IAS से इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, यूपी से करेंगी शुरुआत; बोलीं- ‘चलिए हिसाब मांगते हैं’
पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया वीडियो के जरिए अपने राजनीतिक सफर का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी, लेकिन फिलहाल किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की बात से इनकार किया है।

नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से अलग होने के बाद अपने अगले कदम से पर्दा उठा दिया है। 29 सितंबर 2026 को जारी वीडियो संदेश में उन्होंने राजनीति में प्रवेश करने की घोषणा की और स्पष्ट किया कि उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी।
दिव्या मित्तल ने अपने संदेश में उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि वह यहीं से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करेंगी। उन्होंने लोगों से व्यक्तिगत रूप से किसी नेता पर निर्भर रहने के बजाय अपने अधिकारों और सवालों के लिए खुद आगे आने की अपील की।
किसी पार्टी में शामिल नहीं होंगी दिव्या मित्तल?
दिव्या मित्तल ने फिलहाल किसी स्थापित राजनीतिक दल में जाने की बात से इनकार किया है। उनका कहना है कि वह नागरिकों के साथ मिलकर राजनीति में काम करना चाहती हैं। इससे संकेत मिलता है कि शुरुआती दौर में वह किसी पार्टी के बजाय नागरिकों के मुद्दों पर आधारित स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। हालांकि संगठन का औपचारिक स्वरूप, भविष्य की चुनावी रणनीति और किसी चुनाव में उनकी संभावित भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है।
उनका नया राजनीतिक संदेश ‘चलिए हिसाब मांगते हैं’ है। वीडियो में उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल और सरकारी जमीन जैसे मुद्दों को उठाने की बात कही।
‘मुझे लोगों की आवाज बनना है’
अपने वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने कहा कि उनका उद्देश्य उन लोगों की आवाज बनना है, जिनकी समस्याएं पर्याप्त रूप से सामने नहीं आ पातीं। उन्होंने राजनीति में बदलाव और स्पष्ट इरादों के साथ काम करने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने चुनावी राजनीति में पैसे और बाहुबल के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार चुनावों में खर्च होने वाला पैसा अंततः सार्वजनिक संसाधनों और विकास से जुड़े मुद्दों से जुड़ता है। उन्होंने स्कूल, सड़क और पुल जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के खर्च और कामकाज को लेकर जवाबदेही की मांग की।
दिव्या मित्तल ने जाति और धर्म आधारित राजनीतिक समीकरणों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने किसी व्यक्ति को उसकी पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी समस्या के आधार पर देखा।
सोशल मीडिया के जरिए लोगों से जुड़ने की अपील
राजनीतिक घोषणा से पहले दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अपने अगले कदम को लेकर जानकारी दी थी। उन्होंने लोगों से व्हाट्सऐप के माध्यम से जुड़ने की अपील भी की थी। ताजा घोषणा में भी नागरिकों की भागीदारी को उनकी राजनीतिक पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद बदली राह
दिव्या मित्तल 2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी रही हैं। उन्होंने करीब 13 वर्षों तक प्रशासनिक सेवा में काम किया। मिर्जापुर में जिलाधिकारी रहते हुए दूरदराज के गांव तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की पहल के कारण उन्हें व्यापक पहचान मिली थी।
उन्होंने 30 अगस्त 2026 को IAS से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। बाद में केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया और 15 सितंबर से वह प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त हो गईं।
इस्तीफे के समय उन्होंने निजी कारणों और जीवन में आगे बढ़ने की इच्छा का उल्लेख किया था। उस समय उनके अगले कदम को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं।
यूपी की राजनीति में क्या बदलेगा?
दिव्या मित्तल की राजनीतिक एंट्री ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर माहौल बन रहा है। हालांकि उनकी घोषणा के बाद अभी यह तय नहीं है कि वह किसी चुनाव में उम्मीदवार बनेंगी या उनका प्रस्तावित मंच किस रूप में काम करेगा।
उनका किसी मौजूदा राजनीतिक दल में शामिल न होने का फैसला उनकी राजनीतिक यात्रा को पारंपरिक पार्टी ढांचे से अलग दिशा दे सकता है। आने वाले समय में उनकी संगठनात्मक संरचना, समर्थकों की भागीदारी, मुद्दों की प्राथमिकता और चुनावी रणनीति से यह स्पष्ट होगा कि उनकी पहल किस रूप में आगे बढ़ती है।
‘जिसका इंतजार था, वो हम खुद हैं’
दिव्या मित्तल ने अपने संदेश में कहा कि नई राजनीति किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं बन सकती। उन्होंने शिक्षक, डॉक्टर, किसान, मजदूर, वकील और छात्रों सहित अलग-अलग वर्गों से इस पहल से जुड़ने की अपील की।
उनका संदेश मूल रूप से जवाबदेही, सार्वजनिक सुविधाओं और नागरिक भागीदारी को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रखने पर आधारित है। अब देखना होगा कि पूर्व IAS अधिकारी की यह स्वतंत्र राजनीतिक पहल उत्तर प्रदेश में किस स्वरूप में विकसित होती है।








