पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी पर उम्रकैद और 25 लाख तक जुर्माने का नया कानून लागू


चंडीगढ़,19 अप्रैल 2026 : पंजाब में धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों पर अब बेहद कठोर सजा का प्रावधान लागू हो गया है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की स्वीकृति मिलने के बाद यह विधेयक अब कानून का रूप ले चुका है।
इस नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति पवित्र ग्रंथ के अपमान का दोषी पाया जाता है, तो उसे आजीवन कारावास का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही अधिकतम 25 लाख रुपये तक का आर्थिक दंड भी लगाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे समाज और धार्मिक भावनाओं की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है और इससे राज्य में धार्मिक सम्मान को मजबूती मिलेगी।
क्या है नया कानून?
‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल 2026’ को हाल ही में विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसका उद्देश्य धार्मिक ग्रंथों के अपमान से जुड़े मामलों को रोकना और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना है।
इस कानून की प्रमुख विशेषताएं:
- दोषी को उम्रभर जेल की सजा का प्रावधान
- 25 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना
- जांच केवल गजटेड अधिकारी या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा
- किसी भी प्रकार के समझौते या सुलह की अनुमति नहीं
(पृष्ठभूमि)
पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी से जुड़े मामलों ने व्यापक जनभावनाओं को प्रभावित किया है। सिख समुदाय और विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा लगातार सख्त कानून की मांग की जा रही थी। इसी दबाव और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इस संशोधन को आगे बढ़ाया।
यह कदम न केवल कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया गया है, बल्कि धार्मिक भावनाओं के सम्मान को कानूनी सुरक्षा देने का प्रयास भी है।
Impact (प्रभाव)
इस कानून के लागू होने से राज्य में धार्मिक मामलों को लेकर एक स्पष्ट और सख्त संदेश गया है।
- बेअदबी की घटनाओं पर रोक लगने की उम्मीद
- धार्मिक संगठनों में भरोसा बढ़ेगा
- कानून-व्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ सकता है
- आरोपियों के लिए कानूनी जोखिम काफी बढ़ जाएगा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून सामाजिक शांति बनाए रखने में मददगार हो सकता है, लेकिन इसके निष्पक्ष और संतुलित क्रियान्वयन पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी होगा।







