा ने प्रेम विषयक पंक्तियों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी, जबकि गणेश दत्त बजाज ने जीवन और मृत्यु के दार्शनिक पक्ष को रेखांकित किया। बलवान सिंह मानव ने गीत की प्रस्तुति दी। अंजली सिफ़र ने कृष्ण भक्ति से जुड़ी रचना प्रस्तुत की, वहीं सूबेदार लाभ भारद्वाज की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में भावनात्मक रंग भर दिया।
इसके अतिरिक्त मोहाली से संजय मल्होत्रा, जीरकपुर से सुभाष पाहवा और कृष्ण कुमार बत्रा ने भी अपने संबोधन के माध्यम से भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को नमन किया।
कार्यक्रम में सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को हिन्दी साहित्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।







