Chaupal

Chaupal : हरियाणा की चौपाल से राजनीति, फैसले और ताज़ा हलचल

हरियाणा की चौपाल

बड़े साहब का ‘बड़ा’ फैसला

नू तो हरियाणा ही नहीं हर प्रदेश की सरकार अपने लोगां खातर ढेर सारी स्कीमा चलावा है, पर इनमें सवाल यो उठा है कि जनता ने कौन सी स्कीम का फायदा मिला है…चलो हम इन बाता मैं ना पड़दे होए अपने हरियाणा की सरकार के बड़े साहब की बात करांगे। यू तो हरियाणा सरकार के बड़े साहब अरे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बारे मा तो हर कोई जाने सै। अपने मिलनसार और हंसते चेहरे के कारण वो पहले तै ही सारया के पसंदीदा मुख्यमंत्री है। अपने किसी ना किसी फैसले नू लेकर सरकार के बड़े साहब हमेशा जनता के बीच चर्चा में रहैवा है। इब इन बड़े साहब अरे भाई मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक और बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने फैसला लिया है कि हरियाणा में प्रदेश सरकार एक लाख युवाओं को एआई का प्रशिक्षण दिलाएगी। इसके अलावा 100 से अधिक स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया जाएगा। लगभग 474 करोड़ की महत्वाकांक्षी पहल को विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग से पीपीपी माडल पर लागू किया जा रहा है। प्रोग्राम की प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट भारत सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा अनुमोदित की जा चुकी है। कार्यक्रम की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट आगामी जून तक प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। इस खातर विश्व बैंक मिशन टीम भी दौरा कर चुकी है। सरकार की हरियाणा में दो प्रमुख एआई केंद्र स्थापित करने की योजना है। पंचकूला में सा टेक्नोलाजी पावर आफ इंडिया के सहयोग से हरियाणा एडवांस्ड कंप्यूटिंग फैसिलिटी स्थापित की जाएगी। इसके अलावा गुरुग्राम में नासकोम के सहयोग से ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर स्थापित किया जाएगा, जो स्टार्टअप इनक्यूबेशन एवं उद्योग सहयोग को बढ़ावा देगा। यो कार्यक्रम हरियाणा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

पंजे वाले दल के बेचारे !

आजकल हरियाणा की राजनीतिक चौपालों में एक मामला बतहेरी चर्चा में है। आप भी जानते ही होंगे कि कांग्रेस ने हरियाणा में अपने पांच विधायकों को निलंबित कर दिया है। इब हर कोई यो जानना चाहवा सै कि इन विधायका का के होवेगा। चौपालों में चर्चा है कि क्या इन विधायकों की सदस्यता रद्द होगी या फिर ये भाजपा में जावैंगे या के होवेगा। हमनै भी इन बातों को लेकर प्रदेश की कई राजनीतिक चौपालों का दौरा किया। फेर समझ में आई पूरी बात…चलो आपने भी समझांवे पूरा माजरा….दअरसल, हरियाणा में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग के आरोप में कांग्रेस ने पांच विधायकों को निलंबित किया है। कांग्रेस द्वारा जिन पांच विधायकों को निलंबित किया गया है, उनके मामले में “पार्टी कार्रवाई” और “संवैधानिक स्थिति” अलग-अलग स्तर पर काम करेगी। पांचों कांग्रेस विधायकों के राजनीतिक भविष्य के कई पहलू हैं। कांग्रेस ने भले ही पांचों विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया, लेकिन विधानसभा में उनकी सदस्यता अथवा विधायक पद को कोई खतरा नहीं है। उनका पद तभी खतरे में होगा, यदि वे खुद कांग्रेस पार्टी छोड़ते हैं अथवा किसी दूसरे दल में शामिल होते हैं या फिर कांग्रेस की याचिका पर स्पीकर इन कांग्रेस विधायकों पर लगे आरोपों को सही मानते हैं। विधानसभा में कांग्रेस यदि कोई व्हिप (अनिवार्य आदेश) जारी करती है, तो इन निलंबित विधायकों को उसे हर हाल में मानना होगा। किसी महत्वपूर्ण बिल पर वोटिंग की स्थिति में पार्टी व्हिप जारी करती है। आमतौर पर निलंबन की स्थिति में कांग्रेस विधायक दल या पार्टी की मीटिंग में इन विधायकों को नहीं बुलाया जाएगा। फिलहाल निलंबित पांचों विधायकों के पद पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कांग्रेस पार्टी से निलंबन का मतलब यह नहीं है कि उनकी विधानसभा की सदस्यता खत्म हो गई। पांचों कांग्रेस विधायक विधानसभा के पूर्ण सदस्य बने रहेंगे और सदन की गतिविधियों में भाग ले सकेंगे।यानी संविधान के तहत वे अभी भी “विधायक” हैं, जब तक कि विधानसभा से अलग से अयोग्यता (डिसक्वालाइफाइ) नहीं हो जाते। दसवीं अनुसूची के तहत, अगर कोई विधायक पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट करता है, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है, लेकिन राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता। ऐसे में वह कांग्रेस के विधायक रहेंगे और उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा। अगर कांग्रेस पार्टी इन विधायकों के विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के पास याचिका दाखिल करती है तो स्पीकर उसकी जांच करेंगे। स्पीकर यह फैसला करेंगे कि पांचों विधायकों पर जो आरोप लगाए गए हैं, वह सही हैं या गलत हैं। अगर स्पीकर उन्हें दोषी मानते हैं तो पांचों विधायकों की विधानसभा से सदस्यता जा सकती है, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता या केस साबित नहीं होता तो स्पीकर इन विधायकों के साथ निर्दलीय जैसा व्यवहार कर सकते हैं, हालांकि औपचारिक रूप से सीट कांग्रेस पार्टी की ही रहेगी।

इब शहर की सरकार भी करेगी संकल्प !

इन हरियाणा के विधानसभा चुनाव तो सारया ने याद ही होवैंगे। फुल वाले दल ने इस टैम पै एक संकल्प पत्र जारी किया था, जिसमें प्रदेश खातर काम करने की योजनाएं थी। इब फुल वाला दल उस तरहा का ही एक और संकल्प पत्र लेकर आन वाला सै। दअरसल, हरियाणा के कुछ शहरा मैं लोकल बॉडी यानि कमेटी, नगर निगम के चुनाव होने है। इब जब हरियाणा सरकार के सारे मंत्री डबल इंजन सरकार कहंदे फिरा है, यो कुछ दिन में ट्रिपल इंजन सरकार कहंदे सुनाई देंगे। अर फुल वाले दल ने इसे लेकर अपनी रणनीति भी बना ली है। दअरसल, भारतीय जनता पार्टी हरियाणा ने नगर निकाय चुनाव-2026 की तैयारियों को गति देते हुए राज्य स्तर पर संकल्प पत्र निर्माण समिति का गठन कर दिया है। पार्टी का कहना है कि यह समिति शहरी विकास, स्वच्छता, आधारभूत सुविधाओं और नागरिक सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर व्यापक सुझाव लेकर चुनावी घोषणापत्र तैयार करेगी। संगठन के बड़े साहब यानि प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली की ओर से जारी लेटर के अनुसार, समिति में सरकार और संगठन के अनुभवी नेताओं को शामिल किया गया है, ताकि स्थानीय निकायों से जुड़े जमीनी मुद्दों को प्राथमिकता दी जा सके। निकाय चुनाव को लेकर बनाई गई कमेटी का फोकस कुछ प्रमुख विषयों पर रहने वाला है। पहला शहरी क्षेत्रों में साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन। दूसरा- पीने का पानी, सीवरेज और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं। तीसरा- डिजिटल सेवाओं और नागरिक सुविधाओं का विस्तार और चौथा- स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति और राजस्व बढ़ाने के उपाय हैं। राजनीतिक चौपालों पर होने वाली चर्चा को माने तो यह समिति जल्द ही विभिन्न शहरों और वार्ड स्तर से सुझाव एकत्र कर नगर निकाय चुनाव-2026 के लिए विस्तृत और जनहित आधारित संकल्प पत्र तैयार करेगी। इसे चुनाव से पहले सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि मतदाताओं के सामने पार्टी का स्पष्ट रोडमैप रखा जा सके।

इब ये के हो गया…?

इब तक तो हरियाणा में आम लोग ही पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने के साथ ही धमकाने और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते थे। पर इब तो हरियाणा सरकार में छोटे साहब रहे नेता जी ने भी बड़े आरोप लगा दिए है। छोटे साहब नहीं समझे..अरे भाई बड़े साहब यानि मुख्यमंत्री के बाद उप मुख्यमंत्री। इब तो आप समझ ही गए होंगे कि हम इसी भाजपा सरकार के पूर्व के कार्यकाल में उप मुख्यमंत्री रहे दुष्यंत चौटाला की बात कर रहे है। दअरसल, हिसार में गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी में कुछ विवाद चल रहा है। इसी विवाद के बीच पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने उन पर पिस्टल तान दी…हालांकि इस घटना का वीडियो भी सामने आया है…दुष्यंत ने कहा कि सब्जी मंडी पुल पर पुलिस की एक गाड़ी से सादी वर्दी में एक पुलिसकर्मी ने उन पर पिस्टल तान दी। अर मामले का जो वीडियो सामने आया है, उसमें दिखाई दे रहा है कि एक पुलिस की गाड़ी दुष्यंत चौटाला की एस्कॉर्ट गाड़ी के सामने खड़ी है। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी हाथ में पिस्टल लेकर धमकाता हुआ नजर आ रहा है, जैसे ही दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला वहां पहुंचते हैं, वह पुलिसकर्मी तुरंत गाड़ी में बैठ जाता है। बताया जा रहा है कि दुष्यंत चौटाला ने गाड़ी पर चढ़कर उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मी गाड़ी को लेकर वहां से निकल गए। आपनै बता दें कि इस पूरे विवाद के बीच हिसार पुलिस ने मामले में जजपा के युवा अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला समेत कई कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज किया है। हालांकि हिसार के एसपी ने दुष्यंत चौटाला के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सामने आए वीडियो में मारपीट जैसी कोई स्पष्ट घटना नजर नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत मिलती है तो पुलिस उचित कार्रवाई करेगी।

 

मुख्यमंत्री के घर में एक ही शेर !

असल में इस टाइटल को पढ़कर आप भी सोच रहे होंगे की शायद मुख्यमंत्री नायब सैनी के घर में जंगल वाला कोई शेर है। जी नहीं, मुख्यमंत्री सैनी के घर में जंगल वाला नहीं, असल में पति-पत्नी में कौन शेर है, हम उसकी बात कर रहे हैं। यह हम अपनी ओर से नहीं, बल्कि खुद मुख्यमंत्री का घर चलाने और संभालने वाली उनकी धर्मपत्नी सुमन सैनी के मुख से निकले शब्द ब्यां कर रहे हैं। दअरसल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पत्नी सुमन सैनी करनाल में नारी शक्ति वंदन पदयात्रा के एक कार्यक्रम में पहुंची थी। उसी दौरान उनके एक मजाकिया बयान ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। असल में कार्यक्रम के दौरान मंच संचालक के सवाल ‘घर में किसकी चलती है’ पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि जहां चलानी होती है, वहां 100 प्रतिशत चलती है, और जहां नहीं, वहां चुप रहना पड़ता है, क्योंकि जंगल में शेर एक ही होता है।

…लोजी इन बड़े साहब की फेर बढ़ी मुश्किलें

हरियाणा सरकार में पूर्व में बड़े साहब रहे और विधानसभा में अभी भी अपनी पार्टी के बड़े साहब बने हुए भूपेंद्र हुड्डा की मुश्किलें फिर से बढ़ती दिखाई दे रही हैं। दअरसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ हरियाणा सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पंचकूला के इंडस्ट्रियल प्लॉट आवंटन घोटाले में सीबीआई की ओर से मुकदमा चलाने की मांग को राज्य सरकार ने अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह मामला साल 2013 का है, जब हुड्डा मुख्यमंत्री के पद पर आसीन थे। आरोप है कि 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने पद का दुरुपयोग कर अपने करीबियों, रिश्तेदारों और परिचितों को कौड़ियों के दाम पर ये प्लॉट आवंटित किए थे। इस मामले में 2016 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सीबीआई ने इस साल फरवरी में सरकार से हुड्डा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की अनुमति मांगी थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है। हुड्डा के साथ-साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के दो तत्कालीन अधिकारियों, पूर्व मुख्य वित्त नियंत्रक एससी कंसल और पूर्व उप अधीक्षक बीबी तनेजा के खिलाफ भी मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी गई है। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार हुड्डा के खिलाफ मुकदमा चलाने की फाइल अब अंतिम चरण में है। चौपाल पर चर्चा है कि मुख्य सचिव के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को भेज दिए गए हैं। जैसे ही वहां से अंतिम मोहर लगेगी, सीबीआई कोर्ट में भूपेंद्र सिंह हुड्डा, तत्कालीन सरकारी अफसरों और अवैध रूप से प्लॉट पाने वाले लाभार्थियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर देगी। आपनू यो भी बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय जिसे ईडी कहा है वो इस मामले में 2021 में ही अपना आरोपपत्र दाखिल कर चुका है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को इस पूरे खेल का ‘मास्टरमाइंड’ बताया गया है। ईडी का दावा है कि हुड्डा ने न केवल इस घोटाले की योजना बनाई, बल्कि अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए चयन के नियमों को ताक पर रख दिया। जांच एजेंसी ने उन 14 लोगों की सूची भी दी है, जिन्हें ये प्लॉट मिले और जिनका सीधा संबंध हुड्डा परिवार या उनके करीबियों से था।

 

हरियाणा में एक और दाव खेलेगी ‘AAP’

हरियाणा के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह से हार का सामना कर चुकी आम आदमी के नाम से बनी पार्टी इब एक बार फिर तै चुनावी दंगल में उतरन नू तैयार है। दअरसल, आम आदमी पार्टी की हरियाणा इकाई के प्रमुख सुशील गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी पंचकुला, अंबाला और सोनीपत में नगर निगम चुनाव लड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि लोग भाजपा और कांग्रेस से तंग आ चुके हैं एवं बदलाव की तलाश में हैं। गुप्ता ने बताया कि उन्होंने हाल में यहां आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की और हरियाणा में नगर निकाय चुनावों एवं राज्य के समक्ष मौजूद अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पार्टी पंचकुला, अंबाला और सोनीपत, तीनों नगर निगमों के चुनाव लड़ेगी क्योंकि वह हरियाणा में एक ‘मजबूत और ईमानदार’ विकल्प के रूप में उभरी है। उन्होंने कहा कि महापौर से लेकर वार्ड पार्षदों तक, आम आदमी पार्टी ईमानदार, निष्ठावान, शिक्षित और समर्पित उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगी। उन्होंने कहा कि जनता भाजपा और कांग्रेस की जाति, धर्म और छल की राजनीति से तंग आ चुकी है। आपनू बता दें कि हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग ने सोमवार को घोषणा की थी कि पंचकुला, अंबाला और सोनीपत नगर निगमों तथा अन्य नगर निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं के लिए 10 मई को चुनाव होंगे। वोटों की गिनती 13 मई को होगी।

 

रोडवेज में खुले पैसे के झंझट से मिलेगा छुटकारा

हरियाणा रोडवेज की बसों में यात्रियों को टिकट के भुगतान के लिए अब डिजिटल सुविधा मिलने जा रही है। परिवहन विभाग ने रोडवेज बसों में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानि यूपीआई के जरिए भुगतान की व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत प्रदेश के किसी एक जिले से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की जाएगी, जिसके सफल होने के बाद इसे सभी जिलों और डिपो में लागू कर दिया जाएगा। चौपालों पर चल रही चर्चा को माने तो रोडवेज बसों में भुगतान से संबंधित तकनीकी कार्य लगभग पूरा हो चुका है और अब इसे जल्द जमीन पर उतारा जाएगा। परिवहन मंत्री अनिल विज ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि यात्रियों को बिना किसी परेशानी के डिजिटल भुगतान की सुविधा मिल सके। रोडवेज बसों में यूपीआई से भुगतान की व्यवस्था पहले किसी एक जिले में शुरू की जाएगी। वहां से मिले अनुभव और फीडबैक के आधार पर इस सिस्टम को अन्य जिलों के डिपो और बसों में लागू किया जाएगा। विभाग का मानना है कि पायलट प्रोजेक्ट के जरिए तकनीकी और संचालन संबंधी कमियों को पहले ही दूर किया जा सकेगा। परिवहन विभाग का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राजस्व संग्रहण में भी पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हरियाणा रोडवेज की सभी बसों में आधुनिक डिजिटल भुगतान प्रणाली पूरी तरह लागू हो जाए।

इब ना चालैगा लिव-इन !

हरियाणा में जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में डिजिटल जनगणना शुरू हो गई है। इस नई व्यवस्था का शुभारंभ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया। सरकार का दावा है कि डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से जनगणना पहले की तुलना में अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी होगी। खास बात यह है कि इस बार जनगणनाकर्मी मोबाइल ऐप और टैबलेट के जरिए सीधे ऑनलाइन डेटा दर्ज करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमारी जनगणना हमारा विकास का नारा दिया है। जो लोग स्व-गणना नहीं करेंगे, वे पारंपरिक तरीके से सरकारी कर्मचारी के घर आने पर डेटा दे सकते हैं। जिन्होंने ऑनलाइन फॉर्म भरा है, उनका डेटा वेरिफाई करने के लिए भी सरकारी कर्मचारी उनके घर जाएंगे। इब आपना यो जानना जरूरी है कि आप किन सवाला का जवाब ना दें, कर्मचारी अगर ये 3 सवाल पूछें तो जवाब न दें, मसलन महीने की कमाई या बैंक बैलेंस से जुड़ा कोई भी सवाल। आधार, पैन या कोई भी अन्य पहचान पत्र दिखाने का दबाव। बैंक खाता नंबर या ओटीपी जैसे निजी विवरण। इनका जवाब कतई ना दें। इसके अलावा किसी के साथ लिव इन में रह रहे हैं तो ऐसे जोड़े को जनगणना में ‘विवाहित युगल’ माना जाएगा। साथ ही यदि आपके मोबाइल में एफएम है तो उसे ‘रेडियो’ गिना जाएगा। मोबाइल पर यूट्यूब देखना ‘टीवी’ नहीं माना जाएगा, इसके लिए टीवी होना जरूरी है।

 

‘गब्बर’ का ‘दबंग’ फैसला

हरियाणा के ‘दबंग’ के अलावा ‘गब्बर’ और ‘बाबा’ कहलाए जाने वाले मंत्री अनिल विज के पास गृह विभाग नहीं होने से जहां आम जनता को सरकार के साथ पुलिस विभाग से शिकायतें बढ़ी है। वहीं, उनके पास मौजूद विभागों को लेकर जनता की उनसे काफी उम्मीदें है। ऐसे में अनिल विज भी यह कोशिश करते हैं कि उनके विभाग के कर्मचारियों के साथ ही आम जनता को भी कोई दिक्कत ना हो। इसे लेकर हाल ही में गब्बर ने एक दबंग फैसला लिया। चौपालों पर विज के इस फैसले की खूब चर्चा है। दअरसल, अनिल विज ने अब बिजली विभाग के अधिकारियों को बिजली आपूर्ति की समय सीमा में बांध दिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि शहरी क्षेत्रों में अधिकतम दो घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चार घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति में संबंधित बिजली अधिकारियों विशेष रूप से अधीक्षण अभियंता (एसई) जिम्मेदार होंगे, जिनके विरुद्ध निलंबन तक की कार्रवाई संभव होगी। अनिल विज का कहना है कि ज्य में बिजली की कोई कमी नहीं है, इसलिए प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने घोषणा की कि सरकारी भवनों में सोलर सिस्टम तथा पीएम सूर्य घर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान पर आने वाले सर्कल को अवॉर्ड दिया जाएगा।

Author

  • Rashtr Khabar

    A passionate and truth-driven news reporter with a keen eye for detail and a commitment to ethical journalism. I specialize in delivering accurate, timely, and engaging news that informs the public and strengthens trust in media.

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