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विकसित भारत-जी राम जी एक्ट पर दुष्प्रचार कर रहे कांग्रेस और इंडी गठबंधन – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

चंडीगढ़, 5 जनवरी — हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विकसित भारत- जी राम जी एक्ट पर विपक्षी पार्टियों द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश और राज्य की जनता कांग्रेस और इंडी गठबंधन नेताओं का चेहरा और चरित्र भली-भांति पहचान चुकी है। लगातार झूठ बोलने की आदत ने इन दलों को राजनीतिक रूप से अविश्वसनीय बना दिया है और अब जनता उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेती। कांग्रेस पार्टी और इंडी गठबंधन के नेता मनरेगा श्रमिकों को गुमराह करने के लिए बार-बार झूठे बयान दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी कांग्रेस के पास कोई तर्क या ठोस सुझाव नहीं होता, वह झूठ और भ्रम फैलाने का सहारा लेती है। उन्होंने कहा कि गरीबों के कल्याण के लिए लाई गई हर नई योजना और सुधार पर कांग्रेस, यूपीए और इंडी गठबंधन के नेता सवाल उठाना शुरू कर देते हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कांग्रेस के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कोई वास्तविक सुझाव होते, तो वे लोकसभा में देते, लेकिन उनके पास न सुझाव हैं, न कोई जवाब। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चर्चा से भागती है और सदन से वॉक आउट कर जाती है। यही रवैया हरियाणा विधानसभा में भी देखने को मिलता है, जहाँ कांग्रेस नेता बिना तैयारी के आते हैं, प्रस्ताव लाते हैं और फिर वॉक आउट करते हैं। फिर जनता के बीच जाकर भ्रम फैलाते हैं।

 

कांग्रेस-आप का ‘बुआ- फूफड़’ वाला रिश्ता

विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) एक्ट, 2025 पर जल्दबाजी में प्रस्ताव पास करने के लिए पंजाब सरकार पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 30 दिसबंर को पंजाब विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव में न तो कोई आंकड़ा है और न ही कोई तथ्य। यह शुद्ध राजनीतिक प्रस्ताव है।

उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को कोई भी प्रस्ताव पास करने से पहले एक्ट को ठीक से पढ़ लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का ‘बुआ- फूफड़’ जैसा रिश्ता है। पंजाब को यदि प्रस्ताव ही पारित करना था तो यह प्रस्ताव पास करते कि पंजाब में भी हरियाणा की तरह 400 रुपये मजदूरी मिले, जबकि पंजाब में अभी मजदूरी 339 रुपये है।

 

उन्होंने कहा कि ऐसे ही प्रस्ताव पास करना तथ्यों, आंकड़ों या गंभीरता के बिना सिर्फ एक राजनीतिक स्वार्थ प्राप्त करने का तरीका है। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियां जानबूझकर करोड़ों ग्रामीण मजदूरों और किसानों की आजीविका से जुड़े मुद्दे पर जनता को गुमराह कर रही है।

 

उन्होंने इंडी गठबंधन को चुनौती देते हुए कहा कि वे देश के श्रमिकों को बताएं कि उनके शासनकाल में कौन-सी सुविधाएं थी, कितना भ्रष्टाचार हुआ और क्यों पैसा मजदूरों तक नहीं पहुँचता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि झूठी बयानबाजी करने के बजाय कांग्रेस को अपने कार्यकाल का सच जनता के सामने रखना चाहिए।

 

कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचार का पर्याय बन गया था मनरेगा

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वर्ष 2013 की सी.ए.जी. रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि यू.पी.ए. शासन के दौरान, योजना में फर्जी लाभार्थियों की भरमार थी और केवल धन की हेराफेरी के उद्देश्य से लाभार्थियों की सूची में हेराफेरी की गई थी। यह इसलिए संभव हुआ, क्योंकि मनरेगा योजना में कोई बायोमेट्रिक जांच नहीं थी, न ही इस बात की कोई निगरानी प्रणाली थी कि कौन मजदूर के रूप में पंजीकरण करा रहा है और क्या वास्तव में पंजीकृत मजदूर ही वह व्यक्ति था, जिसे मेहनत का फल मिल रहा था।

 

नायब सिंह सैनी ने कहा कि केंद्र में यूपीए शासन के दौरान मनरेगा एक ऐसी योजना बनकर रह गई थी, जिसका उद्देश्य केवल गड्ढे खोदना और उन्हें भरना था। यानी, यह टिकाऊ और स्थायी संपत्ति बनाने की योजना नहीं, बल्कि धन की मांग करने और भ्रष्टाचार में लिप्त होने के लिए किसी प्रकार की परियोजना को दिखाने का एक साधन मात्र बन गई थी। यह नीति “परिणाम” देने की बजाय “मानव-दिवस” उत्पादन करने की नीति बनकर रह गई थी।

 

पंजाब में मनरेगा के तहत मजदूरी का नहीं हुआ भुगतान

मुख्यमंत्री ने पंजाब से संबंधित एक उदाहरण देते हुए बताया कि जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब का दौरा किया, तो मजदूरों ने शिकायत की कि उन्हें मनरेगा के तहत उनका हक नहीं मिल रहा है और ठेकेदार सारा पैसा हड़प रहे हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री ने पाया कि कई मौकों पर सड़कों और नहरों की सफाई के नाम पर अवैध रूप से धन का गबन किया जा रहा है। पंजाब में 13,304 ग्राम पंचायतों में से केवल 5,915 ग्राम पंचायतों में किए गए एक सोशल ऑडिट के अनुसार, लगभग 10,663 वित्तीय गबन के मामले सामने आए। लेकिन जाहिर है, इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक कि जब केंद्रीय टीम ने इस ओर ध्यान दिलाया, तब भी कोई वसूली नहीं की गई। इस भ्रष्टाचार के दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और मजदूरों को मजदूरी देने के लिए आवंटित सार्वजनिक धन को उन लोगों की जेबों में भरते रहे, जिन्होंने इसे अर्जित नहीं किया था।

 

भ्रष्ट आम आदमी सरकार कानूनी सुधारों का कर रही विरोध

उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत अस्वीकृत परियोजनाएं भी मनरेगा निधि से ही चलाई जा रही थीं, लेकिन उनमें कोई निगरानी तंत्र नहीं था न तो कोई मजदूर वास्तव में काम कर रहा था, न उसे भुगतान मिल रहा था, न ही किसी चीज का रिकॉर्ड रखा जा रहा था। इस निगरानी के अभाव में, मेहनती और योग्य मजदूरों को मिलने वाली उचित मजदूरी छीन ली गई। और आज, यह भ्रष्ट आम आदमी सरकार उन सुधारों का विरोध करने के लिए बहस कर रही है और प्रस्ताव पारित कर रही है। यह न केवल भ्रष्टाचार में लिप्त रहने के उनके इरादों को उजागर करता है, बल्कि पंजाब के मेहनती मजदूरों के प्रति उनकी उदासीनता और उपेक्षा को भी दर्शाता है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि खामियों को दूर करने, श्रमिकों को न्याय और उचित मुआवजा दिलाने, उनके शोषण को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि इस योजना के तहत उपयोग किए गए सार्वजनिक धन सही हाथों तक पहुंचे। इसलिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एन.डी.ए. सरकार वीबी जी-राम जी कानून लेकर आई है।

प्रदेश में हर श्रमिक को कम से कम 10 हजार रुपये अधिक मिलेंगे

नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा में यह लाभ इसलिए अधिक है, क्योंकि हमारे प्रदेश में मजदूरी दर ऊंची है। यह देश में सर्वाधिक है। हरियाणा में प्रतिदिन 400 रुपये की दर से न्यूनतम मजदूरी दी जाती है, इससे हर श्रमिक की वार्षिक आय कम से कम 50 हजार रुपये हो सकती है। दूसरी तरफ, पंजाब में न्यूनतम मजदूरी मात्र 339 रुपये प्रतिदिन है। इसी तरह, हिमाचल प्रदेश में तो यह मात्र 236 रुपये प्रतिदिन ही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में अक्तूबर, 2014 से लेकर अक्तूबर, 2025 तक के 10 वर्षों में श्रमिकों को 5,243 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। जबकि, कांग्रेस के 10 वर्ष के शासनकाल में केवल 1,854 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया गया। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ज्यादा लोगों को रोजगार दिया गया और ज्यादा पैसा दिया। चालू वित्त वर्ष के बजट में भी 1 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया हुआ है।

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  • Rashtr Khabar

    A passionate and truth-driven news reporter with a keen eye for detail and a commitment to ethical journalism. I specialize in delivering accurate, timely, and engaging news that informs the public and strengthens trust in media.

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