साइलेंट किलर पर पंजाब की बड़ी पहल: ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ से हाई ब्लड प्रेशर मरीजों को राहत

चंडीगढ़ : उच्च रक्तचाप यानी हाइपरटेंशन आज तेजी से भारत में गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले रहा है। बदलती जीवनशैली, मानसिक तनाव, अनियमित खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण यह बीमारी अब सिर्फ बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रही। पंजाब सरकार का कहना है कि ऐसे समय में राज्य की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ हाई ब्लड प्रेशर और उससे जुड़ी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है।
विश्व हाइपरटेंशन दिवस के मौके पर जारी बयान में सरकार ने कहा कि यह योजना मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध करवाने के साथ-साथ महंगे मेडिकल खर्च से भी बचा रही है। राज्य में बड़ी संख्या में लोग अब इस योजना के तहत स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और किडनी संबंधी जटिलताओं का इलाज करवा पा रहे हैं।
क्यों कहा जाता है हाइपरटेंशन को ‘साइलेंट किलर’?
डॉक्टरों के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है। कई बार मरीज को तब पता चलता है जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है। यही वजह है कि इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित रक्तचाप से हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेल होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी भारत में बढ़ते हाइपरटेंशन मामलों को लेकर चिंता जता चुका है।
युवाओं में भी बढ़ रहे मामले
सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं राजिंद्रा अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ शर्मा के अनुसार, अब यह बीमारी केवल 50 या 60 वर्ष की उम्र तक सीमित नहीं रही।
उन्होंने बताया कि 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं और किशोरों में भी हाई ब्लड प्रेशर के मामले सामने आने लगे हैं। तनावपूर्ण जीवन, जंक फूड, कम शारीरिक गतिविधि और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
डॉ. शर्मा ने चेतावनी दी कि अब हाइपरटेंशन से जुड़ी जटिलताएं भी पहले की तुलना में कम उम्र में दिखाई देने लगी हैं। उन्होंने कहा कि इलाज में देरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।
किन जिलों में ज्यादा मरीज?
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब के कई जिलों में हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
पटियाला, एसएएस नगर, होशियारपुर, जालंधर और फरीदकोट में पुरुषों और महिलाओं दोनों में बड़ी संख्या में मरीज सामने आए हैं।
वहीं अमृतसर और लुधियाना में 50 से 77 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में मामलों की संख्या अधिक दर्ज की गई है।
गुरदासपुर में 94 वर्ष तक और एसएएस नगर में 98 वर्ष तक आयु के मरीज दर्ज किए गए हैं, जो बुज़ुर्ग आबादी में बीमारी के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ कैसे बन रही सहारा?
सरकार के अनुसार इस योजना की सबसे बड़ी ताकत यह है कि मरीज आर्थिक डर के बिना अस्पताल पहुंच पा रहे हैं। पहले कई परिवार भारी खर्च के भय से इलाज टाल देते थे, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती थी।
अब योजना के तहत अस्पताल में भर्ती, जांच और गंभीर जटिलताओं के इलाज का खर्च कवर होने से मरीज समय रहते उपचार ले रहे हैं। इससे रिकवरी की संभावना भी बढ़ी है।
मध्यम वर्गीय परिवारों, पेंशनभोगियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए यह योजना बड़ी राहत बनकर सामने आई है।






