हरियाणा में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना होगा और आसान! EV Policy में बड़े बदलाव की तैयारी, सब्सिडी सीधे खरीदार को मिलेगी
राज्य सरकार ई-वाहन नीति में संशोधन की तैयारी में, गुरुग्राम-फरीदाबाद समेत NCR में प्रदूषण कम करने पर फोकस; 500 इलेक्ट्रिक बसें और 200 चार्जिंग स्टेशन भी होंगे विकसित।

हरियाणा सरकार राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए अपनी ई-वाहन नीति में महत्वपूर्ण बदलाव करने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित संशोधनों का सबसे बड़ा उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की प्रक्रिया को आसान बनाना और सरकारी प्रोत्साहन का लाभ सीधे वाहन खरीदार तक पहुंचाना है।
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने ई-वाहन नीति की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए, जिससे इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, कारों और टाटा मैजिक जैसे व्यावसायिक ई-वाहनों पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी सीधे लाभार्थी को मिले। इससे उपभोक्ताओं को वाहन खरीदते समय ही आर्थिक राहत मिल सकेगी।
NCR की जरूरतों के अनुसार बदलेगी नीति
बैठक में मंत्री ने कहा कि हरियाणा का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए विशेष रूप से गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से हरियाणा की मौजूदा ई-वाहन नीति-2022 की समीक्षा कर उसे वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप अपडेट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना विकसित भारत-2047 के लक्ष्य का अहम हिस्सा है और राज्य सरकार भी इसी दिशा में तेजी से कार्य कर रही है।
2027 तक लागू है वर्तमान EV Policy
बैठक के दौरान उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि हरियाणा की मौजूदा ई-वाहन नीति वर्ष 2027 तक प्रभावी है। उन्होंने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार की ई-वाहन नीतियों का अध्ययन कर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे, ताकि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को और अधिक बढ़ावा मिल सके।
500 इलेक्ट्रिक बसें और 200 चार्जिंग स्टेशन की योजना
सरकार ने वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़े स्तर पर सार्वजनिक परिवहन को भी इलेक्ट्रिक बनाने की योजना बनाई है। इसके तहत गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में लगभग 90 करोड़ रुपये की लागत से 500 इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जाएंगी। इन बसों के सुचारु संचालन के लिए 200 चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे। साथ ही निजी क्षेत्र को भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए प्रोत्साहन देने की योजना है।
विश्व बैंक की मदद से चलेगी परियोजना
सरकार ने बताया कि यह पहल विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग से संचालित एयर क्वालिटी कंट्रोल प्रोजेक्ट के तहत आगे बढ़ाई जाएगी। परियोजना का उद्देश्य एनसीआर में प्रदूषण कम करना और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देना है।





