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Asian Games 2026: 4 साल का बैन झेला, फिर की दमदार वापसी… 36 की उम्र में मनप्रीत कौर ने जीता ब्रॉन्ज, रचा इतिहास

Manpreet Kaur Wins Bronze: जिंदगी की मुश्किलों, लंबे संघर्ष और चार साल के बैन के बाद भारतीय शॉट पुट एथलीट मनप्रीत कौर ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार वापसी की है। 36 साल की मनप्रीत ने महिला शॉट पुट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपने करियर में एक यादगार अध्याय जोड़ दिया।

एशियन गेम्स में ऐतिहासिक उपलब्धि

महिला शॉट पुट में ब्रॉन्ज जीतने के साथ मनप्रीत एशियन गेम्स के इस इवेंट में पदक जीतने वाली भारत की चुनिंदा महिला एथलीट्स में शामिल हो गई हैं। इस मेडल के साथ एशियन गेम्स 2026 में भारत के पदकों की संख्या भी 21 तक पहुंच गई।

मनप्रीत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि उनके करियर में एक समय ऐसा भी आया था जब चार साल के प्रतिबंध ने उनके खेल सफर को पूरी तरह रोक दिया था।

13 साल की उम्र में पिता को खोया

5 मार्च 1990 को पंजाब के पटियाला में एक किसान परिवार में जन्मीं मनप्रीत को खेल का माहौल परिवार से ही मिला। उनके पिता और चचेरे भाई खेलों से जुड़े हुए थे।

मनप्रीत ने शुरुआत 100 मीटर दौड़ से की थी। बाद में उनके भाई ने उनकी शारीरिक क्षमता को देखते हुए उन्हें शॉट पुट में जाने की सलाह दी। यही फैसला आगे चलकर उनके करियर की पहचान बन गया।

Asian Games 2026: 4 साल का बैन झेला, फिर की दमदार वापसी… 36 की उम्र में मनप्रीत कौर ने जीता ब्रॉन्ज, रचा इतिहास

लेकिन निजी जिंदगी में उन्हें कम उम्र में ही बड़े झटके झेलने पड़े। महज 13 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया। इसके करीब तीन साल बाद उनकी मां को लकवे का सामना करना पड़ा।

इन परिस्थितियों के बावजूद मनप्रीत ने खेल नहीं छोड़ा। आगे चलकर भारतीय रेलवे में नौकरी करते हुए उन्होंने अपनी ट्रेनिंग जारी रखी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।

2017 में करियर का सबसे बड़ा झटका

मनप्रीत ने अपने करियर में कई अहम उपलब्धियां हासिल कीं। 2015 में उन्होंने 17.96 मीटर के थ्रो के साथ नेशनल ओपन एथलेटिक्स में गोल्ड जीता और रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया।

इसके बाद 2017 में चीन के जिन्हुआ में उन्होंने 18.86 मीटर का थ्रो किया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने एशियन ग्रां प्री में गोल्ड जीता और उस सीजन की विश्व रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचीं।

लेकिन इसी दौर में उनका करियर अचानक मुश्किल मोड़ पर आ गया। डोपिंग मामले में पॉजिटिव पाए जाने के बाद उन पर चार साल का प्रतिबंध लगा। इस दौरान उनके कुछ रिकॉर्ड और पदक भी रद्द किए गए।

चार साल तक प्रतिस्पर्धी खेलों से दूर रहना किसी भी एथलीट के लिए बड़ी चुनौती होती है। मनप्रीत ने हालांकि वापसी का रास्ता चुना और प्रतिबंध समाप्त होने के बाद दोबारा एथलेटिक्स में लौट आईं।

36 साल की उम्र में फिर पोडियम पर

लंबे अंतराल के बाद वापसी करने वाली मनप्रीत ने अब एशियन गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपने संघर्ष को एक नई पहचान दी है।

36 साल की उम्र में एशियन गेम्स के पोडियम पर पहुंचना उनके लंबे खेल सफर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है। चार साल के प्रतिबंध और निजी जिंदगी की कठिन परिस्थितियों के बाद यह मेडल उनके करियर की वापसी की कहानी को भी रेखांकित करता है।

संघर्ष से सफलता तक

मनप्रीत कौर का सफर सिर्फ एक मेडल की कहानी नहीं है। बचपन में पिता को खोने से लेकर मां की बीमारी, खेल में शुरुआती बदलाव, अंतरराष्ट्रीय सफलता, डोपिंग प्रतिबंध और फिर मैदान पर वापसी तक उनके करियर में कई उतार-चढ़ाव आए।

अब एशियन गेम्स 2026 का ब्रॉन्ज उनके लंबे सफर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया है।

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