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कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन टाइम से बढ़ सकता है ऑटिज्म का खतरा: AIIMS की स्टडी में बड़ा खुलासा

Digital Impact Kids : देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की एक नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शोध के मुताबिक, 1 साल से कम उम्र के बच्चों में ज्यादा स्क्रीन टाइम देने से आगे चलकर ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शुरुआती उम्र में मोबाइल, टीवी या टैबलेट का अधिक उपयोग बच्चों के मस्तिष्क विकास और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

क्या है ऑटिज्म और क्यों है चिंता का विषय?

ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें बच्चों के व्यवहार, संवाद क्षमता और सामाजिक संपर्क में अंतर दिखाई देता है। इसके शुरुआती संकेत अक्सर 12 से 18 महीने की उम्र में ही दिखने लगते हैं, इसलिए समय पर पहचान बेहद जरूरी होती है।

वैश्विक आंकड़े भी बढ़ा रहे चिंता

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के 2025 के अनुमान के अनुसार, हर 31 में से 1 व्यक्ति में ASD के लक्षण पाए जाते हैं। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि बच्चों के विकास को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।

AIIMS स्टडी में क्या मिला?

AIIMS के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शेफाली गुलाटी के अनुसार, कई शोधों और मेटा-एनालिसिस में यह पाया गया है कि जिन बच्चों में स्क्रीन का उपयोग जल्दी शुरू होता है और समय ज्यादा होता है, उनमें ऑटिज्म के लक्षण अधिक देखने को मिलते हैं।

इस अध्ययन में यह भी सामने आया कि:

✔️ ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों में स्क्रीन एक्सपोज़र जल्दी शुरू हुआ
✔️ लड़कों में इसके मामले अधिक, लेकिन लड़कियों में भी स्पष्ट लक्षण
✔️ अधिक स्क्रीन टाइम से सामाजिक व्यवहार प्रभावित

स्क्रीन टाइम को लेकर क्या कहती हैं गाइडलाइंस?

विशेषज्ञ संस्थाओं के अनुसार बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित रखना बेहद जरूरी है:

18 महीने से कम: पूरी तरह स्क्रीन से दूर रखें
18 महीने–6 साल: सीमित और उद्देश्यपूर्ण उपयोग
7 साल से अधिक: अधिकतम 2 घंटे प्रतिदिन

ये दिशानिर्देश अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स द्वारा सुझाए गए हैं।

माता-पिता की भूमिका अहम

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को मोबाइल या टीवी के सहारे व्यस्त रखने के बजाय उनके साथ समय बिताना ज्यादा जरूरी है।

✔️ बातचीत और खेल बच्चों के विकास में मददगार
✔️ सामाजिक कौशल बेहतर होते हैं
✔️ मानसिक और भावनात्मक विकास मजबूत होता है
🔍 पहचान और उपाय

ऑटिज्म की पहचान आमतौर पर 2–3 साल की उम्र में होती है, लेकिन इसके संकेत 18 महीने के बाद दिख सकते हैं।

कोई एक निश्चित मेडिकल टेस्ट नहीं
व्यवहार और संवाद के आधार पर पहचान
समय पर हस्तक्षेप से सुधार संभव

Author

  • Rashtr Khabar

    A passionate and truth-driven news reporter with a keen eye for detail and a commitment to ethical journalism. I specialize in delivering accurate, timely, and engaging news that informs the public and strengthens trust in media.

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