हरियाणा के 10,757 अतिथि शिक्षकों को बड़ा झटका! नियमित करने से सरकार का इनकार, सुरजेवाला ने नायब सैनी को घेरा

चंडीगढ़, 3 नवंबर 2026। हरियाणा में अतिथि शिक्षकों की नियमित नौकरी की मांग को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। प्रदेश के 10,757 अतिथि शिक्षकों को नियमित करने से सरकार के इनकार के मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को निशाने पर लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार पर शिक्षकों के भविष्य के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है।
सुरजेवाला का कहना है कि सरकार एक तरफ अतिथि शिक्षकों को 58 वर्ष की उम्र तक सेवाएं जारी रखने का भरोसा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा देने और नौकरी की स्थायी सुरक्षा प्रदान करने से पीछे हट रही है। उन्होंने इसे प्रदेश के हजारों शिक्षकों की उम्मीदों के साथ धोखा करार दिया।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद नियमितीकरण पर सवाल
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 25 मई 2026 को अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण से जुड़े दावों पर 18 जून 2014 की नीति के तहत विचार करने के निर्देश हरियाणा सरकार को दिए थे।
कांग्रेस नेता का आरोप है कि सरकार ने अदालत के निर्देशों की भावना के अनुरूप शिक्षकों को राहत देने के बजाय नियमितीकरण से इनकार कर दिया। उन्होंने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव की ओर से जारी स्पीकिंग ऑर्डर का हवाला देते हुए कहा कि सरकार का रुख स्पष्ट है कि अतिथि शिक्षकों को नियमित नहीं किया जाएगा।
नायब सैनी सरकार पर सुरजेवाला का तीखा हमला
सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी रोजगार देने के मामले में गंभीर नहीं है। उनके मुताबिक, कच्ची नौकरी के नाम पर युवाओं को लंबे समय तक असुरक्षा में रखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षक वर्षों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। कांग्रेस नेता ने इसे भाजपा की रोजगार नीति की विफलता बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
शिक्षकों के हजारों पद खाली होने का भी उठाया मुद्दा
कांग्रेस सांसद ने हरियाणा की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका दावा है कि प्राइमरी से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) स्तर तक हजारों पद रिक्त पड़े हैं।
उन्होंने सवाल किया कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत है, तब वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों को स्थायी सुरक्षा देने से सरकार क्यों बच रही है? सुरजेवाला के अनुसार, शिक्षकों की कमी का सीधा असर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा पर पड़ सकता है।







