फसल कटाई पर पुलिस का पहरा, मंडी में एमएसपी का इंतजार—सुरजेवाला

चंडीगढ़, 24 सितंबर 2026 : कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा में धान की सरकारी खरीद, कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई के समय पर लगाए गए प्रतिबंध और मंडियों में किसानों की समस्याओं को लेकर नायब सिंह सैनी सरकार पर तीखा हमला बोला है। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि एक ओर भाजपा सरकार “एक-एक दाना खरीदने” के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर किसान अपनी तैयार फसल की कटाई और उसे मंडी तक पहुंचाने के लिए सरकारी आदेशों और व्यवस्थागत अड़चनों में फंसता जा रहा है।
सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा का किसान खेत में तैयार खड़ी धान की फसल को लेकर परेशान है और सरकार उसे राहत देने के बजाय नए-नए फरमानों के बोझ तले दबा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसान अपनी जेब से कंबाइन हार्वेस्टर किराए पर लाकर अपने ही खेत में अपनी ही फसल काटता है, तो उसकी कटाई के समय पर इतनी लंबी पाबंदी लगाने का आर्थिक बोझ आखिर कौन उठाएगा?
भाजपा का तानाशाही आदेश, 16 घंटे किसान अपने खेत में कंबाइन नहीं चला सकता : सुरजेवाला
सुरजेवाला ने कहा कि सरकार के निर्देश के अनुसार शाम 6 बजे से सुबह 10 बजे तक कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई पर रोक रहेगी। यानी किसान के पास कटाई के लिए प्रतिदिन केवल 8 घंटे का समय रहेगा। हरियाणा में इस व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासनिक स्तर पर निर्देश जारी किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। उन्होंने कहा कि किसान को खेती मौसम के हिसाब से करनी पड़ती है, सरकारी फाइलों के हिसाब से नहीं।
सुरजेवाला ने सवाल किया कि धान की कटाई के समय कंबाइन हार्वेस्टर की मांग पहले से बढ़ जाती है। यदि मशीनों के संचालन का समय आधे से भी कम कर दिया जाएगा, तो कंबाइन मालिकों को कम समय में अधिक खेतों की कटाई करनी पड़ेगी और इसका सीधा असर किराए पर पड़ सकता है। ऐसे में बढ़ी हुई लागत का भार भी अंततः किसान की जेब पर ही आएगा।
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तैयार फसल खेत में गिर गई तो नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
सुरजेवाला ने कहा कि धान ऐसी फसल है जिसे पकने के बाद समय पर काटना जरूरी होता है। यदि मौसम खराब हुआ, तेज हवा चली या फसल खेत में गिर गई तो किसान को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने भाजपा सरकार से पूछा कि अगर किसान की तैयार फसल खेत में गिरकर खराब हो गई तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या सरकार उस नुकसान की भरपाई करेगी?
उन्होंने कहा कि किसान पहले ही महंगे डीजल, मजदूरी, खाद, बीज, सिंचाई और मशीनरी के बढ़ते खर्च से जूझ रहा है। इसके ऊपर यदि कटाई के लिए उपलब्ध समय कम होगा और कंबाइन का किराया बढ़ेगा तो खेती की लागत और बढ़ेगी।
एमएसपी पर खरीद की मांग को लेकर किसान पहले ही सड़कों पर
सुरजेवाला ने कहा कि किसानों की परेशानी केवल कटाई के समय तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ा सवाल धान की सरकारी खरीद और एमएसपी का है। 22 सितंबर को कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में किसानों ने धान की शीघ्र सरकारी खरीद शुरू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। फसल मंडियों में पहुंच रही है, लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को एमएसपी से कम कीमत पर बिक्री का खतरा है। सुरजेवाला ने कहा कि जिस किसान के हाथ में अन्न होना चाहिए, उसके हाथ में सरकार ने परेशानी और इंतजार थमा दिया है।
मंडी में भी टाइम स्लॉट, खेत में भी समय की पाबंदी—किसान आखिर जाए तो जाए कहां?
सुरजेवाला ने मंडियों में किसानों के वाहनों की एंट्री और टाइम स्लॉट व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर किसान के पास अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं है। बहुत से किसान फसल मंडी तक पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली किराए पर लेते हैं। यदि किसान को निर्धारित समय पर मंडी पहुंचने में देरी हुई या स्लॉट की वजह से फसल की एंट्री नहीं हुई तो किसान को दोबारा परिवहन का खर्च उठाना पड़ सकता है।उन्होंने आरोप लगाया कि खेत से मंडी तक किसान के हर कदम पर एक नया अड़ंगा खड़ा किया जा रहा है।
भाजपा सरकार खरीद का इंतजाम करे, किसान को कानून-फरमान न सुनाए : सुरजेवाला
सुरजेवाला ने कहा कि सरकार को किसानों को यह बताना चाहिए कि सरकारी खरीद कब पूरी तरह शुरू होगी, मंडियों में पर्याप्त स्टाफ और खरीद की व्यवस्था कब तक होगी और किसानों की फसल समय पर कैसे खरीदी जाएगी। न कि किसान विरोधी तानाशाही फैसलों से किसानों पर आक्रमण किया जाए।
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सुरजेवाला का भाजपा सरकार पर पराली के नाम पर कार्रवाई और अब कटाई पर पाबंदी का आरोप
सुरजेवाला ने पराली प्रबंधन को लेकर सरकार की कार्रवाई पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों पर जुर्माने, एफआईआर और जमीन को “रेड एंट्री” में डालने जैसी कार्रवाई का दबाव बना रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ किसान से कहा जा रहा है कि पराली मत जलाओ, दूसरी तरफ खेत खाली करने के लिए समय कम किया जा रहा है। सरकार बताए कि किसान अपनी फसल और खेत का प्रबंधन किस तरीके से करे?
किसान को अपराधी की तरह मत देखिए
सुरजेवाला ने कहा कि किसान कोई अपराधी नहीं है, बल्कि वह देश और प्रदेश का अन्नदाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से सवाल करते हुए कहा कि किसान को हर कदम पर शक की नजर से देखने के बजाय सरकार उसकी मदद क्यों नहीं करती? किसान को पुलिस, नोटिस, जुर्माने और एफ़आईआर का डर दिखाने के बजाय उसे समय पर एमएसपी, मंडी और खरीद की सुविधा क्यों नहीं दी जाती?
उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में किसान हितैषी है तो उसे सबसे पहले तीन काम करने चाहिए—समय पर सरकारी खरीद शुरू करना, एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करना और किसानों के लिए खेत से मंडी तक निर्बाध व्यवस्था उपलब्ध कराना।
तीन कृषि कानूनों के बाद किसानों के जख्म अभी भरे नहीं
सुरजेवाला ने केंद्र की भाजपा सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2020 में लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चले आंदोलन में बड़ी संख्या में किसानों की जान गई और इसके बावजूद भाजपा सरकारों की कृषि नीतियां किसानों के हितों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े, लेकिन भाजपा सरकारों की नीतियों में किसान विरोधी सोच आज भी दिखाई दे रही है।
सरकार का काम किसान को रोकना नहीं, उसकी फसल बिकवाना है : सुरजेवाला
सुरजेवाला ने कहा कि सरकार का असली इम्तिहान भाषणों और घोषणाओं में नहीं, बल्कि मंडी में किसान की फसल बिकने और उसे उसकी उपज का उचित मूल्य मिलने से होता है।
उन्होंने कहा कि सरकार अगर एक-एक दाना खरीदने का दावा करती है तो फिर किसान मंडियों में अपनी फसल लेकर क्यों भटक रहा है? किसान को एमएसपी के लिए सड़क पर क्यों उतरना पड़ रहा है?
उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सैनी से मांग की कि धान खरीद की व्यवस्था को तत्काल सुचारू किया जाए, मंडियों में अनावश्यक अड़चनें दूर की जाएं, किसानों को समय पर गेट पास/टोकन और खरीद सुविधा मिले तथा कटाई और परिवहन से जुड़ी व्यवस्थाओं में किसानों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखा जाए।
सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर निशाना साधते हुए कहा कि खेती-किसानी हरियाणा की खुशहाली की पहचान है। सत्ता के अहंकार में किसानों के साथ धोखा और अत्याचार बंद कीजिए और थोड़ा राजधर्म निभाइए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा का किसान सब देख रहा है और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि जिसने किसान को कम आंका है, वो अर्श से फर्श पर आया है।







