DA बकाया मामले में पंजाब सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, मुख्य सचिव को फिर तलब किया
कोर्ट ने पूछा- सुप्रीम कोर्ट में अपील की स्थिति क्या है? कल सुबह 10 बजे मुख्य सचिव को दोबारा व्यक्तिगत पेशी के आदेश

चंडीगढ़, 5 अक्टूबर: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) के बकाया भुगतान से जुड़े मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब के मुख्य सचिव स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। कोर्ट ने DA से जुड़े मामले में सरकार की ओर से बार-बार समय लिए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई।
सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार, लेकिन कदम क्यों नहीं उठाया?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार के पास मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का कानूनी अधिकार था। हालांकि, अदालत ने सरकार की ओर से इस दिशा में उठाए गए कदमों को लेकर सवाल खड़े किए।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले में लगातार समय मांगने की स्थिति स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया के साथ किसी तरह का ‘लुका-छिपी का खेल’ नहीं चल सकता।
हाईकोर्ट ने मांगी सुप्रीम कोर्ट अपील की स्टेटस रिपोर्ट
अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई अपील की मौजूदा स्थिति से संबंधित रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश की जाए।
कोर्ट ने रजिस्ट्री को कल तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार की अपील किस स्थिति में है और उस पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
मुख्य सचिव की फिर होगी व्यक्तिगत पेशी
हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव को मामले की अगली सुनवाई में एक बार फिर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। उन्हें कल सुबह 10 बजे अदालत में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।
इस आदेश के बाद अब अगली सुनवाई में सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील और DA बकाया भुगतान से जुड़े पूरे मामले की स्थिति पर जवाब महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है DA बकाया भुगतान का मामला?
पंजाब सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते से संबंधित बकाया भुगतान का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। कर्मचारियों के बकाया वित्तीय लाभ और सरकार की ओर से उन पर लिए गए निर्णयों को लेकर मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा। इसी क्रम में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार से मामले की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया।
अब अदालत का रुख यह संकेत दे रहा है कि मामले में अनावश्यक देरी या अस्पष्टता को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा जा रहा है।







