मुंबई के Lenskart स्टोर में बिंदी-तिलक विवाद: नाजिया इलाही खान का वीडियो वायरल


मुंबई स्थित Lenskart के एक स्टोर से जुड़ा वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में नाजिया इलाही खान नाम की एक राजनीतिक कार्यकर्ता स्टोर के अंदर कर्मचारियों के साथ बहस करती नजर आ रही हैं। बताया जा रहा है कि वह स्टोर प्रबंधन पर धार्मिक भेदभाव का आरोप लगा रही थीं।
वीडियो में देखा जा सकता है कि नाजिया खान स्टोर के मैनेजर से सवाल-जवाब करती हैं और कर्मचारियों के कामकाजी माहौल को लेकर नाराजगी जाहिर करती हैं।
शरिया और प्रबंधन पर उठाए सवाल
वायरल क्लिप में नाजिया एक व्यक्ति से, जिसे मैनेजर बताया जा रहा है, तीखे सवाल करती दिखाई देती हैं। बातचीत के दौरान वह यह तक पूछती हैं कि क्या स्टोर में किसी विशेष धार्मिक व्यवस्था को लागू करने की कोशिश की जा रही है। उनका आरोप है कि प्रबंधन के फैसलों में निष्पक्षता नहीं है और कर्मचारियों के साथ उनके धार्मिक प्रतीकों को लेकर अलग-अलग व्यवहार किया जा रहा है।
तिलक लगाने का दृश्य बना विवाद की वजह
वीडियो का सबसे चर्चित हिस्सा वह है जिसमें नाजिया स्टोर में मौजूद कुछ कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाती दिखती हैं। इस दौरान कुछ कर्मचारी असहज नजर आते हैं, हालांकि वीडियो में किसी तरह का खुला विरोध दिखाई नहीं देता। इस घटना ने “व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम धार्मिक पहचान” जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है।
धार्मिक नारे और बढ़ता तनाव
घटना के दौरान नाजिया खान धार्मिक जयकारे लगाते हुए भी दिखती हैं। वहां मौजूद अन्य लोग पूरे घटनाक्रम को मोबाइल में रिकॉर्ड कर रहे थे, जिससे यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।
नाजिया खान का पक्ष
नाजिया इलाही खान का कहना है कि उन्होंने यह कदम किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि धार्मिक परंपराओं को दबाए जाने के विरोध में उठाया। उनका दावा है कि कुछ कर्मचारियों को तिलक या अन्य धार्मिक प्रतीक पहनने से रोका जा रहा था। उन्होंने कंपनी के शीर्ष प्रबंधन पर भी सवाल उठाए और पूरे मामले की जांच की मांग की है।
कंपनी पर कार्रवाई की मांग
नाजिया ने इस पूरे विवाद के बाद कंपनी के मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
कार्यस्थल और धार्मिक स्वतंत्रता
भारत में कार्यस्थलों पर धार्मिक प्रतीकों को लेकर स्पष्ट और संतुलित नीतियों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। कंपनियां आमतौर पर “ड्रेस कोड” और “कॉर्पोरेट न्यूट्रैलिटी” बनाए रखने की कोशिश करती हैं, जबकि कर्मचारी अपने व्यक्तिगत धार्मिक अधिकारों को महत्व देते हैं।







