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Bhuteshwar Mahadev: 80 फीट ऊंचा, 290 फीट गोलाई… दुनिया के सबसे विशाल प्राकृतिक शिवलिंग का अनोखा रहस्य

Bhuteshwar Mahadev: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का सबसे पावन समय माना जाता है। देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित भूतेश्वर महादेव की महिमा सबसे अलग मानी जाती है। मरौदा गांव के घने जंगलों के बीच मौजूद यह स्वयंभू प्राकृतिक शिवलिंग अपनी विशालता और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करता है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह प्राकृतिक शिवलिंग (Bhuteshwar Mahadev) करीब 80 फीट ऊंचा और 290 फीट की परिधि (गोलाई) वाला है। इसे दुनिया के सबसे विशाल प्राकृतिक शिवलिंगों में गिना जाता है। सबसे खास बात यह है कि वर्षों से यह दावा किया जाता रहा है कि इस शिवलिंग की ऊंचाई और गोलाई समय के साथ बढ़ रही है।

सावन में लाखों श्रद्धालु करते हैं जलाभिषेक

सावन और महाशिवरात्रि के दौरान भूतेश्वर महादेव (Bhuteshwar Mahadev) में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। पहाड़ों और घने जंगलों के बीच स्थित यह शिवधाम प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य स्वीकार करते हैं।

मंदिर परिसर में प्राकृतिक जलहरी भी दिखाई देती है। शिवलिंग के बाईं ओर भगवान गणेश और दाईं ओर माता भगवती जैसी प्राकृतिक आकृतियां श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

शिवलिंग की ऊंचाई बढ़ने का दावा कितना सच?

भूतेश्वर महादेव (Bhuteshwar Mahadev) को लेकर सबसे चर्चित मान्यता यही है कि इसका आकार लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई दशक पहले इसकी ऊंचाई केवल 7 से 8 फीट के आसपास थी। बाद में प्रकाशित धार्मिक साहित्य और उपलब्ध विवरणों में इसकी ऊंचाई पहले से अधिक दर्ज की गई।

मंदिर समिति का कहना है कि पुराने अभिलेखों की तुलना में आज शिवलिंग का आकार काफी बड़ा दिखाई देता है। हालांकि, आधुनिक वैज्ञानिक स्तर पर हर वर्ष इसकी ऊंचाई बढ़ने की कोई सार्वभौमिक रूप से स्वीकार की गई पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस दावे को धार्मिक आस्था और स्थानीय मान्यताओं के संदर्भ में देखा जाता है।

‘भकुर्रा महादेव’ नाम की रोचक कहानी

स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, कभी इस घने जंगल में नंदी के रंभाने जैसी आवाज सुनाई देती थी। स्थानीय बोली में इस ध्वनि को “भकरूना” कहा जाता है। कहा जाता है कि यह आवाज शिवलिंग के समीप स्थित एक शिला से आती थी। इसी वजह से समय के साथ इस स्थान को भकुर्रा महादेव (Bhuteshwar Mahadev) के नाम से भी जाना जाने लगा।

धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है उल्लेख

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह क्षेत्र प्राचीन दण्डकारण्य के शिव क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है। लोकविश्वास है कि भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश नंदी के साथ आकाश मार्ग से गुजर रहे थे। तभी उनकी दृष्टि इस प्राकृतिक शिवलिंग पर पड़ी और भगवान शिव परिवार सहित इसमें समाहित हो गए। तभी से यह स्थान जागृत शिवधाम के रूप में पूजनीय माना जाता है। (Bhuteshwar Mahadev)

धर्म जागरण सेवा संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र के आसपास मौजूद प्राचीन नदियां, पर्वत और ऋषियों से जुड़े स्थल भगवान शिव की महिमा से जुड़े प्रमाण माने जाते हैं।

श्रद्धालुओं की आस्था का अटूट केंद्र

भूतेश्वरनाथ सेवा समिति के अनुसार, सावन और महाशिवरात्रि में लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर समिति और प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध करते हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने बचपन से बुजुर्गों से इस शिवलिंग के बढ़ने की कथा सुनी है और उनका विश्वास है कि बाबा भूतेश्वर (Bhuteshwar Mahadev) अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।

Author

  • अमर सिंह
    संस्थापक एवं एडिटर | Rashtra Khabar News

    अमर सिंह को पत्रकारिता के क्षेत्र में 19 वर्षों का अनुभव है। वे प्रतिष्ठित समाचार चैनलों में वीडियो जर्नलिस्ट के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वे Hindxpress Media House के संस्थापक हैं और Rashtra Khabar News के माध्यम से हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ सहित देशभर की खबरों एवं जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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