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OTT से 48 घंटे में क्यों हट गई दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’? जानिए कौन थे जसवंत सिंह खालरा और क्यों घिर गई फिल्म

पहले सेंसर विवाद, फिर OTT रिलीज और अब अचानक हटाए जाने से चर्चा में आई 'सतलुज'। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित फिल्म को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

Satluj Controversy : पंजाबी अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय तक सेंसर प्रक्रिया में अटकी रहने के बाद यह फिल्म हाल ही में OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन रिलीज के केवल 48 घंटे बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इस घटनाक्रम के बाद फिल्म, इसके विषय और इससे जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों को लेकर बहस तेज हो गई है।

यह फिल्म पहले ‘Punjab 95’ नाम से बनाई गई थी। बाद में इसका नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया और इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम किया गया। हालांकि, 5 जुलाई को ZEE5 ने इसे भारत में अस्थायी रूप से हटाने का फैसला लिया।

तीन साल तक क्यों अटकी रही फिल्म?

फिल्म की रिलीज करीब तीन वर्षों तक विभिन्न औपचारिक प्रक्रियाओं में उलझी रही। निर्माताओं का दावा है कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने फिल्म में लगभग 127 बदलाव (कट्स) करने का सुझाव दिया था। इसी वजह से इसकी रिलीज लगातार टलती रही। बाद में फिल्म को नए शीर्षक ‘सतलुज’ के साथ बिना किसी कट के OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया, लेकिन यह उपलब्धता ज्यादा समय तक नहीं रह सकी।

रिलीज के 48 घंटे बाद क्यों हटाई गई?

OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर फिल्म को भारत में फिलहाल अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। प्लेटफॉर्म ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिल्म को दोबारा स्ट्रीम करने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, फिल्म हटाने के पीछे का विस्तृत कारण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

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कौन थे जसवंत सिंह खालरा?

फिल्म ‘सतलुज’ की कहानी मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष से प्रेरित है। अमृतसर जिले के खालरा गांव में जन्मे जसवंत सिंह खालरा ने अपने करियर की शुरुआत बैंक कर्मचारी के रूप में की थी। बाद में उन्होंने मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करना शुरू किया।

वे विशेष रूप से पंजाब में उग्रवाद विरोधी अभियानों के दौरान कथित रूप से लापता हुए लोगों और कथित अवैध अंतिम संस्कारों से जुड़े मामलों को उजागर करने के लिए जाने जाते हैं। उपलब्ध नगर निगम अभिलेखों और दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने ऐसे मामलों की जानकारी सार्वजनिक की, जिससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई।

1995 में खुद हो गए थे लापता

रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 1995 में जसवंत सिंह खालरा स्वयं लापता हो गए थे। बाद में आरोप लगे कि उनका अपहरण किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। यह मामला वर्षों तक जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा रहा तथा मानवाधिकार से जुड़े चर्चित मामलों में गिना जाता है।

फिल्म की स्टारकास्ट

फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा की भूमिका निभाई है। उनके साथ कंवलजीत सिंह, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहलयान भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं।

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  • अमर सिंह पिछले 19 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने टोटल टीवी और MH One News सहित कई प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में वीडियो जर्नलिस्ट के रूप में कार्य किया है।

    वर्तमान में वे Hindxpress Media House के संस्थापक हैं और Rashtr Khabar डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म का संचालन कर रहे हैं। Rashtr Khabar तेज़, सटीक, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित समाचारों के लिए प्रतिबद्ध है तथा राजनीति, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, व्यापार, शिक्षा, अपराध, खेल, मनोरंजन और टेक्नोलॉजी सहित विभिन्न विषयों की विश्वसनीय खबरें प्रकाशित करता है।

    अमर सिंह का उद्देश्य निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है।

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