पंजाब में नशे पर सियासी घमासान: बलतेज पन्नू बोले- मान सरकार के कामों से घबराया विपक्ष, मौतों पर कर रहा राजनीति

चंडीगढ़, 1 नवंबर। पंजाब में नशे के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी और विपक्षी दलों के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के मीडिया इंचार्ज और ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने विपक्ष पर नशे के मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार ने विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में कई काम किए हैं, जिससे विपक्ष के पास उठाने के लिए मुद्दे कम पड़ गए हैं।
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पन्नू ने दावा किया कि पंजाब में एनडीपीएस (NDPS) मामलों में दोषसिद्धि की दर बढ़कर 2026 में 89 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने बताया कि नशे से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने 35 विशेष एनडीपीएस अदालतें स्थापित करने और इनके संचालन के लिए 385 पदों को मंजूरी दी है।
पिछली सरकारों पर लगाए नशे को बढ़ावा देने के आरोप
बलतेज पन्नू ने पंजाब में नशे की समस्या के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2007 से 2017 के अकाली-भाजपा शासन के दौरान राज्य में चिट्टे का प्रचलन बढ़ा। इसके बाद कांग्रेस सरकार और तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नशे के खिलाफ कार्रवाई करने के वादे किए, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों को पूरा नहीं किया।
पन्नू ने कहा कि 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद नशे के खिलाफ ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान शुरू किया गया। उनके मुताबिक, इस अभियान में पंजाब पुलिस, सिविल प्रशासन और आम लोगों को साथ लेकर काम किया जा रहा है।
एक लाख से अधिक लोग अभियान से जुड़े: पन्नू
आप नेता ने दावा किया कि गांवों और शहरी वार्डों में बनाई गई डिफेंस कमेटियों के साथ एक लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन कमेटियों के सदस्य अपने क्षेत्रों में नशे के कारोबार और इससे जुड़ी गतिविधियों के खिलाफ प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।
पन्नू के अनुसार, सरकार का उद्देश्य नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय इसे जनभागीदारी वाला अभियान बनाना है। उन्होंने बिहार के डीजीपी के एक मीडिया इंटरव्यू का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब के इस मॉडल से दूसरे राज्य भी सीख सकते हैं।
35 विशेष अदालतें और 385 पदों को मंजूरी
नशे से जुड़े मामलों के लंबित रहने पर चिंता जताते हुए बलतेज पन्नू ने बताया कि पंजाब कैबिनेट ने 35 विशेष एनडीपीएस अदालतें स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इन अदालतों के संचालन के लिए 385 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 35 अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, 315 सहायक कर्मचारी और 35 सहायक जिला अटॉर्नी के पद शामिल हैं।
पन्नू ने बताया कि राज्य में हर साल लगभग 20 हजार एनडीपीएस मामले दर्ज होते हैं और करीब 27 हजार गिरफ्तारियां होती हैं। इनमें से लगभग 12 हजार मामले सत्र अदालतों में पहुंचते हैं, जबकि सालाना करीब 5,700 मामलों का ही निपटारा हो पाता है।
उन्होंने कहा कि 31 अगस्त 2026 तक पंजाब में एनडीपीएस के 52,577 मामले लंबित थे। मौजूदा गति से इन मामलों के निपटारे में लंबा समय लग सकता था। सरकार का मानना है कि नई विशेष अदालतों से सुनवाई तेज होगी और लंबित मामलों का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।
एनडीपीएस मामलों में सजा की दर 89 प्रतिशत होने का दावा
बलतेज पन्नू ने अदालतों के रिकॉर्ड और मीडिया में प्रकाशित आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब में एनडीपीएस मामलों में दोषसिद्धि की दर लगातार बढ़ी है। उनके मुताबिक, 2022 में यह दर 80 प्रतिशत, 2023 में 81 प्रतिशत, 2024 में 85 प्रतिशत और 2025 में 88 प्रतिशत रही।
उन्होंने दावा किया कि 2026 में अब तक अदालतों द्वारा निपटाए गए 1,831 मामलों में से 1,634 मामलों में दोषसिद्धि हुई है, जिससे यह दर 89 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पन्नू ने इसका श्रेय पंजाब पुलिस की जांच प्रक्रिया और अदालतों में ठोस सबूत पेश करने को दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि विशेष अदालतें शुरू होने से मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। हालांकि, अदालतों में दोषसिद्धि की दर को 100 प्रतिशत तक पहुंचने की बात पन्नू का दावा और अपेक्षा है, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
ड्रग मामलों में राजनीतिक दखल बर्दाश्त नहीं: पन्नू
आप मीडिया इंचार्ज ने दावा किया कि भगवंत मान सरकार ने नशे के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में नशा तस्करों के राजनीतिक संपर्क सामने आते रहे, जबकि मौजूदा सरकार के किसी मंत्री, विधायक या पदाधिकारी का नाम ऐसे मामलों में सामने नहीं आया है।
पन्नू ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नशे से जुड़े मामलों में किसी भी नेता या पदाधिकारी की सिफारिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि पुलिस और प्रशासन को बिना राजनीतिक दबाव के कार्रवाई करने की छूट दी गई है।
2027 में काम के आधार पर जनता के बीच जाएगी AAP
विपक्ष पर निशाना साधते हुए पन्नू ने कहा कि नशे से होने वाली मौतों पर राजनीति करने के बजाय सभी दलों को इस समस्या के समाधान में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सरकार के कामों और नीतियों पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन प्रभावित परिवारों के दुख को राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।
उन्होंने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए खेतों तक नहरी पानी की पहुंच 22 प्रतिशत से बढ़ाकर 88 प्रतिशत करने, घरेलू उपभोक्ताओं को 600 यूनिट मुफ्त बिजली देने, 10 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा और महिलाओं को आर्थिक सहायता देने जैसी योजनाओं का उल्लेख किया।
बलतेज पन्नू ने कहा कि आम आदमी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में अपने कामकाज के आधार पर जनता से जनादेश मांगेगी। उन्होंने दोहराया कि ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक पंजाब से चिट्टे और नशे की समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता।
पंजाब की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
पंजाब में नशे का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। ऐसे में सरकार की ओर से विशेष अदालतों, पुलिस कार्रवाई और दोषसिद्धि की दर के आंकड़े सामने रखना विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। दूसरी ओर, नशे की समस्या से प्रभावित परिवारों और युवाओं के लिए वास्तविक राहत का आकलन केवल गिरफ्तारियों या अदालतों में सजा की दर से नहीं, बल्कि नशे की उपलब्धता में कमी, पुनर्वास और प्रभावित लोगों के उपचार जैसे पहलुओं से भी होगा।







