Fuel Price Updates: वैश्विक युद्ध के बीच दुनिया भर में महंगा हुआ पेट्रोल, भारत में कीमतें अब ….

Fuel Price Updates: दुनिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है। नतीजतन, कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
हालांकि इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत के उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है, क्योंकि यहां ईंधन की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
वैश्विक बाजार में तेजी, कई देशों में रिकॉर्ड स्तर पर पेट्रोल
28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। इसके चलते दुनिया के कई देशों में पेट्रोल के दाम बढ़ाने पड़े। अमेरिका में खुदरा ईंधन की कीमतों को ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म AAA के आंकड़ों के अनुसार फरवरी में एक गैलन रेगुलर पेट्रोल की औसत कीमत लगभग 2.94 डॉलर थी, जो अब बढ़कर करीब 3.58 डॉलर प्रति गैलन हो गई है।
अमेरिका में अलग-अलग राज्यों में ईंधन के रेट अलग होते हैं, लेकिन कई राज्यों में पेट्रोल की कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन से अधिक पहुंच चुकी है। वहीं कैलिफोर्निया में कीमतें 5 डॉलर प्रति गैलन से भी ऊपर चली गई हैं, जो दो साल से अधिक समय का उच्चतम स्तर माना जा रहा है।
85 देशों में ईंधन महंगा, आने वाले महीनों में और बढ़ोतरी की आशंका
वैश्विक ऊर्जा कीमतों की निगरानी करने वाले डेटा प्लेटफॉर्म के अनुसार ईरान पर हमले के बाद कम से कम 85 देशों ने पेट्रोल की कीमतें बढ़ाई हैं। दुनिया के लगभग 150 देशों में ईंधन की खुदरा कीमतों पर नजर रखने वाले इस प्लेटफॉर्म का अनुमान है कि कई देश हर महीने के अंत में नई कीमतों की घोषणा करते हैं। इसलिए अप्रैल तक और भी देशों में पेट्रोल महंगा होने की संभावना है।
- एशिया में सबसे ज्यादा उछाल: वियतनाम शीर्ष पर
- एशियाई देशों में कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है।
- वियतनाम में 95 ऑक्टेन पेट्रोल लगभग 50% तक महंगा हो गया।
- लाओस में करीब 33% की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
- कंबोडिया में कीमतें लगभग 19% बढ़ीं।
- ऑस्ट्रेलिया में करीब 18% और
- अमेरिका में लगभग 17% की वृद्धि हुई।
वियतनाम में फरवरी के अंत में 95 ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत करीब 0.75 डॉलर प्रति लीटर थी, जो मार्च के दूसरे सप्ताह तक बढ़कर लगभग 1.13 डॉलर प्रति लीटर पहुंच गई।
होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता से एशिया की चिंता बढ़ी
एशियाई देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने कई देशों को सतर्क कर दिया है।
- जापान ने अपने रणनीतिक तेल भंडार को संभावित आपूर्ति के लिए तैयार रखने का निर्देश दिया है।
- दक्षिण कोरिया ने करीब 30 वर्षों में पहली बार पेट्रोल और डीजल पर अधिकतम मूल्य सीमा लागू की है।
- चीन और कनाडा में भी बढ़े दाम
- ऊर्जा संकट का असर बड़े आर्थिक देशों में भी साफ दिखाई दे रहा है।
- चीन में 95 ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत लगभग 1.08 डॉलर प्रति लीटर से बढ़कर 1.19 डॉलर हो गई।
- कनाडा में यही ईंधन 1.16 डॉलर से बढ़कर 1.30 डॉलर प्रति लीटर पहुंच गया, जो लगभग 11% से अधिक की वृद्धि है।
भारत में क्यों स्थिर हैं पेट्रोल-डीजल के रेट?
वैश्विक बाजार में उथल-पुथल के बावजूद भारत में फिलहाल ईंधन की कीमतों में बदलाव नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू मांग-आपूर्ति की स्थिति का आकलन करने के बाद ही नया निर्णय लेती हैं।
इसके अलावा, भारत के पास पर्याप्त तेल आपूर्ति और विविध आयात स्रोत होने के कारण तत्काल संकट की स्थिति नहीं बनी है।
आगे क्या हो सकता है?
अगर मध्य-पूर्व में तनाव लंबा खिंचता है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका असर धीरे-धीरे उन देशों पर ज्यादा पड़ेगा जिनके पास सीमित रणनीतिक भंडार हैं। भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर हैं, लेकिन वैश्विक बाजार में लगातार बढ़ोतरी जारी रही तो भविष्य में घरेलू ईंधन दरों पर दबाव बन सकता है।
फिलहाल भारत के उपभोक्ताओं के लिए राहत की स्थिति बनी हुई है, लेकिन वैश्विक तेल बाजार की दिशा आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के दाम तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।






