हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने की तैयारी, 9 ब्लड डोनेशन वैन समेत कई स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बड़े फैसले
4.18 करोड़ रुपये में 9 ब्लड डोनेशन वैन का दो साल का रेट कॉन्ट्रैक्ट, दवाओं के सुरक्षित भंडारण के लिए 274 रैक और 9 डीजल जनरेटर भी होंगे उपलब्ध

चंडीगढ़, 30 सितंबर: हरियाणा में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने तथा मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण खरीद और सेवा प्रस्तावों को मंजूरी दी है। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की अध्यक्षता में हुई विशेष उच्च अधिकार प्राप्त खरीद समिति (SHPPC) की बैठक में रक्तदान सेवाओं, दवा भंडारण, ऑक्सीजन आपूर्ति, डायग्नोस्टिक सुविधाओं और आवश्यक चिकित्सा सामग्री से जुड़े कई फैसले लिए गए।
9 ब्लड डोनेशन वैन पर करीब 4.18 करोड़ रुपये खर्च
सरकार ने जिला अस्पतालों में रक्त की उपलब्धता और रक्तदान अभियानों को बढ़ाने के लिए 9 ब्लड डोनेशन वैन की खरीद/सेवा के लिए करीब 4.18 करोड़ रुपये के दो वर्षीय रेट कॉन्ट्रैक्ट को अंतिम रूप दिया है।
इन मोबाइल वैन के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में रक्तदान शिविर आयोजित किए जा सकेंगे। इसका उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों के लिए सुरक्षित रक्त की उपलब्धता को आसान बनाना और रक्तदान व्यवस्था को जिला स्तर पर अधिक प्रभावी बनाना है।
करनाल में CT स्कैन और MRI सेवाओं की दरें तय
बैठक में सिविल अस्पताल करनाल में PPP मॉडल के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली CT स्कैन और MRI सेवाओं की दरों को भी अंतिम रूप दिया गया। इससे सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को आधुनिक जांच सुविधाएं अपेक्षाकृत सुलभ दरों पर उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
दवाओं और टीकों के लिए बेहतर स्टोरेज सिस्टम
सरकारी ड्रग वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 274 स्टार्टर्स और एक्सटेंशन रैक की व्यवस्था पर करीब 1.94 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इसके साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में दवाओं और टीकों के सुरक्षित भंडारण को प्रभावित होने से बचाने के लिए 9 डीजल जनरेटर सेट (50 KVA) के दो वर्षीय अनुबंध को करीब 86.23 लाख रुपये की लागत से अंतिम रूप दिया गया है।
आंख और कान की चिकित्सा सुविधाओं के लिए आधुनिक उपकरण
नेत्र विज्ञान और ईएनटी सेवाओं को अपग्रेड करने के लिए भी महत्वपूर्ण उपकरणों की खरीद के लिए दरें निर्धारित की गई हैं। इसके तहत:
- 6 ऑप्टिकल बायोमीटर
- 13 ईएनटी ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप
- 6 एडवांस्ड फेको इमल्सीफिकेशन मशीनें
शामिल हैं। इन उपकरणों पर कुल अनुमानित लागत करीब 12.22 करोड़ रुपये बताई गई है।
टीबी की जांच के लिए 1 लाख माइक्रो PCR किट
टीबी की जल्द और सटीक पहचान के लिए 1,00,000 माइक्रो PCR टीबी टेस्ट किट (TrueNat chips) की दर को करीब 6.72 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर मंजूरी दी गई है।
वहीं, जिला अस्पतालों में लगे PSA ऑक्सीजन प्लांटों के संचालन और रखरखाव के लिए 8.55 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की निरंतर उपलब्धता बनाए रखना है।
दवाओं और मेडिकल कंज्यूमेबल्स के लिए बड़े बजट
बैठक में प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाओं और चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
इसमें करीब:
- 132 करोड़ रुपये के मेडिकल कंज्यूमेबल्स
- 80 करोड़ रुपये की आयुष दवाएं
- 12.10 करोड़ रुपये की एंटी-रेबीज वैक्सीन
- 3 करोड़ रुपये के WIFS जूनियर सप्लीमेंट्स
- 2.10 करोड़ रुपये के HIV और सिफलिस ड्यूल टेस्ट किट
शामिल हैं।
WIFS जूनियर सप्लाई का इस्तेमाल स्कूली बच्चों में एनीमिया की रोकथाम के लिए किया जाएगा। वहीं HIV और सिफलिस की शुरुआती जांच के लिए ड्यूल किट गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों की स्क्रीनिंग में उपयोग किए जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि सरकार द्वारा लिए गए इन फैसलों का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में दवाओं, टीकों और जांच संबंधी सामग्री की उपलब्धता बेहतर करना तथा स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना है।
उन्होंने कहा कि रक्तदान सुविधाओं से लेकर ऑक्सीजन प्लांट, मेडिकल स्टोरेज और जांच किट तक, विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे प्रबंधों से प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।







